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अन्ना ने अनशन पर बदला फैसला तो शिवसेना का तंज, पता नहीं क्या है स्टैंड, यूटर्न लेना ठीक नहीं

अन्ना हजारे का अनशन पर फैसला बदलना शिवसेना को रास नहीं आया है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि अन्ना का इस तरह से यू टर्न लेना ठीक नहीं है। सामना में उन पर तंज कसते हुए लिखा गया, यह समझ नहीं आ रहा कि अन्ना का स्टैंड क्या है।

अन्ना हजारे (फोटो सोर्सःट्विटर/@ANI)

समाज सेवी अन्ना हजारे का अनशन पर फैसला बदलना शिवसेना को रास नहीं आया है। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि अन्ना का इस तरह से यू टर्न लेना ठीक नहीं है। सामना में उन पर तंज कसते हुए लिखा गया, यह समझ नहीं आ रहा कि अन्ना का स्टैंड क्या है। शिवसेना का कहना है कि अन्ना किसानों के समर्थन में अनशन करते तो इससे उनका मनोबल बढ़ जाता।

सामना के संपादकीय में कहा गया कि महाराष्ट्र के लोग जानना चाहते हैं कि क्या वाकई अन्ना किसानों से सहानुभूति रखते हैं। बुजुर्ग किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। अन्ना को उनके साथ खड़ा होना चाहिए था। लेकिन यह बात समझ से परे है कि क्यों अपने गांव रालेगन सिद्धि में बैठकर वह बीजेपी के नेताओं के साथ गठबंधन कर रहे हैं।

हजारे ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ फिलहाल अनशन नहीं करेंगे। उन्होंने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा था, किसानों को लेकर केंद्र संवेदनशील नहीं है, इसीलिए वह 30 जनवरी से अपने गांव में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर रहे हैं। हालांकि, शुक्रवार को अन्ना हजारे के कार्यालय ने जानकारी दी कि अन्ना हजारे ने किसानों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर कल अनशन नहीं करने का फैसला किया है।

उन्होंने शुक्रवार को इसकी घोषणा भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में की। सरकार इस कोशिश में थी कि अन्ना हजारे अपना अनशन त्याग दें। अन्ना हजारे के कार्यालय ने कहा, आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कृषि मंत्रालय, नीति आयोग और अन्ना हजारे द्वारा अनुशंसित कुछ सदस्यों वाली एक समिति अन्ना हजारे की किसानों से संबंधित मांगों को लागू करने के लिए अगले 6 महीनों में एक प्रस्ताव बनाएगी।

गौरतलब है कि हजारे ने पहले कहा था कि वह लंबे समय से कई मुद्दों पर आंदोलन कर चुके हैं। शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं है। वह तीन साल से किसानों के मुद्दे उठा रहे हैं। इससे पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका अनशन राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है। यूपीए 2 सरकार की चूले हिलाने के पीछे बड़ा कारण अन्ना के अनशन को माना जाता है। तब सारा देश उनके साथ खड़ा हो गया था।

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