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NEET का पहला चरण कल, न्यायालय ने कहा परीक्षा होने दें

न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति आर भानुमती वाली पीठ ने कहा, ‘‘फिलहाल कुछ भी नहीं होगा। मामले पर पीठ द्वारा सुनवायी की गई है और वर्तमान के लिए यह खत्म हो गया है। कृपया परीक्षा होने दें।’’

Author नई दिल्ली | April 30, 2016 5:51 PM
केंद्र ने उच्चतम न्यायालय का रूख करके 28 अप्रैल के उसके आदेश में बदलाव की मांग की थी। (file picture)

एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एकल प्रवेश परीक्षा एनईईटी का पहला चरण कल पूरे देश में आयोजित होगा क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने आज उस अर्जी पर तत्काल सुनवायी करने से इनकार कर दिया जिसमें उसके पहले के आदेश में सुधार की मांग की गई थी। दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए आज विशेष सुनवायी कर रही प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर के नेतृत्व वाली तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के संबंध में 28 अप्रैल को एक अन्य पीठ की ओर से पारित आदेश में बदलाव की मांग वाली अर्जी स्वीकार नहीं की।

न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति आर भानुमती वाली पीठ ने कहा, ‘‘फिलहाल कुछ भी नहीं होगा। मामले पर पीठ द्वारा सुनवायी की गई है और वर्तमान के लिए यह खत्म हो गया है। कृपया परीक्षा होने दें।’’ पीठ की ओर से यह टिप्पणी तब आयी जब कुछ छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने कहा कि एनईईटी पर आदेश में बदलाव की जरूरत है क्योंकि राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा के लिए तैयारी कर चुके छात्रों के लिए इतने कम समय में एनईईटी के लिए तैयारी करना मुश्किल होगा।
न्यायालय ने फिलहाल अर्जी पर सुनवायी करने से इनकार कर दिया और संबंधित वकीलों से कहा कि वे एक अर्जी दायर करें जिस पर मामले की सुनवायी कर रही नियमित पीठ सुनवायी करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने कल कहा था कि शैक्षणिक वर्ष 2016-17 के लिए एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा एक मई और 24 जुलाई को राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के जरिए निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होगी। केंद्र ने कल उच्चतम न्यायालय का रूख करके 28 अप्रैल के उसके आदेश में बदलाव की मांग की थी। केंद्र ने मांग की थी कि राज्य सरकारों और निजी कॉलेजों को 2016-17 के लिए एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के वास्ते अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की इजाजत दी जाए। केंद्र ने कहा था कि इससे काफी भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

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