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वाराणसीः प्राइवेट कॉलेज के क्लासरूम में मिला नरकंकाल, बनाया गया था क्वारंटीन सेंटर

पुलिस नर कंकाल की पहचान के लिए यहां पर क्‍वारंटाइन किए गए लोगों की लिस्‍ट की जांच कर रही है। लिस्ट में दर्ज अगर कोई व्यक्ति लापता निकला तो पुलिस उसके एंगल पर मामले की जांच करेगी। सूत्रों का कहना है कि अगर लिस्ट में कोई गुमशुदा नहीं निकला तो हत्या के एंगल पर छानबीन की जाएगी।

क्राईम सीन का प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्सःएजेंसी)

कैंट इलाके में स्थित एक प्राइवेट कॉलेज के क्लासरूम में नर कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया। कैंट पुलिस ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की, लेकिन मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी। कोरोना संकट में लॉक डाउन के दौरान इस कॉलेज को क्‍वारंटाइन सेंटर बनाया गया था। DIG अमित पाठक का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कंकाल के लिंग और मौत के समय का पता लग पाएगा। उसके बाद ही पुख्ता तौर पर कुछ कहा जा सकता है।

कैंट इलाके के जेपी मेहता इंटर कॉलेज के परिसर की बुधवार को सफाई की जा रही थी। इसी दौरान कॉलेज के पिछले हिस्से में स्थित भवन के क्लासरूम में डेस्क के नीचे नरकंकाल देखा गया। सफाई कर्मचारियों ने तत्‍काल प्रधानाचार्य एनके सिंह को बताया। उन्होंने कैंट पुलिस को मौके पर बुलाया गया। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे मरने वाले की पहचान की जा सके। पुलिस ने फॉरेसिक जांच के बाद कंकाल को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। उधर, लोगों का कहना है कि कॉलेज के परिसर की तरफ से सड़ांध कुछ समय से आ रही थी।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि कोरोना संक्रमण के समय यहां पर क्‍वारंटाइन सेंटर बनाया गया था। पुलिस का कहना है कि मौत की वजह स्‍पष्‍ट नहीं हुई तो फारेंसिक लैब में जांच कराई जाएगी। पुलिस नर कंकाल की पहचान के लिए यहां पर क्‍वारंटाइन किए गए लोगों की लिस्‍ट की जांच कर रही है। लिस्ट में दर्ज अगर कोई व्यक्ति लापता निकला तो पुलिस उसके एंगल पर मामले की जांच करेगी। सूत्रों का कहना है कि अगर लिस्ट में कोई गुमशुदा नहीं निकला तो हत्या के एंगल पर छानबीन की जाएगी।

तब इस बात की आशंका ज्यादा होगी कि हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए कॉलेज परिसर में डाला गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात पता चल जाएगी कि अज्ञात की मौत लॉक डाउन के दौरान हुई थी, या उससे पहले। अगर मौत लॉक डाउन खुलने से पहले या उसके बाद हुई होगी तो इस बात की संभावना ज्यादा रहेगी कि शव ठिकाने लगाने के लिए कॉलेज परिसर का इस्तेमाल किया गया। कोरोना संकट के समय शिक्षण संस्थान वैसे भी खुले नहीं थे तो इस तरफ लोगों का ध्यान नहीं गया और शव एक कंकाल में तब्दील हो गया।

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