वे दिन भी क्या दिन थे जब मैडम दिल्ली को ललकारती रहती थीं और हमारे जैसे दर्शक भी कहते थे कि क्या बात है, मैडम योद्धा हैं! मगर बंगाल हार के बाद वे फिर सड़क पर निकलीं, तो वे दृश्य नहीं दिखे, जब हजारों लोग उनके पीछे-पीछे चलते दिखते थे। फिर एक चैनल पर एक ‘सेफोलॉजिस्ट’ ने कहा कि 2034 तक भाजपा कहीं नहीं जा रही।

तुरंत विपक्ष के एक बड़े नेता का जवाब आया कि हम ‘जेन-जी’ को समझा देंगे… इसे भगा देंगे..! एक कहने लगे कि ‘जेन-जी’ ने जो नेपाल और बांग्लादेश में किया, यहां भी करेंगे, क्योंकि पेपर लीक है, महंगाई है, बेरोजगारी है, तानाशाही है। एक सत्ता प्रवक्ता बोला कि ‘जेन-जी’ तो भाजपा को बंगाल में जिता रही है और मंदिरों में घंटा बजा रही है, हनुमान चालीसा बांच रही है!

इतने पर भी जब कथित ‘जेन-जी’ विपक्ष के बचाव के लिए नहीं आई, तो विपक्ष ‘काकरोच पार्टी’ का आह्वान करने लगा! सत्ता प्रवक्ता कहते रहे कि आपके पास ‘काकरोच’ है, तो हमारे पास ‘हिट’ है!

बहरहाल, एक नामी एंकर अपने चैनल पर ‘काकरोच पार्टी’ की वेबसाइट से आंकड़े लेकर दिखाता रहा कि किन देशों से इसके कितने फॉलोअर हैं और कई देशों से तो समान संख्या है। इस ‘काकरोच संस्कृति’ के आह्वान की राजनीति के निहितार्थों को खोलते हुए एक एंकर ने कहा कि आप स्वयं तो चुनाव जीत नहीं सकते, इसलिए चाहते हैं कि कोई ‘जेन-जी’, कोई ‘काकरोच’ आए, जो सत्ता की कुर्सी पर बिठा दे! एंकर ने साफ किया कि ‘काकरोच पार्टी’ डॉलर से बनी पार्टी है, यह एक ‘इंस्टाग्राम पार्टी’ है, यह ‘फर्जी’ पार्टी है, जिसका डर दिखाया जा रहा है।

फिर एक दिन सरकार का झटका ‘इंपीरियल जिमखाना क्लब’ को जरा जोर से लगा। सरकार ने कह दिया कि जिमखाना क्लब बंद किया जाए! जवाब में इस देश पर एहसान करने वाले एक से एक रणबांकुरे चैनलों में आकर जिमखाना के ‘महान औपनिवेशिक अतीत’ और बड़े सेनाधिकारियों के ‘अभिजात्यवाद’ की दुहाई देने लगे… लेकिन चैनल चर्चा इस ‘अभिजात्यवाद’ के खिलाफ ही रही।

फिर भी विपक्ष के कुछ नेता इस बात पर अड़ गए कि चूंकि विपक्ष के एक बड़े नेता इसके सदस्य हैं, इसलिए सरकार को जिमखाना से चिढ़ है। एक एंकर ने जब कुछ नाम लेकर पूछा कि क्या फलां-फलां भी सदस्य हैं, तो कोई जवाब नहीं आया। फिर एक ने ताना मारा कि चूंकि प्रधानमंत्री सदस्य नहीं हैं, इसलिए ऐसा कर रहे हैं, तो बाकी चर्चक हंसने लगे।

वक्ता-प्रवक्ता आजकल यही करते हैं। जब उनकी चलती नहीं, तो जोर-जोर से बोलते रहते हैं, ताकि कोई दूसरे की न सुन पाए। एंकर पता नहीं क्यों, इस तरह के बाधकों को चुप नहीं करते।

‘इंपीरियल जिमखाना क्लब’ 1913 में अंग्रेजों द्वारा अपने बड़े सेनाधिकारियों के ऐशो-आराम के लिए बनवाया गया था। यह क्लब नई दिल्ली की सबसे महंगी सत्ताईस एकड़ जमीन पर मामूली किराए पर चलता है। एक एंकर ने साफ कहा कि जमाना बदल चुका है, अब इस ‘औपनिवेशिक अवशेष’ को यहां से हटना चाहिए। ‘क्लब’ वाले कहीं और जमीन खरीद लें और क्लब बना लें। एक एंकर ने तो सीधे यही लाइन दे दी कि ‘बुलडोज जिमखाना’!

बहरहाल, सबसे बड़ी खबर त्विषा की मौत की रही, जिसका श्रेय सिर्फ एक चैनल और उसके एंकर को दिया जा सकता है, जिसने त्विषा के मामले को तब भी नहीं छोड़ा, जब अन्य कई स्पर्धी चैनल इस मामले में खबर लेना तक छोड़ चुके थे।

यही बात त्विषा के पिता और भाई ने कही कि अगर यह चैनल और एंकर इस मामले के पीछे न लगे होते, तो त्विषा का मामला न सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचता, न त्विषा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम होता, न मामला जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द होता, न त्विषा की सास की जमानत खारिज होती, न उनको पुलिस पूछताछ के लिए ले जाती और न न्याय मिलने की उम्मीद होती।

अब तक की मीडिया कवरेज और चर्चा में त्विषा की सास गिरिबाला की भूमिका संदेह के घेरे में हमेशा रही। मामले ने कई मोड़ लिए। कुछ कहते रहे कि मामले का ‘मीडिया ट्रायल’ बंद हो। बड़ी अदालत ने भी चाहा कि ‘मीडिया ट्रायल’ बंद हो, मामले से संबद्ध परिवार के लोग मीडिया से न बोलें, लेकिन एक एंकर ने इसे भी प्रश्नांकित करते हुए अदालत से पूछा कि क्या आदमी अपने दर्द को भी न कहे! इसी एंकर ने कहा कि गिरिबाला को गिरफ्तार करो और उसके बाद वे हुईं भी।

मगर कर्नाटक के नाटक का जवाब नहीं। अपनी ही सरकार होने के बावजूद राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दबाव के चलते कह तो दिया कि हटेंगे, लेकिन यह भी कह दिया कि वे कर्नाटक छोड़ दिल्ली की राजनीति नहीं करने वाले। मतलब साफ है कि मैं भागा नहीं हूं… अभी मैदान में हूं..!

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काकरोच कोई बुरा या अपमानजनक शब्द नहीं है। विकीपीडिया पर खोज करने से पता चलता है कि काकरोच ने लगभग 20 करोड़ वर्षों से अपनी मूल शारीरिक संरचना को बरकरार रखा है- यानी इंसानों (होमो सेपियंस) के अफ्रीका में लगभग तीन लाख वर्ष पहले पैदा होने से 19 करोड़ 97 लाख वर्ष पहले से। इस दुनिया में रहने का अधिकार इंसानों से पहले काकरोच का बनता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक