भाजपा की अगुआई वाले राजग का पहला शासन काल ‘दादरी कांड’ से प्रभावित हुआ था। आरोप लग रहे थे कि लोगों के फ्रिज की तलाशी लेकर देखा जा रहा था कि कोई खास मांसाहार तो नहीं है। वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि नवरात्रि के समय बंगाल के नेता हाथ में मछली लेकर ऐसे घूम रहे थे, जैसे उनका चुनाव निशान यही हो। असम के मुख्यमंत्री मांसाहार को लेकर ऐसे बयान दे रहे थे, जिनकी मियाद चार मई को खत्म हो जाएगी। पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच जब सभी चीजों की महंगाई आसमान छू रही है तो बंगाल की हवा में सिर्फ ‘मत्स्यगंधा’ है। चुनाव आयोग के समांतर भाजपा का खान-पान विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। चुनाव आयोग को इस बात की परवाह नहीं है कि कितने लाख लोग मतदान से वंचित हो गए। लेकिन, भाजपा अपने खान-पान पुनरीक्षण अभियान के तहत मछली खाने को बंगालियों का बुनियादी अधिकार बता रही है। उत्तर भारत में मांसाहार के खिलाफ पहरेदार बने नेताओं ने बंगाल में अपना मत्स्यलोक बना लिया है। मांसाहार पर भाजपा के पुनरीक्षण पर बेबाक बोल

‘जिस मछली में जितना कांटा उसमें उतना स्वाद’…यह बंगाली कहावत याद आ गई जब ‘गोली मारो … को’ मार्का नेताजी की बंगाल में भगवा पटका डाल कर मछली खाती हुई तस्वीर और वीडियो इंटरनेट पर संक्रामक हो गए। अनुराग ठाकुर जिस दक्षता से मछली के कांटे निकाल रहे थे, उसे देख कर लग रहा कि मछली खाने से उनका पुराना नाता रहा है। आम बंगाली समुदाय के सामने आपके भद्रलोक या भद्रमानुष होने की पहचान यह भी है कि आप मछली कैसे खाते हैं। अनुराग ठाकुर की मछली खाने की सिद्धता पर तो कोई भी बंगाली मतदाता उन पर मत लुटा दे।

आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ के सिनेमाघरों में धूम मचा देने के बाद इंटरनेट का रील समुदाय सक्रिय हुआ। रील के इस चलन के तहत हिंदुस्तानी जासूस पाकिस्तान में जाता है। वह अपनी पहचान कुशलता के साथ छिपाता है। लेकिन वह पकड़ा तब जाता है, जब उसे मांसाहार खाने दिया जाता है। रीलवाला भारतीय जासूस अपनी आदत के अनुसार झटके में बोल देता है कि माफ कीजिएगा जनाब, मैं मंगलवार को मांसाहार नहीं खाता। लोग इस रील पर खूब हंसे। गर्व भी हुआ कि ‘चाहे प्राण जाई, पर मंगलवार को मांसाहार ना खाई।’ भारत और पाकिस्तान की सीमा मिलती है, तो दोनों जगहों पर मंगलवार एक ही दिन पड़ता है।

अब बात करते हैं ‘राजनीतिक धुरंधर’ की। माथे पर चंदन का टीका, गले में भगवा पटका और थाली में माछ-भात। खास बात यह कि वह दिन भी मंगलवार था। पर भौगोलिक रूप से दिल्ली और बंगाल बहुत दूर हैं, तो शायद दिल्ली का मंगल, बंगाल पहुंचते हुए बुधवार तो जरूर हो जाता होगा, तभी अनुराग ठाकुर ने इतने प्रेम से मछली खाई। किसी सत्ता समर्थक ने आकर कोहराम नहीं मचाया कि मंगलवार को मछली खाने से हिंदुत्व और सनातन खतरे में आ गया।

सत्ता समर्थकों में इतनी सहिष्णुता आ गई कि भगवा पटके के साथ मछली खाने में कोई बुराई नहीं दिखी। अब अनुराग ठाकुर राजनेता हैं, कोई दीपिका पादुकोण जैसी अभिनेत्री तो नहीं। दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की पोशाक में जब एक सिनेमा में आधुनिक नृत्य किया तो फिल्मों की यह नायिका सत्ता समर्थकों की सबसे बड़ी खलनायिका बन गई थी।

जरा याद कीजिए, बिहार विधानसभा चुनाव का समय। राजद के नेता व बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री की मछली के साथ तस्वीर चर्चा में आ गई थी। मछली का सेवन करने के लिए तेजस्वी यादव को चौतरफा धिक्कारा गया। उन्हें पूरे हिंदू धर्म का दुश्मन बता दिया गया। उस वक्त किसी मैथिली ठाकुर को बिहार की खान-पान की संस्कृति का ध्यान नहीं आया था। उस वक्त मैथिली ठाकुर का सामान्य ज्ञान शीतगृह में निष्क्रिय पड़ा था। लेकिन बंगाल के चुनाव में भाजपा नेताओं के मछली सेवन करने के बाद मैथिली ठाकुर को याद आया कि बिहार और बंगाल में मछली खाना संस्कृति का हिस्सा है।

