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सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्गों की हज यात्रा सुनिश्‍चित कराने को दिए खास निर्देश

शीर्ष अदालत ने यह निर्देश केरल हज समिति की उस याचिका पर दिया है जिसमें राज्य के हज यात्रियों के लिए ज्यादा कोटे की मांग की गई है।

Author नई दिल्ली | March 13, 2018 19:52 pm
सर्वोच्च न्यायालय ने 70 या इससे ज्यादा के उम्र के हज यात्रियों के लिए ‘विशेष कोटा’ निर्धारित करने का निर्देश दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को 70 या इससे ज्यादा के उम्र के हज यात्रियों के लिए ‘विशेष कोटा’ निर्धारित करने और पांच या इससे अधिक बार हज यात्रा के लिए आवेदन कर चुके 65 से 69 वर्ष के लोगों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि जो व्यक्ति 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं, उन्हें एक अलग विशेष कोटा दिया जाए और 65 से 69 वर्ष की उम्र के वे लोग जिन्होंने पांच या इससे अधिक बार हज के लिए आवेदन किया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए।

शीर्ष अदालत ने यह निर्देश केरल हज समिति की उस याचिका पर दिया है जिसमें राज्य के हज यात्रियों के लिए ज्यादा कोटे की मांग की गई है। हज समिति ने कहा कि हज यात्रा के लिए ज्यादा आवेदक हैं और इनमें से सबको अनुमति नहीं दी जा सकती। समिति ने इस मामले में बिहार का उदाहरण दिया और कहा कि वहां हज यात्रियों के लिए ज्यादा कोटा है, लेकिन राज्य इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है क्योंकि वहां इतने आवेदक नहीं हैं। अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई 10 जुलाई के लिए मुकर्रर की है।

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार से उन 60 वर्ष से अधिक की उम्र के हज तीर्थयात्रा प्रार्थियों का विवरण जमा कराने को कहा था, जिन्होंने हज यात्रा के लिए पांच बार आवेदन किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने पूर्व निर्धारित अगली सुनवाई में इन आवेदनकर्ताओं का विवरण सारणीबद्ध प्रपत्र में मांगा था। यह आदेश केरल राज्य हज समिति द्वारा दाखिल याचिका पर आया था। याचिका में समिति ने हज कोटा के आवंटन में तर्कसंगत होने की मांग की थी।

समिति ने कहा था कि केरल के पास अधिक संख्या में आवेदक हैं लेकिन उसे हज सीटों का कम आवंटन मिला है जबकि बिहार में आवेदकों की संख्या कम है लेकिन उसके पास कोटे की ज्यादा सीटें हैं। केंद्र सरकार के लिए पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि याचिकाकर्ता संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन को बताने में सक्षम नहीं हैं जो कानून के समक्ष सबको समानता की गारंटी देता है।

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