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क्या Ola और Uber से कम हुई ऑटो सेक्टर में बिक्री? वित्त मंत्री की थ्योरी की हवा निकालते आंकड़े

मारुति सुजुकी इंडिया के सेल्स एंड मार्केटिंग प्रमुख शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि ओला और उबर ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का ठोस कारण नहीं है। उन्होंने मंदी के कारणों को लेकर अध्यन की सलाह भी दी है।

Author नई दिल्ली | Published on: September 12, 2019 1:55 PM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई मंदी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अजीब बयान देकर सबके चौंका दिया। उन्होंने इस सेक्टर में आई मंदी के लिए ओला और उबर कैब सर्विस को जिम्मेदार ठहराया। हाल में दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में लोगों कि सोच में आए बदलाव का असर पड़ रहा है। लोग वाहन खरीदने के बजाय ओला या उबर को तरजीह दे रहे हैं।

हालांकि तथ्य और आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त मंत्री की थ्योरी किसी भी तरह से मेल नहीं खाती। उदाहरण के लिए सभी कैब कंपनियों की बिक्री कंपनियों के कुल यात्री वाहन बिक्री का 8-10 फीसदी ही है। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति के पूरे टैक्सी सेगमेंट की बिक्री 5-6 फीसदी के बीच ही है और यह आंकड़ा पिछले एक साल में बदला नहीं है। जिसका अर्थ है कुल कार बिक्री में गिरावट के अनुपात में कैब एग्रीगेटर्स की बिक्री में गिरावट आई है। हुंडई में यह आंकड़ा तीन फीसदी पर है।

इस वित्त वर्ष में अभी तक यात्री वाहन में एक साल पहले की तुलना में लगभग एक चौथाई की गिरावट आई है। इस साल लगातार दस महीने और पिछले 14 में से 13 महीने में ये गिरावट दर्ज की गई। जानकारी है कि इस संकट से निपटने के लिए ऑटोमोबाइल सेक्टर करीब दस फीसदी जीएसटी में कटौती कर रहा है। हालांकि कई राज्यों ने इस कटौती का विरोध भी किया है।

यात्री वाहनों के आंकड़ों पर एक नजर
पहली नजर में लगता है कि सड़क पर कैब और रेडियो टैक्सी की संख्या बढ़ गई है। उदाहरण के लिए ओला की 8.5 लाख गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं और दूसरी 50 हजार गाड़ियां भी लीज मॉडल पर हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है यह सभी नई गाड़ियां हैं। कई ओला और उबर गाड़ियां प्री-ऑन्ड हैं और दोनों ही जगहों पर रजिस्टर्ड हैं।

कार फर्म क्या कहती हैं
मारुति सुजुकी इंडिया के सेल्स एंड मार्केटिंग प्रमुख शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि ओला और उबर ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का ठोस कारण नहीं है। उन्होंने मंदी के कारणों को लेकर अध्यन की सलाह भी दी है। उन्होंने कहा कि बीते छह सालों में ओला और उबर की मौजूदगी में भी अपने बेहतर प्रदर्शन किया है।

महिंद्र एंड महिंद्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ने भी कहा कि मंदी का प्रभाव अभी तक इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा है, मगर भविष्य में यह खासा बढ़ सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई मंदी की वजह से ओला-उबर भी खासी प्रभावित हुई हैं। 2016 में डेली राइडरशिप की ग्रोथ 80 फीसदी से ज्यादा घटकर 2019 में सिर्फ 4.5 फीसदी रह गई है। दोनों कंपनियों की डेली राइड जो 2018 में 35 लाख थी वो इस साल थोड़ी बढ़ोतरी के साथ अब 36.5 लाख है।

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