Duniya Mere Aage: जिंदगी में हम हमेशा कुछ न कुछ चाहने की आदत में बंधे रहते हैं। यह चाहत ही शायद हमें इंसान बनाती है, हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। कभी ये इच्छाएं छोटी होती हैं, जैसे किसी अपने की मुस्कान, किसी परीक्षा में सफलता, या एक सुकून भरी शाम और कभी बहुत बड़ी जैसे एक बेहतर भविष्य, पहचान, सम्मान और अपने सपनों की उड़ान। मगर हर इच्छा, हर ख्वाब हमें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।

जब हम अपनी आंखों में ख्वाब संजोते हैं, तो वह ख्वाब हमें इस दुनिया के हर कोने में कुछ नया खोजने की प्रेरणा देता है। इन्हीं ख्वाबों के सहारे हम अपने जीवन के भविष्य के महल मन ही मन बना लेते हैं, मानो हर मंजिल हमारी मुट्ठी में हो। उस समय हमें लगता है कि हम कुछ भी कर सकते हैं, कुछ भी पा सकते हैं, लेकिन क्या कभी हमने ठहरकर यह सोचा है कि इन ख्वाबों को पूरा करने का रास्ता उतना आसान नहीं होता, जितना हमें शुरुआत में लगता है?

शुरुआत में हर ख्वाब हमें अपना-सा लगता है। वे ख्वाब हमारे मन में इतने गहरे बैठ जाते हैं कि हमें लगता है जैसे वे हमारी ही दुनिया हों। हर मंजिल हमसे बस कुछ कदमों की दूरी पर दिखाई देती है। हम ख्वाबों के रंगीन संसार में खो जाते हैं, जहां सब कुछ सुंदर होता है, सरल होता है। हम यह मान लेते हैं कि मेहनत करेंगे तो सब मिल जाएगा, कि हर बाधा को हम आसानी से पार कर लेंगे। उस समय हमारे भीतर आत्मविश्वास होता है, जोश होता है और भविष्य के प्रति एक अटूट विश्वास होता है, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता है, हम हकीकत का सामना करने लगते हैं।

हकीकत की ठोकरें हमें हमारे ख्वाबों की असली कीमत समझाने लगती हैं। जिन रास्तों पर हमने फूलों की कल्पना की थी, उन्हीं रास्तों पर कांटे उग आते हैं। असफलताएं हमें घेर लेती हैं और हमारी उम्मीदें धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगती हैं। ऐसा आमतौर पर होता है कि जब कोई चीज हमें आसानी से मिल जाती है, तो हम उसकी कीमत समझने की कोशिश नहीं करते। इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति हमसे विनम्र और सद्भावपूर्ण व्यवहार करता है, हमें अपनी बात रखने या अपनी पसंद से आचरण करने की जगह मिलने पर कोई आपत्ति नहीं करता, तो हम वैसे व्यक्ति को हल्का मानकर उसकी अनदेखी करते हैं या उसे कम करके आंकते हैं।

मगर यही जब हमारे व्यक्तित्व में घुल जाता है, तब हम ऐसे व्यवहार की आदी हो जाते हैं और हमारे भीतर एक विचित्र अहं अपने पांव पसारने लगता है। हमें इसका भान तब होता है, जब हम किसी के लिए कुछ करते हैं और उसकी कद्र करते हैं और वह हमें कोई महत्त्व नहीं देता। दरअसल, बात यहां यह है कि हमें दूसरों के प्रति ही वैसा व्यवहार करना चाहिए, उसकी कद्र करनी चाहिए, जो हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं। वक्त का पहिया कभी रुकता नहीं। यह बिना किसी से पूछे हमें आगे धकेलता रहता है।

इस रफ्तार में हम अक्सर अपने ख्वाबों को पीछे छोड़ देते हैं। हमें लगने लगता है कि दुनिया के साथ चलने के लिए हमें अपने सपनों से समझौता करना पड़ेगा। जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का बोझ हमारे कंधों पर इतना बढ़ जाता है कि हम खुद के लिए समय निकालना ही भूल जाते हैं। परिवार, समाज और परिस्थितियों की अपेक्षाएं हमें जकड़ लेती हैं। धीरे-धीरे हम अपने भीतर के उस इंसान से दूर हो जाते हैं, जो कभी बड़े सपने देखा करता था। वक्त की इस अंधी दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि एक समय था जब हमारे ख्वाब हमारे जीने का कारण हुआ करते थे।

फिर किसी एक शाम, जब हम अकेले होते हैं और जिंदगी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है, तब अचानक हमारे भीतर कहीं कोई आवाज गूंजने लगती है। यह आवाज हमारे उन्हीं ख्वाबों की होती है, जो कभी हमारी आंखों में चमक बन कर बसे थे। जब कोई ठंडी हवा चेहरे को छूती है और हम अपनी जिंदगी के बीते वर्षों को याद करते हैं, तो दिल के किसी कोने से एक सवाल उठता है- ‘क्या हुआ उन ख्वाबों का, जो कभी तुम्हारी आंखों में उम्मीदों की तरह चमकते थे?’ यह सवाल हमें बेचैन कर देता है। हमें एहसास होता है कि कहीं न कहीं हमने अपने ख्वाबों को रास्ते में ही छोड़ दिया है।

जिंदगी की दौड़ में हम बहुत-सी चीजों को खो देते हैं। हम अपने शौक, अपनी मासूम इच्छाएं, और कभी-कभी अपनी पहचान भी खो बैठते हैं। दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करते-करते हम खुद की अपेक्षाओं को दबा देते हैं, लेकिन यह बेहद जरूरी है कि हम खुद को पूरी तरह से बदलने न दें। कभी इतना न बदल जाएं कि हम अपने असली ख्वाबों को ही भूल जाएं, क्योंकि यही ख्वाब थे, जिन्होंने हमें एक दिशा दी थी, जिन्होंने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी। अगर हम अपने ख्वाबों को मरने देंगे, तो हम धीरे-धीरे अपनी असल पहचान भी खो देंगे।

सपने हमें जीने की वजह देते हैं। वे हमें हर गिरावट के बाद उठने की ताकत प्रदान करते हैं। यह सच है कि ख्वाबों की राह आसान नहीं होती। इस राह में असफलताएं आती हैं, निराशा मिलती है, और कई बार खुद पर भी शक होने लगता है। मगर इन्हीं मुश्किलों से गुजर कर सपने साकार होते हैं। संघर्ष के बिना कोई भी सपना सच नहीं होता। जरूरी यह नहीं है कि हम हर ख्वाब पूरा कर ही लें, जरूरी यह है कि हम उन्हें जिंदा रखें।

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प्रदूषण की लगातार बढ़ती समस्या और प्राकृतिक संसाधनों का सीमित होना आज दुनिया की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हर देश और नागरिक इस स्थिति से प्रभावित हैं। वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण को कैसे रोका जाए, क्योंकि यह प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान ले रहा है। पढ़िए पूरी खबर…