दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू हो गई है। नई पॉलिसी के जरिए सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि मार्च 2030 तक दिल्ली को अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल पर निर्भर किया जाए। इसके लिए सरकार ने नई पॉलिसी में कई ऐसे नियम और कई ऐसे लाभ लोगों के लिए रखे हैं जो दिल्लीवासियों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसमें सबसे खास जो नियम सरकार की ओर से रखा गया है वह है इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि यानी कि सब्सिडी, जी हां नई पॉलिसी के तहत सरकार की ओर से ईवी टू व्हीलर पर 30 हजार रुपए तक की, थ्री व्हीलर पर 50,000 रुपए तक की और चार पहिया वाहन पर 1 लाख रुपए तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा। इसके अलावा लाइट कॉमर्शियल मालवाहक वाहनों (अधिकतम वजन 3,500 किलोग्राम तक) की खरीद पर भी 1 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से दी जाएगी।
नई पॉलिसी से पहले पुराने वादे भूली सरकार?
सरकार ने नई ईवी पॉलिसी में सब्सिडी को लेकर लोक लुभावन वादे तो जरूर किए हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि सरकार पुरानी ईवी पॉलिसी के तहत मिलने वाली सब्सिडी के पेंडिंग मामलों का निपटारा कब तक करेगी? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में पुरानी ईवी पॉलिसी के तहत 4 हजार से अधिक लोगों को सब्सिडी का इंतजार है और इन लोगों को मिलने वाली राशि करीब 7.5 करोड़ रुपए है। पुरानी सब्सिडी के लंबित मामलों में एक केस मेरा भी है। मैंने (कपिल तिवारी) मई 2023 में Ather का इलेक्ट्रिक स्कूटर लाजपत नगर स्थित एक डीलर से खरीदा था। उस समय दिल्ली सरकार की ईवी पॉलिसी के तहत मुझे 18,300 रुपए की सब्सिडी मिलनी थी जिसका भरोसा मुझे वाहन खरीदते वक्त डीलर की ओर से दिया गया था। सरकार की घोषित योजना के अनुसार, निर्धारित समय (3-4 महीने) में यह राशि मेरे बैंक अकाउंट में आनी थी, लेकिन आज तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है और मुझे मेरी सब्सिडी अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
सरकार की नई ईवी पॉलिसी पर होगा भरोसा?
यहां बात सिर्फ18,300 रुपए की सब्सिडी की नहीं है बल्कि सरकार के उस भरोसे पर सवाल है जिसके आधार पर लोगों ने पेट्रोल वाहनों की बजाय इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का फैसला किया है। सरकार की ओर से यह कहा गया था कि पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए लोग ईवी पर शिफ्ट करें और सरकार की ओर से मिलने वाले आर्थिक प्रोत्साहन का लाभ लें। अगर उस प्रोत्साहन राशि को पाने के लिए सालों का इंतजार करना पड़े तो फिर ऐसे भरोसे का क्या फायदा? ऐसे में सरकार की नई ईवी पॉलिसी पर लोगों का भरोसा कैसे कायम होगा?
डॉक्यूमेंटेशन कंप्लीट फिर भी नहीं आई सब्सिडी
बीते तीन सालों में मैंने सब्सिडी के लिए उस डीलर से जिससे ईवी स्कूटर खरीदा था और दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग दोनों जगह कई बार संपर्क किया। 3-4 बार मैंने विभाग को ईमेल के जरिए अपनी जानकारी भेजकर अपनी समस्या से अवगत कराया है, लेकिन मुझे विभागीय तौर पर कोई मदद नहीं मिली है और ना ही सब्सिडी की राशि मेरे अकाउंट में आई है। यहां तक कि 3 साल में अनगिनत बार मैं दिल्ली सरकार के सिविल लाइन में स्थित ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में भी जा चुका हूं और हर बार मुझे सिर्फ यही आश्वासन मिलता है कि सरकार की ओर से पैसा भेजा जा रहा है और बहुत जल्द आपकी सब्सिडी आपके बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर हो जाएगी। विभाग की ओर से बीते तीन साल में मैंने यहां तक भी सुना है कि आपका डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस पूरा कंप्लीट है और पैसा जल्द ही अकाउंट में आ जाएगा। अगर डॉक्यूमेंटेशन 3 साल से कंप्लीट है तो फिर पैसा ट्रांसफर होने में इतनी देरी कैसे?
