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कारों की दीवानी दिल्ली

एबीपी न्यूज ने दिल्ली विधानसभा का लाइव प्रसारण दिखाया। मुख्यमंत्री केजरीवाल सवालों का मजे-मजे से जवाब दे रहे थे। बीच-बीच में चुटकियां भी लेते जाते थे: एमएलए को मिलता क्या है?
Author December 12, 2015 23:19 pm

एबीपी न्यूज ने दिल्ली विधानसभा का लाइव प्रसारण दिखाया। मुख्यमंत्री केजरीवाल सवालों का मजे-मजे से जवाब दे रहे थे। बीच-बीच में चुटकियां भी लेते जाते थे: एमएलए को मिलता क्या है? अच्छा काम करने के लिए उनकी तनख्वाह और भत्ते बढ़ने चाहिए, इतने तो हों कि ठीक से रह सकें और प्रधानमंत्री का भी बढ़ना चाहिए, सात-आठ लाख तक तो होना चाहिए!
चैनलों के पेट में समाजवादी दर्द शुरू हो गया! किसी का कुछ बढ़े तो दर्द, घटे तो दर्द। इस दर्द की दवा भी केजरीवाल ही हैं कि बाद में कहा: ‘मीडिया में हल्ला मचा पड़ा है कि तनख्वाह बढ़ा दी!’
इसके ठीक बाद केजरीवाल के खांसते रहने के असल कारण का पता चला। अपनी उसी सहज बातचीत की शैली में खांसते-खांसते बताया कि वे दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए ‘सम विषम कार योजना’ चलाने वाले हैं।
हमें लगा कि न केजरीवाल को सीरियल खांसी होती, न यह कार योजना बनती। मुख्यमंत्री की अपनी खांसी इसके लिए कितनी जिम्मेदार है, यह सवाल किसी ने मजाक तक में न पूछा!
अपने एंकर और चर्चक इतने मनहूस क्यों हैं प्रभो कि खांसी को दिल्ली प्रदूषण से जोड़ कर नहीं देख पाते?
प्रदूषण जितना सीरियस था, उससे ज्यादा सीरियस एंकर और चर्चक दिखे। कांग्रेस खिसियानी बिल्ली की तरह दिखी। कहने लगी कि माना कि दिल्ली में खतरे हैं, लेकिन जनता की राय क्यों नहीं ली? इसी तरह की किंतु-परंतु भाजपा के प्रवक्ता में दिखी।
सबसे ज्यादा भाव एनजीओ वालों का था। सर्वत्र सुनीता नारायणजी थीं या एक दो सेव लाइफ वाले थे। ऐसे लोगों को देख कर तसल्ली होती है कि अपना इंडिया अमेरिका से कम नहीं। यहां भी अवसर के अनुसार विशेषज्ञ मिलते हैं।
इंडिया टुडे में राजदीप ने सरकार की दुखती रग पर अंगुली रख कर पूछा कि क्या यह कदम व्यावहारिक है?
आप के आशुतोष बोले: दिल्ली एक गैस चेंबर है। यह एक कठिन चुनौती है। हाई कोर्ट ने कहा है। पंद्रह दिन तक प्रयोग चलेगा, फिर रिव्यू करेंगे।
राजदीप ने फिर पूछा कि क्या यह सुविचारित कदम है।
सुनीताजी बोलीं कि मैं इसका स्वागत करती हूं। प्रदूषण आधा हो जाएगा।
एनडीटीवी पर जितने रोष में वकील हरीश साल्वेजी दिखे, उतने में कोई और न दिखा। उनने दो टूक कहा कि यह शहर गैस चेंबर बन गया है। मेरी फेमिली में अस्थमा नहीं था, अब है। मुझे स्टराइड लेने पड़े हैं।
फिर ठहर कर बोले कि पंद्रह दिन के लिए दिल्ली को बंद कर दो। जब बेजिंग कर सकता है, तो दिल्ली क्यों नहीं कर सकती?
एक एनजीओ ज्ञानी दिल्ली वालों की खिल्ली उड़ाता रहा, मानो दिल्ली वाले इसी के लिए बने हैं। फिर प्रबोधन करने लगा कि दिल्ली वाले आदतन अराजकताप्रिय हंै। एक नियम बनाइए, तो दस तोड़ निकाल लेते हैं?
भाई केजरीजी सुना आपने! आपकी दिल्ली को एक आदमी क्या-क्या सुना गया और कोई कुछ न बोला!
चेन्नई की बाढ़ उतरी, तो राजदीप फील्ड में पहुंचे और रिपोर्ट देने लगे, लेकिन बाढ़ की खबर तो परदे से उतर चुकी थी!
पाकिस्तान की दो दिवसीय अचानक यात्रा ने विदेशमंत्री सुषमा स्वराजजी को खबर में ला दिया। हमने उनको पाकिस्तान जाते, वहां नमस्कार करते देखा, इधर चैनलों को वीरता का दौरा पड़ता दिखा। टाइम्स नाउ ने वीरता वाली लाइन मारी: अब पाकिस्तान लाइन पर आया! पाक की बात हो और देशभक्त गुस्सा न करें, यह संभव ही नहीं। लेकिन इस बार अर्णव ने, चिंता में दुबलाती कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने भाजपा की विदेश नीति को ‘अस्पष्ट’ बताया। सुरजेवाला ने कहा: इंडिया को विश्वास में लेना चाहिए था। यानी कांग्रेस माने इंडिया!
अगले रोज से हेरल्ड की कहानी लगा दी गई। नतीजा यह कि सोनियाजी हर चैनल पर गुस्से में भर कर बोलती नजर आने लगीं। चैनल उनके दो वाक्यों को बार-बार बजाने लगे: मैं इंदिरा गांधी की पुत्रवधू हूं और मैं किसी से नहीं डरती! उधर राहुल भीड़ के बीच गुस्से में फिनफिनाते बोलते रहे कि जो चाहे कर लें, मैं डरने वाला नहीं। यह ‘प्रतिशोध की नीति’ है ‘पॉलिसी आॅफ वेंडेट्टा’ है।
अगले दिन टाइम्स नाउ पर बीजेपी के प्रवक्ता ने सिद्ध कर दिया कि यह अदालत का मामला है, प्रतिशोध कहां है? कांग्रेस के प्रवक्ता इसे राजनीतिक प्रतिशोध कहते रहे। सोनिया गांधी, राहुल क्रोध से भरे दिखते रहे। सुब्रह्मण्यम स्वामी शांत दिखते रहे। उधर अभिषेक मनु सिंघवी ने कमान संभाली कि यह प्रतिशोध है और यह लगातार है।
कारों की दीवानी दिल्ली आधी कार की दिल्ली कैसी दिखेगी?

 

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