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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्टः भारत में चीन से ज्यादा पर पाकिस्तान से कम करप्शन, पिछले दो सालों में यहां बढ़ी रिश्वतखोरी

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चीन की अपेक्षा ज्यादा भ्रष्टाचार है, लेकिन पाकिस्तान के मुकाबले वह इस मामले में बेहतर स्थिति में है। रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो सालों में भारत में रिश्वतखोरी बढ़ी है।

भ्रष्टाचार (फोटो सोर्सःएजेंसी)

भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने करप्शन को लेकर नई रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक, भारत में चीन की अपेक्षा ज्यादा भ्रष्टाचार है, लेकिन पाकिस्तान के मुकाबले वह इस मामले में बेहतर स्थिति में है। रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो सालों में भारत में रिश्वतखोरी बढ़ी है।

यह संगठन दुनिया के 180 देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आधार पर उन्हें रैंकिंग देता है। 100 अंकों के आधार पर मूल्यांकन कर देशों को रैंकिंग दी जाती है। इस वर्ष जारी रैंकिंग में भारत 86वें, जबकि अमेरिका 67वें पायदान पर है। चीन की रैंक 78 है।
पाकिस्तान 124वें और नेपाल 117वें स्थान पर है।

भारत की स्थिति पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के मुकाबले बहुत ठीक है, लेकिन पिछले दो साल में इसकी रैंकिंग गिरी है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 की रिपोर्ट में भारत 81वें स्थान पर था। 2019 की रिपोर्ट में 78वें पायदान पर था। 2020 की रिपोर्ट में 80वें पायदान पर पहुंचा और अब 2021 की रिपोर्ट में 86वें पायदान पर है।

संस्था ने सुझाव दिया है कि भारत में भ्रष्टाचार से मुकाबला करने के लिए निगरानी संस्थानों को मजबूत करना जरूरी है। सरकार की ओर से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। कोरोना काल में जनता के बीच सरकार के प्रति असंतुष्टि देखने को मिली। ऐसी स्थितियों पर रोक लगाया जाना जरूरी है। सरकारी योजनाओं, संसाधनों के खर्च और वितरण संबंधी तमाम सूचनाओं के प्रकाशन से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है।

अमेरिका की रैंकिंग भी इस साल गिरी है। यानि डोनाल्ड ट्रंप के शासन में देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है। सूचकांक में 100 में से 88 अंक हासिल कर न्यूजीलैंड पहले पायदान पर है। 88 अंकों के साथ डेनमार्क भी शीर्ष पायदान पर न्यूजीलैंड के साथ है। टॉप 10 देशों की बात करें तो सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और स्वीडन ने 85 अंक हासिल किए हैं। वहीं, नॉर्वे को 84, नीदरलैंड्स को 82, जर्मनी और लक्जेमबर्ग 80 अंक प्राप्त हुए हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की चेयरपर्सन डेलिया फरेरिया रूबियो का कहना है कि कोरोना महामारी केवल एक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट नहीं है। यह एक भ्रष्टाचार संकट भी है, जिसे हम संभालने में फेल हो रहे हैं।

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