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से ताजा अपडेट क्या मिला?
मैंने दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस में आखिरी विजिट पिछले महीने (जून में) ही किया था। उस वक्त मुझे विभाग के अधिकारियों की ओर से यही कहा गया कि सरकार ने पेंडिंग सब्सिडी के निपटारे की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सरकार की ओर से फंड भी रिलीज किया जा रहा है। आपकी सब्सिडी का काम डॉक्यूमेंट की वजह से बिल्कुल नहीं रूका है बल्कि सरकार की ओर से फंड नहीं आने की वजह से अभी तक यह केस पेंडिंग था, आप अगले 4-6 महीने का इंतजार और कीजिए आपको आपकी सब्सिडी मिल जाएगी। अधिकारियों की ओर से ये कहा गया था कि डिपार्टमेंट की ओर से पेंडिंग सब्सिडी के मामले सेटल्ड किए जा रहे हैं।
4 हजार से अधिक लाभार्थियों को सब्सिडी का इंतजार
दिल्ली EV इंसेंटिव पोर्टल की ओर से मार्च 2026 में जारी किए गए डेटा के मुताबिक, पुरानी ईवी पॉलिसी के तहत कुल 22,733 सब्सिडी क्लेम पेंडिंग थे। डी-डुप्लीकेशन और आधार वैलिडेशन के बाद कुल 16,892 अलग-अलग केस पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के पास भेजे गए। इनमें से 12,877 लाभार्थियों को मार्च 2026 तक पैसा भेज दिया गया है। इनकी राशि करीब 24 करोड़ रुपए के करीब थी। वहीं 4015 लाभार्थियों को 7.3 करोड़ की राशि भेजा जाना बाकी है। यह लोग आधार वेरिफिकेशन से गुजर रहे हैं। बता दें कि सरकार ने पेंडिंग सब्सिडी का निपटारा भी तब शुरू किया था जब पिछले साल सितंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को पेंडिंग EV सब्सिडी तुरंत देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रोसेस में देरी की वजह से पेमेंट रोकना सही नहीं है और दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पॉलिसी 2020 में पेमेंट की कोई टाइमलाइन नहीं बताई गई है।
नई पॉलिसी में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए
सरकार ने नई ईवी पॉलिसी में चाहे कितनी भी आकर्षक घोषणाएं क्यों न कर दी हों, लेकिन सबसे पहले उन लोगों का विश्वास लौटाना जरूरी है जिन्होंने पुरानी पॉलिसी पर भरोसा किया था। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन लाभार्थियों की सब्सिडी लंबित है उनका भुगतान कब तक होगा। यदि किसी प्रशासनिक या तकनीकी कारण से देरी हुई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और एक निश्चित समय सीमा भी घोषित की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि नई पॉलिसी में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। यदि किसी खरीदार को सब्सिडी मिलनी है तो वह अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सके। भुगतान में देरी होने पर उसका कारण और संभावित समय भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और सरकार की नीतियों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
आखिर में सरकार से मेरी अपेक्षा केवल इतनी है कि वह नई शुरुआत करने से पहले पुरानी जिम्मेदारियों को पूरा करे। यदि सरकार वास्तव में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहती है तो उसे सबसे पहले उन नागरिकों का विश्वास लौटाना होगा जिन्होंने उसकी नीति पर भरोसा किया था। नई ईवी पॉलिसी का स्वागत तभी सार्थक होगा जब पुरानी ईवी पॉलिसी के लाभार्थियों के साथ किया गया वादा भी पूरी ईमानदारी से निभाया जाएगा।
