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वीवीपैट वाली ईवीएम से हो डूसू चुनाव : एनएसयूआइ

शनल स्टूडेंट्स यूनियन आॅफ इंडिया (एनएसयूआइ) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव की प्रक्रिया में सुधार की मांग की है।

नई दिल्ली | August 25, 2017 2:26 AM
(File Photo)

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आॅफ इंडिया (एनएसयूआइ) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव की प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। एनएसयूआइ के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों के ज्ञापन के साथ विश्वविद्यालय अधिकारियों से भी मुलाकात की। एनएसयूआइ के पदाधिकारियों के मुताबिक डूसू चुनावों की अखंडता पिछले कुछ सालों में कमजोर हुई है जिसके परिणामस्वरूप विद्यार्थियों का डूसू के प्रतिनिधियों पर विश्वास कम हुआ है। इसका एक संकेत पिछले कुछ सालों में कम हुए मतदान फीसद के रूप में भी देखा जा सकता है।

डूसू चुनाव में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव निष्पक्ष हो, एनएसयूआइ ने इस साल डूसू चुनाव प्रक्रिया में कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं। उन्होंने मांग की है कि इन चुनावों में ईवीएम में वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा 5 फीसद मशीनों की जांच पेपर पर आने वाले निशान के साथ होनी चाहिए। सभी ईवीएम पर एक ड्रिल मतदान एजंट के सामने आयोजित की जानी चाहिए कि मशीन ठीक से कार्य कर रही हैं या नहीं यह पता चल सके।

इसके अलावा उन सभी छात्रों को कॉलेज की ओर से पहचानपत्र जारी किया जाना चाहिए, जो मतदान के दिन से कम से कम एक सप्ताह पहले मतदान करने के लिए पात्र हैं। अगर किसी छात्र को पहचानपत्र जारी नहीं किया जाता है, तो सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पहचान पत्र (मतदाता पहचानपत्र/पैन/आधार) स्वीकार किया जाना चाहिए। स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय चुनाव आयोग ने सभी प्रत्यक्ष चुनावों के लिए मतदान एजंसियों की एक प्रणाली बनाई है। एनएसयूआइ ने डूसू चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए इसी तरह की प्रणाली की मांग की है। मतदान फीसद में वृद्धि के लिए मतदान का समय बढ़ाने की भी मांग की गई है। इससे एनसीआर और आसपास के शहरों में रहने वाले छात्र भी मतदान के लिए पहुंच सकते हैं। एनएसयूआइ ने सुबह के कॉलेजों के लिए सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम के कॉलेजों के लिए दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक मतदान का समय करने की मांग की है। चुनाव के दौरान परिसर में पुलिस की अत्यधिक उपस्थिति को जहां तक संभव हो टाला जाना चाहिए क्योंकि यह छात्र मतदाताओं को विशेष रूप से प्रथम वर्ष के छात्रों में भय पैदा करता हे।

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