फिल्म ‘सतलुज’ ओटीटी से हटी तो पंजाब के गांव-गांव दिखने लगी। ओटीटी से हटाया, तो विपक्षी दलों ने गले लगाया। सभी विपक्षी दल दिखा रहे हैं। सत्तापक्ष का मानना रहा कि देश की सुरक्षा का सवाल है। इससे अलगाववाद बढ़ सकता है। फिल्मकार कहते रहे कि ‘सतलुज’ रुकने वाली नहीं, लेकिन असली अखाड़ा 2027 का उत्तर प्रदेश का चुनाव है। विपक्षी नेता हर रोज एक नया चुनावी शिगूफा छोड़ते हैं कि चुनाव उनके पक्ष में लुढ़क पड़े। मंदिर का ‘चढ़ावा चोरी’ का मुद्दा तो विपक्ष को पहले से ही मिला है, इसलिए हर विपक्षी नेता इन दिनों ‘असली भक्त’ और ‘असली हिंदू’ दिखना चाहता है, ताकि चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना सके।

एक दिन एक विपक्षी प्रवक्ता जी कहिन कि हम तो पैदाइशी सनातनी हैं। हमारी ‘सनद’ में लिखा है कि हम हिंदू हैं। ये ‘मंदिरवादी’ नकली हिंदू हैं। चंदा चोर हैं। राम जी इनको माफ नहीं करेंगे, न जनता माफ करेगी। एक बहस के ठीक बीच में एक विपक्षी नेता का ‘एआइ’ कृत ‘मीम’ आने लगता है। विपक्ष का एक नेता ‘सुंदर कांड’ का पाठ कर आया है और सत्ता दल को ‘राजनीतिक हिंदू’ बताने लगा है, तो सत्तादल से जवाब आता है कि विपक्षी नेता स्वयं ‘राजनीतिक हिंदू’ हैं।

यह उत्तर प्रदेश का ‘चुनावक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे’ है, जहां कोई किसी को नहीं बख्शता और जहां हर मुद्दे का ‘सांप्रदायिकीकरण’ किया जाता है। एक सत्तापक्षी नेता एक फिल्मी अभिनेता द्वारा तीसरी शादी करने पर कहता है कि इससे क्या प्रेरणा मिलती है? तीन शादी मतलब ‘लव जिहाद’। एक विपक्षी नेता जवाब देता है कि उसने तीन की, तुम चार कर लो। फिर एक बाबा-वचन कि यह हिंदू राष्ट्र है। जब सबके पूर्वज एक, फिर क्यों मतभेद? फिर एक विपक्षी नेता का आरोप- तीस करोड़ में विधायक बिक रहे हैं।

सत्ता दल का तुरंत जवाब कि प्रमाण दो, नहीं तो मुकदमे का सामना करो। फिर एक एंकर का लाख रुपए का सवाल कि बोल राधा बोल उत्तर प्रदेश में विपक्ष का गठबंधन होगा कि नहीं। इस पर एक विपक्षी नेता की ‘राम धुन’, फिर एक और विपक्षी नेता का कटाक्ष… फिर एक विपक्षी नेता का ‘पुष्पा’ की तरह ‘डायलाग’ मारना कि ‘मैं झुकेगा नहीं’।

अगले रोज 2020 के दिल्ली दंगों में मारे गए आइबी अफसर अंकित की नृशंस हत्या के लिए एक विपक्षी पार्टी के पूर्व नेता को अदालत ने दोषी ठहराया और उसके साथ दस और नपे। जवाब में विपक्ष के एक नेता का बयान कि अगर उसकी जगह ‘वो’ होता, तो छूट गया होता। फिर आने वाले दिनों में मथुरा में ‘कृष्ण जन्मभूमि’ की मुक्ति के लिए तेरह अखाड़ों के संतों द्वारा ‘कार सेवा’ करने का सरकार को नोटिस। एक चर्चक- उत्तर प्रदेश चुनाव जो न कराए, वो थोड़ा। फिर बंगाल की सरकार के हवाले से खबर कि कोलकाता हवाईअड्डे पर 136 साल पुरानी मस्जिद को ‘सुरक्षा कारणों’ से हटाया जाएगा। एक चर्चक कहिन कि न इसे कांग्रेस सरकार ने हटाया, न वामपंथी सरकार ने हटाया, न तृणमूल कांग्रेस सरकार ने हटाया। अब सुरक्षा कारणों से इसे हटाया जाएगा।

एक दिन विपक्ष के नेता के लंबे अरसे तक भारत से गायब रहने पर एक सत्ता प्रवक्ता की छद्म हमदर्दी दिखी। वे बोले कि इतने दिन से विपक्ष के नेता गायब हैं, जबकि उनकी पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। पंजाब में पार्टी दो फाड़ हो रही है। इसी बीच स्टैंड-अप कामेडी के नाम पर बदतमीजी भी पेश कर देने पर अदालत ने एक हास्य कलाकार को जमकर लताड़ लगाई और जुर्माना भी लगाया। एक एंकर ने उसे ‘डर्टी कामेडियन’ कहा। इस बार उसने ‘विकलांगता’ की खिल्ली उड़ाई थी। एक ने उसे बिगड़ैल बालक कह कर उसका बचाव करने की कोशिश की कि उनको सुनने लोग पैसा देकर आते हैं, तो तुरंत जवाब आया कि इसका मतलब यह नहीं कि वह कमजोर की कीमत पर हंसे… उसकी हंसी उड़ाए..!

फिर एक खबर आई कि बंगाल से निष्कासित और कुछ इस्लामी तत्त्ववादियों के निशाने पर रही प्रख्यात बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन को बीस साल बाद बंगाल की नई सरकार ने राज्य में आने का निमंत्रण दिया है। फिर जब बिना ‘लीक’ हुए ‘नीट’ हो गया और उसका नतीजा भी आ गया, तब भी ‘काजपा’ (काकरोच जनता पार्टी) की मांग जारी रही कि शिक्षामंत्री को हटाओ..!

एक नेता अनशन पर बैठे थे, तो कुछ हमदर्द वहां जाकर हौसला बढ़ा जाते कि साथी तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। अनशन करने वाले की सरकार से मांग कि शिक्षामंत्री को हटाओ… अदालत कहती है कि उसकी जान कीमती है… सरकार कहती है कि उसके स्वास्थ्य का खयाल रखा जाएगा..! यानी कि सांप तो निकल गया, लकीर पीटते रहे!

फिर खबर कि सरकार ने येन-केन-प्रकारेण दो तिहाई सांसदों का इंतजाम कर लिया है और वह महिला आरक्षण, सीट परिसीमन, एफसीआरए कानून समेत छह कानून पास कराने की तैयारी में है। अब सारी निगाहें संसद के मानसून सत्र की ओर!