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नोटबंदी का राजस्थान का पर्यटन ठप्प, कैंसिल हो रहीं होटलों की बुकिंग

राजस्थान में पर्यटन मौसम के शुरू होते ही पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है लेकिन नोटबंदी के कारण राजस्थान में आने वाले पर्यटकों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

Author जयपुर | Updated: November 22, 2016 2:43 PM

राजस्थान में पर्यटन मौसम के शुरू होते ही पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है लेकिन नोटबंदी के कारण राजस्थान में आने वाले पर्यटकों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। पर्यटकों, होटलों, रेस्तराओं और टैक्सी आपरेटरों सहित पर्यटन से जुडेÞ उद्योगों को प्रतिदिन के खर्च का भुगतान करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में होटलों में कुछ बुकिंग रद्द की गई हैं। व्यक्तिगत यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में लगभग चालीस प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। पर्यटन सीजन के शुरू होते ही पर्यटन उद्योग से जुडेÞ लोगों की अच्छा व्यवसाय करने की उम्मीद थी लेकिन नोटबंदी के चलते उनकी उम्मीदों पर असर पड़ा है।

हालांकि नोटबंदी का प्रभाव समूह अथवा कम्पनी के पैकेज पर राजस्थान में आने पर्यटकों पर नहीं पडा है लेकिन जो लोग व्यक्तिगत तौर पर घूमने आने वाले थे, उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी है। कम्फर्ट इन सफारी के संचालन प्रबंधक अमित कोठारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पर्यटकों की संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, गुड़गांव और सप्ताह के अंत में व्यक्तिगत तौर पर घूमने के लिये जयपुर आते हैं लेकिन इस समय उनकी संख्या काफी कम है।

उन्होंने कहा कि पर्यटकों के साथ-साथ राजस्थान की यात्रा करने वाले विभिन्न क्षेत्रों से जुडे व्यवसायियों ने भी अपनी यात्रा को आगे बढ़ा दिया है। एक अन्य टूर आॅपरेटर ने बताया कि मुद्रा संकट के चलते पर्यटन सीजन पर फर्क पडा है, हालांकि जो पर्यटक समूह और कम्पनी की ओर से बुकिंग कराते हैं, उनकी संख्या पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है, क्योंकि उनकी टैक्सी और होटलों की बुकिंग पूर्व में की गई है, लेकिन उनके पास बख्शीश देने और स्थानीय चीजों को खरीदने के लिये पैसे की कमी देखी जा सकती है।

वहीं दूसरी ओर पारंपरिक और गैर-पारंपरिक पोशाकों, सजावटी चीजों और कला व हस्तशिल्प के लिए महशूर दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास स्थित जनपथ बाजार की रौनक नोटबंदी के फैसले के बाद गुम सी हो गई है। बारह दिन गुजर जाने के बावजूद यहां के दुकानदार बोहनी की बाट जोहते सुबह से शाम बिता रहे हैं। बिक्री में 80 से 95 फीसद तक की गिरावट झेल रहे दुकानदारों का कहना है ऐसी मंदी आज तक नहीं देखी और इसे पटरी पर आने में अभी 2 से 3 और महीने लगेंगे। इसके बावजूद जनपथ बाजार के ज्यादातर दुकानदार नोटबंदी के साथ हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह फैसला अंतत: गरीबों के हक में जाएगा।  बीते 15 साल से जनपथ में फुटपाथ पर कढ़ाई के कपड़ों की दुकान लगाने वाली सुनीता ने बताया कि सुबह से कोई बोहनी नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद सुनीता का मानना है कि मुश्किल का सामना नहीं करेंगे तो आगे सुख कैसे मिलेगा।

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