पिछले कुछ वर्षों से पूरे उत्तर भारत में चैत्र नवरात्र से लेकर रामनवमी तक, सावन के महीने, शारदीय नवरात्र में मांसाहार की बिक्री पर पाबंदी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। मांसाहारी चीजों की खरीद-बिक्री तो दूर अगर किसी ने सोशल मीडिया पर ऐसा खान-पान दिखा भी दिया तो सारे सरकार समर्थक उस पर हाय-हाय करने लगते हैं। याद कीजिए इस बार की रामनवमी। बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जय श्रीराम के नारे को मुख्य मुद्दा बनाया था। तब ऐसे मीम बनते थे कि जय श्रीराम का नारा सुनते ही तृणमूल के नेता और समर्थक असुर की तरह क्रोधित हो जाते थे। महज पांच साल बाद की बात है। भाजपा पंजाब के सांस्कृतिक यथार्थ को समझ गई।

रामनवमी के समय बंगाल में भाजपा के नेता बड़ी-बड़ी मछली लेकर ऐसे घूम रहे थे, जैसे भाजपा का चुनाव चिह्र कमल नहीं, मछली हो। अभी तक जो मछली उत्तर भारत में विधर्मियों का खाना करार दी जा रही थी, वही बंगाल में भाजपा नेताओं के लिए ‘जालेर फल’ हो गई है। यानी मछली तो जल में पैदा होने वाली फल है। चार मई तक बंगाल में मंगलवार को मछली खाना फलाहार माना जा सकता है। एक पुरानी कहावत की तर्ज पर बंगाल में भाजपा के नेताओं को देख कर कहा जा सकता है कि नया ‘बंगाली’ माछ ज्यादा खाता है।

इन दिनों दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आम लोगों की शिकायत है कि उग्र राजनीति के कारण अब ताजी मछली बेचने का बाजार बहुत सीमित हो गया है। कुछ खास जगहों को छोड़ दें तो उन्हें किसी आनलाइन मंच से ही प्रसंस्कृत मछली मंगवानी पड़ती है, जिसमें ‘वो’ स्वाद नहीं होता है। मछली की सहज उपलब्धता से वंचित कर दिए गए लोग आज देख रहे हैं कि भाजपा के यही उत्तर भारत वाले नेता मछली को कंद-मूल की तरह खा रहे हैं।

बंगाल की तरह का हाल असम में भी देखा गया। हिमंत बिश्व सरमा मांसाहार पर जिस तरह के बयान दे रहे थे, उसे सुन कर तो असली धार्मिक लोग हृदयाघात के शिकार हो जाएं। लेकिन आप हृदयाघात की बात बोलेंगे तो असम के भाजपा नेता आपको समझा देंगे कि फलां फलां मांसाहार में इतना प्रोटीन होता है। उसे रोज खाएंगे तो हृदय मजबूत होगा। घास-फूस खाकर प्रोटीन नहीं मिल सकता। हिमंत बिश्व सरमा ने तो मांसाहार को लेकर ऐसे क्रांतिकारी बयान दिए हैं, जिसे हम इस स्तंभ में अक्षरश: लिख भी नहीं सकते। घर के अंदर खाओ वाली सलाह क्या चुनाव के बाद देश के सभी हिस्सों में कायम रहेगी, यह तो देखने वाली बात होगी।

याद कीजिए राजग के पहले शासन में हुआ ‘दादरी कांड’। तब आरोप लगाया जा रहा था कि लोगों के घरों में घुस कर फ्रिज की तलाशी ली जा रही थी। इसी विवाद में मोहम्मद अखलाक की हत्या हुई। इस विवाद ने पूरे देश को ध्रुवीकृत कर दिया था। प्रतिरोध में ‘पुरस्कार वापसी’ जैसे अभियान चले थे। वहीं, आज असम और बंगाल में हालात इस तरह के बन गए हैं कि आप मांसाहार से परहेज करते हों तब भी भाजपा के नेता जबरन आपके फ्रिज में मछली या कुछ ऐसा प्रोटीयुनक्त खाद्य-पदार्थ रख जाएंगे। एक-दो दिन में पूछ भी आएंगे, खत्म तो नहीं हो गया, फ्रिज में और रखवा दें। आम लोगों ने सोचा होगा कि ज्यादा हो रहा है तो फ्रिज के साथ ‘फ्रीजर’ में भी रख देते हैं। चुनाव के बाद काम आएगा, क्योंकि ऐसा न हो कि चार मई और मछली गई…।

बंगाली में कहावत है ‘माछेर भात बंगाली’। यानी मछली और भात ही बंगाली की पहचान है। मछली को लेकर कई भाषाओं में कहावत है। अंग्रेजी में कहा जाता है, ‘फिशिंग इन ट्रबल्ड वाटर’। एक और कहावत है ‘फिश आउट आफ वाटर’ इन दोनों कहावतों के भावार्थ के साथ ‘तस्वीरार्थ’, ‘वीडियोयार्थ’ के साथ एक ही नाम आता है-बंगाल में भाजपा।

असम और बंगाल में चुनावी द्वार से प्रवेश के साथ भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने ऐसी पलटी मारी कि आने वाले वक्त में ‘यू टर्न’ की जगह कमल के फूल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इंटरनेट की उत्सुक जनता अनुराग ठाकुर से पूछ रही है कि क्या आप नगालैंड में भी चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे?

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बीजेपी नेता और सांसद मनोज तिवारी इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में हैं। मछली खाते हुए उनकी एक तस्वीर वायरल होने के बाद उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिस पर अब उन्होंने खुलकर सफाई दी है। वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि कुछ लोग एडिटेड और एआई से बनाई गई तस्वीरें फैलाकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के पास अब असली मुद्दे नहीं बचे, इसलिए झूठी चीजें वायरल की जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक