आप’ के सात देवता ‘बाहर’! कल तक ‘आप’ में थे, तो सब ठीक था, अब सब ‘पाप’ हो गया। अंत में सातों ‘देवता’ भाजपा में शामिल। इन देवताओं में ‘न दैन्यम् न पलायनम्’ और भाजपा की शरण में सिर्फ चैन ही चैन। उधर ‘आपरेशन लोटस’, ‘वाशिंग मशीन’ के आरोप जारी। यह भी कहा गया कि पंजाबियों के साथ धोखा किया गया।
फिर एक दिन ‘अंकल सैम’ अपने किसी ‘सेवेज’ की देखा-देखी कह दिए कि ‘भारतीय और चीनी अमेरिका को ‘नरक’ बनाते हैं..!’ अब अपने अंकल को कौन समझाए कि अपने यहां एक-दो नहीं, ‘अट्ठाईस नरक’ हैं। अंकल ही बताएं कि उनके ‘मागा’ को कौन-सा ‘नरक’ मांगता! ‘रौरव नरक’ मांगता कि ‘कुंभीपाक’ मांगता! एक एंकर ने कहा कि ‘नरक’ भारत नहीं, अमेरिका है… अमेरिका तो जोंम्बियों, नशेड़ियों-गजेड़ियों का देश है! और फिर एक दिन होटल हिल्टन में अंकल सैम द्वारा दी गई पत्रकारों की दावत में अचानक एक हमलावर का गोली चलाना और एक ‘हंसते-खेलते’ दृश्य को साक्षात ‘नरक’ में बदल देना दुनियाभर को चितिंत कर गया। अच्छा यह हुआ कि अंकल जी बचते दिखे।
उनके सुरक्षाकर्मी उनको सही सलामत निकाल कर ले गए। पकड़े गए हमलावर को अदालत में पेश किया गया। इस पर अफवाहें गरम रहीं कि यह सचमुच का ‘हमला’ था या नहीं। या फिर यह अंकल जी की गिरती साख को बचाने की ‘तिकड़म’ था… कि वह ‘अकेला भेड़िया’ था… या किसी ‘आतंकी’ ग्रुप से संबंधित था? वहां भी ‘घर के भेदी’ कम नहीं!
फिर अचानक एक दिन मुंबई से एक चैनल पर एक सनसनीखेज ‘खबर’ दिखी कि ‘धर्म पूछकर चाकू मारा’। इस पर भी ‘राग विपक्ष’ फिर शुरू कि सरकार कहां थी… क्या-क्या कहवाना ‘आतंकवाद’ है..! एक ज्ञानी कहिन कि इसमें ‘धार्मिक कोण’ है ही नहीं।
इसके आगे बंगाल के ‘मतदान’ के दूसरे दौर का अखाड़ा खुला। एक संवेदनशील चुनाव क्षेत्र में एक ‘सिंघम’ ने एक ‘बाहुबली’ को उसके इलाके में जाकर ललकार दिया कि जो धमका रहे हैं, उनकी अच्छी तरह खबर ली जाएगी… उपद्रव हुआ, तो अंजाम बुरा होगा… अगर किसी ने बदमाशी की, तो उसका कायदे से इलाज किया जाएगा..! जवाब में आई ‘सिंघम’ को ‘धमकी’ कि एक विशेष वर्ग को धमकी दी जा रही है..! फिर एक और ‘धमकी’ कि अगर आप समझते हैं कि ‘गैरकानूनी छापा’ मारेंगे… अगर आप समझते हैं कि अपने राज्य लौट जाएंगे, तो समझ लें कि हम आपको ढूंढ़ निकालेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। अगली धमकी यह कि अगर वो ‘सिंघम’, तो मैं भी ‘पुष्पा’!
धमकी नंबर चार कि चार तारीख के बाद पता चल जाएगा… तुम यहीं रहोगे… हम तब तुम्हें चाय-मिठाई देंगे..!
29 अप्रैल की शाम तक बड़ी खबर- दूसरे चरण का मतदान, पहले चरण की तरह ही ‘शांतिपूर्ण’ तरीके से संपन्न! बंपर तिरानबे फीसद से कुछ अधिक वोट पड़े। कई एंकर और चर्चकों ने चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या में तैनाती को ‘श्रेय’ दिया। विपक्ष के बंदे इस ‘तारीफ’ पर भी बरस पड़े कि यह चुनाव भय के माहौल में कराया जा रहा है… सुरक्षा बल मतदाताओं को डरा रहे हैं..!
इसके आगे तो बस ‘एक्जिट पोल’ की शृृंखला थी और प्रवक्ताओं में घमासान था। ज्यादातर ‘एक्जिट पोल’ तमिलनाडु में टीवीके के ‘थलैवा विजय’ को द्रमुक का खेल बिगाड़ने वाला बताते रहे। कुछ द्रमुक को ‘सरकार बनाने वाली पार्टी’ भी बताते रहे। केरल में ‘यूडीएफ’ को और असम व पुद्दुचेरी में राजग को जीतता दिखाते रहे तथा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में ‘कांटे की टक्कर’ बताते रहे या तृणमूल कांग्रेस को जाता और ‘भाजपा’ को आता बताते रहे!
इसके बाद तो चर्चा एकदम कटखनी होती दिखी। एक्जिट पोल देख भाजपा के प्रवक्ता ‘अपबीट’ तो तृणमूल के प्रवक्ता ‘नरभसायमान’! संवाददाता और चर्चक, सभी सहमत कि सुरक्षा बलों ने जनता का डर हटा दिया है, इसलिए जनता ने रिकार्ड-तोड़ मतदान किया है। कुछ चुनाव विशेषज्ञ कहते दिखते हैं कि ‘कांटे की टक्कर’ है… कुछ कहते दिखते हैं कि सरकार तृणमूल की ही बनेगी, भले ही तृणमूल को बहुमत कुछ कम हो जाए।
एक चर्चा में एक विश्लेषक कहिन कि हमेशा ‘दबंग’ दिखने वाला चेहरा पहली बार इतना ‘नर्वस’ दिख रहा है, इसीलिए कभी ‘स्ट्रांग’ निशाना है, तो कभी सुरक्षा बल और चुनाव आयोग निशाना है और कभी केंद्रीय एजंसियों पर हमला है। परिणाम चार मई को आने हैं, तब तक सभी अपने-अपने पक्ष में हवा बनाने में लगे रहेंगे, ताकि अपनी ‘जीत-हार’ को सही ठहरा सकें। एक चर्चक ने कहा कि दीदी के तेवर बदले हैं… उनका आत्मविश्वास डोला है..! परिणाम जो भी हों, दीदी हारें या जीतें, लेकिन इतना तो मानना पड़ेगा कि ‘खूब लड़ी मैदान में..!’
