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सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा तीन तलाक, हलाला का मामला, 11 मई से शुरू होगी सुनवाई

प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि गर्मिर्यों की छुट्टियों में एक संविधान पीठ मामले में सुनवाई करेगी।

Author Updated: March 30, 2017 7:48 PM
सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने आज मुस्लिमों में तीन तलाक, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह की परंपराओं की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करने के लिए 11 मई की तारीख तय की। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि गर्मिर्यों की छुट्टियों में एक संविधान पीठ मामले में सुनवाई करेगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने 27 मार्च को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि मुस्लिमों के बीच प्रचलित इन परंपराओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं विचारणीय नहीं हैं क्योंकि ये मुद्दे न्यायपालिका के दायरे के बाहर के हैं।

बोर्ड ने यह भी कहा था कि पवित्र कुरान और इस पर आधारित स्रोतों पर मूल रूप से स्थापित मुस्लिम विधि की वैधता संविधान के कुछ खास प्रावधानों पर जांचे नहीं जा सकते। इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह मुस्लिमों में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की परंपराओं के ‘‘कानूनी’’ पहलुओं से जुड़े मुद्दों पर फैसला सुनाएगी और इस सवाल पर विचार नहीं करेगी कि मुस्लिम विधि के तहत तलाक की अदालतों द्वारा निगरानी की जरूरत है या नहीं क्योंकि यह विधायी क्षेत्राधिकार में आता है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दो तर्क दिए। पहला, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट कहा कि अगर तीन तलाक को अवैध करार दिया जाता है, तो इससे अल्लाह के आदेशों की अवमानना होगी। इतना ही नहीं इस फैसले से कुरान को बदलने की नौबत भी आ सकती है। बोर्ड ने कहा कि इससे मुसलमान पाप के भागी भी हो सकते हैं। दूसरे तर्क में मुस्लिम पर्सनल लॉ प्रोविजन्स जैसे ट्रिपल तलाक को संविधान की धारा 25 के तहत संरक्षण हासिल है। इस धारा के तहत नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने और प्रसारित करने का मूलभूत अधिकार प्राप्त है।

बता दें पाकिस्तान समेत कई देशों में तीन तलाक पर रोक ली हुई है। सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखते हुए मुस्लिम लॉ बोर्ड ने कहा कि तीन तलाक का मामला उनका निजी मामला है। जिसके कारण उसे मौलिक अधिकार के तहत लाकर लागू नहीं किया जा सकता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होनी है।

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