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COVID-19 पैनल से टॉप वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील का इस्तीफा, कोरोना को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की नीति पर दागे थे सवाल

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकारी अधिकारियों ने समय से पहले जनवरी में यह मानकर गलती की थी कि महामारी खत्म हो गई है।

वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने इस्तीफा दे दिया है (फोटो- commons.wikimedia.org)

देश के सीनियर वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार ग्रुप के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह ग्रुप कोरोना वायरस के जीनोम स्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए बनाया गया था। शाहिद जमील ने हाल ही में एक लेख में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना भी की थी।

गौरतलब है कि शाहिद जमील अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंस के डायरेक्टर हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत की सरकार पॉलिसी के निर्माण में जिद्दी रवैया अपना रही है। उन्होंने सलाह दी थी कि सरकार जिद्दी रवैया छोड़ दे। जमील एक सम्मानित वैज्ञानिक माने जाते हैं। कोरोना महामारी पर वो लगातार अपने विचार रखते रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकारी अधिकारियों ने समय से पहले जनवरी में यह मानकर गलती की थी कि महामारी खत्म हो गई है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा था कि आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना अभी सही नहीं है। क्योंकि भारत में महामारी नियंत्रण से बाहर हो गई है। हम जिस मानवीय कीमत को झेल रहे हैं, वह एक स्थायी निशान छोड़ जाएगी।

बताते चलें कि जमील ने ऑक्सीजन की आपूर्ति के प्रबंधन के लिए एक टास्क फोर्स नियुक्त करने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की भी आलोचना की थी। इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारे पास डॉक्टरों की कमी है और हमने अपने कुछ बेहतरीन डॉक्टरों को ले लिया है और उनसे कहा है कि आप ऑक्सीजन-ऑक्सीजन खेलते रहे।

उन्होंने ने कहा था कि सरकार कह रही है कि डॉक्टर तय करें कि ऑक्सीजन किसे मिलेगी। वास्तव में हमारे लिए यह एक दुखद दिन है। ये अच्छे डॉक्टर दवा के बारे में जानते हैं, लेकिन वे ऑक्सीजन आपूर्ति श्रृंखला और रसद के बारे में क्या जानते हैं?

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