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चीन में फैले कोरोना वायरस से क्यों परेशान हैं केरल के क्रैब एक्सपोर्टर?

चीन में केरल के रेड फीमेल क्रैब (क्रैब की एक प्रजाति) की काफी मांग है। लेकिन शिपमेंट पर बैन के बाद बड़े डीलर्स अब छोटे दुकानदारों से इसे नहीं खरीद रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

चीन में कोरोना वायरस का कहर जारी है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के अलावा यह वायरस दुनिया के और कई देशों में पहुंच चुका है। भारत में भी कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि हुई है। उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इस वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के तौर पर घोषित कर दिया है।

लोगों को तमाम तरह का एहतियात बरतने को कहा जा रहा है। इसमें मांस को अच्छी तरह से पकाकर खाने का निर्देश भी शामिल है। हालांकि वैज्ञानिक अभी तक इस बात पर एकमत नहीं हो पाए हैं कि कोरोना वायरस कहां से आया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया है कि ये वायरस समुद्री जीवों से इंसानों के बीच आया।

इस बीच खबर है कि कोरोना वायरस की वजह से भारत, खासकर केरल के क्रैब (केकड़ा) एक्सपोर्ट पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। ‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की दहशत के बीच केरल से निर्यात किये जाने वाले क्रैब के शिपमेंट पर बैन लगा गया दिया गया है।

चीन में केरल के रेड फीमेल क्रैब (क्रैब की एक प्रजाति) की काफी मांग है। लेकिन शिपमेंट पर बैन के बाद बड़े डीलर्स अब छोटे दुकानदारों से इसे नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ‘ऑन मनोरमा’ की रिपोर्ट के मुताबिक शिपमेंट पर बैन लगने की वजह से बड़े डीलर्स क्रैब नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में छोटे दुकानदार, जो समुद्री इलाकों से क्रैब इकट्ठा करते हैं, उनके पास क्रैब का ढेर लग गया है।

‘डेक्कन क्रॉनिकल’ की रिपोर्ट के मुताबिक चीन को निर्यात पर बैन लगने के बाद जो क्रैब सामान्य तौर पर 1200-1500 रुपये किलो बिक रहे थे, अब घरेलू मार्केट में वही 250-300 रुपये किलो बिक रहा है। इनके खरीददार भी मुश्किल से ही मिल रहे हैं।

ऐसे में छोटे दुकानदारों के सामने संकट की स्थिति पैदा हो गई है। आपको बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के ज्यादातर संदिग्ध मामले दक्षिण भारत में ही सामने आए हैं। डॉक्टर संदिग्ध मरीजों की हालत पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।

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