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भोजन के संगी-साथी

साफ-सुथरा, स्वादिष्ट भोजन पकाना और सुंदर तरीके से परोसना तो एक कला है ही, यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किस भोजन के साथ उसके कौन-से संगी-साथी परोसे जाने चाहिए। संगी-साथी यानी चटनी, अचार, सब्जी, रायता वगैरह। ऐसे ही कुछ व्यंजन इस बार।

Dana-Pani
बेगुन भाजा (ऊपर) और परवल भुजिया (नीचे)।

बेगुन भाजा
यह पश्चिम बंगाल का लोकप्रिय व्यंजन है और बैगन से बनता है। बैगन एक ऐसी सब्जी है, जो आलू की तरह ही पूरी दुनिया में अलग-अलग तरीके से पका कर खाई जाती है। बेगुन भाजा बनाने के लिए गोल वाला बड़ा बैगन लीजिए। धो-पोंछ कर साफ कीजिए और पीछे के हिस्से से गोलाकार पतली फांकें यानी स्लाइस काटें। टुकड़े बहुत मोटे नहीं होने चाहिए। आधा से एक इंच तक की मोटाई ठीक रहती है। इन टुकड़ों को एक बड़े कटोरे, थाली या परात में रखें।

इनके ऊपर एक छोटा चम्मच कुटी लाल मिर्च, एक बड़ा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक छोटा चम्मच गरम मसाला, आधा छोटा चम्मच चाट मसाला, आधा चम्मच अमचूर और जरूरत भर का नमक डालें और हाथ या चम्मच से अच्छी तरह सारे मसालों को मिला लें ताकि बैगन के टुकड़ों पर अच्छी तरह चिपक जाएं। सारे टुकड़ों पर मसालों की बराबर परत लगनी चाहिए। फिर दो खाने के चम्मच बराबर या अपनी जरूरत के मुताबिक बेसन डालें और अच्छी तरह मिलाएं, ताकि वह भी बैगन के सारे टुकड़ों पर चिपक जाए। अब इसे ढंक कर पांच-सात मिनट के लिए रख दें।

एक तवा या नान स्टिक पैन गरम करें। उस पर सरसों का तेल चुपड़ें। जब तेल से धुआं उठने लगे तो आंच को मध्यम कर दें। बैगन के एक-एक टुकड़े को सेंकने के लिए पैन पर फैला दें। थोड़ी-थोड़ी देर में पलट कर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं। जब बैगन के दोनों तरफ की परत सिंक कर कुरकुरी हो जाए, तो पैन से बाहर निकाल लें। इसमें आंच का ध्यान जरूर रखें, नहीं तो बैगन के टुकड़े ऊपर से जल जाएंगे और अंदर से पकेंगे भी नहीं। बेगुन भाजा तैयार है। इनके ऊपर चुटकी भर चाट मसाला बुरकें और दाल-चावल, पूड़ी परांठा किसी के भी साथ गरमागरम परोसें।

तली मिर्च
अक्सर आपने सड़क किनारे के ठेलों पर या कई रेस्तरां में भी खाते हुए आपने तली हुई हरी मिर्चें खाई होंगी। यह भोजन के स्वाद में चटखारापन लाती है। किसी भी चीज के साथ इसे परोसा जा सकता है। यह अचार का विकल्प भी है। इसे बनाना बहुत आसान है। जिस भी आकार की मिर्च आपके पास हों, उन्हें ले सकते हैं। मिर्च को धो और पोंछ कर उनके बीच में चाकू से छेद कर दें और अलग रख दें।

अब इसके मसाले की तैयारी कर लें। यों तो भरवां मिर्च भी बनती हैं और उनमें मसाले पहले ही भर दिए जाते हैं। पर अभी हम तली मिर्च बना रहे हैं, तो इसमें डालने के लिए ज्यादा मसालों की जरूरत नहीं होती। इसके लिए एक चम्मच चाट मसाला या आधा चम्मच अमचूर पाउडर और चौथाई चम्मच नमक ले सकते हैं। आधा चम्मच धनिया पाउडर भी इसमें डालना जरूरी है।

एक कड़ाही में भरपूर तेल गरम करें। तेल गरम हो जाए, तो उसमें हरी मिर्च डाल दें और चलाते हुए रंग बदलने तक पकाएं और बाहर निकाल लें। इस प्रक्रिया में कुल आधे मिनट से अधिक समय नहीं लगता। बस मिर्च डाली और एक बार पलट कर बाहर निकाल ली। मिर्च को प्लेट में रखें और ऊपर से मसाले डाल कर अच्छी तरह मिला लें। तली मिर्च तैयार हैं। इन्हें किसी भी भोजन के साथ परोस सकते हैं। ठंडी होने के बाद भी इनका स्वाद मजेदार रहता। इस तरह दो-तीन दिन तक खाई जा सकती हैं।

परवल भुजिया
आलू, प्याज, बैगन की तरह परवल भी उत्तर भारत की लोकप्रिय सब्जी है। परवल की कई तरह से सब्जी बनती है। उनमें एक तरीका भुजिया की तरह पकाने का भी है। यह परवल का मौसम है। बाजार में ताजा परवल बहुतायत में उपलब्ध हैं। परवल की भुजिया की खासियत यह है कि इसे भी दाल-चावल, पूड़ी, परांठा के साथ परोसा जा सकता है। इसे बनाना बहुत असान है।

ढाई सौ ग्राम कच्चे, नरम परवल लें। अच्छी तरह धोकर पोंछ लें। परवल के दोनों सिरे काट लें। फिर लंबाई में बीच से काटें और फिर उसकी पतली-पतली फांकें काट लें। इस तरह एक परवल में कम से कम छह लंबी-पतली फांकें बनेंगी। अब कड़ाही में दो खाने के चम्मच बराबर सरसों का तेल गरम करें। उसमें मेथी दाना, जीरा, एक तेजपत्ता और आधा छोटा चम्मच हींग पाउडर का तड़का लगाएं और फिर कटे हुए परवल छौंक दें। आंच मध्यम कर दें। बीच-बीच में चलाते रहें। जब परवल अधा पक जाए, तो उसमें चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर और जरूरत भर का नमक डाल कर मिला लें।

जब परवल पककर सिकुड़ने लगे और उसका सफेद हिस्सा हल्का बादामी हो जाए, तो उसमें आधा छोटा चम्मच चुटी लाल मिर्च, आधा चम्मच अमचूर पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला डालें और अच्छी तरह मिलाने के बाद आंच बंद कर दें। परवल भुजिया तैयार है। परवल की भुजिया का स्वाद दूसरी सब्जियों की भुजिया की अपेक्षा निराला होता है, इसलिए इसे अधिक पसंद किया जाता है। खासकर दाल-सब्जी के साथ यह भुजिया अवश्य परोसी जाती है। सफर में परांठे या पूड़ी के साथ भी इसे पैक कर ले जाया जा सकता है।

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