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गोवंश की रक्षा में योगदान दें मुसलमान: दरगाह दीवान

सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादानशीन अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि गाय अतीत काल से हिंदुओं की आस्था का प्रतीक रही है।

Author जयपुर | July 29, 2016 2:32 AM
अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान

सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादानशीन अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि गाय अतीत काल से हिंदुओं की आस्था का प्रतीक रही है। इसलिए मुसलमानों को गोवंश की रक्षा में अपना सकारात्मक योगदान देकर मिसाल कायम करनी चाहिए।

दरगाह दीवान ने गुरुवार को जारी बयान में इस बात पर चिंता जाहिर की कि कुछ शरारती तत्त्व गोमांस के मुद्दे पर देश का माहौल बिगाड़ कर देश को ‘गृहयुद्ध’ की तरफ धकेल रहे हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए। इस तरह के मुद्दे देश में सदियों से आपसी मेलजोल से रह रहे दो संप्रदायों के बीच खाई के रूप में अपनी जड़ें जमा रहे हैं। अगर हिंदू मुसलमान से खौफ खाएगा और मुसलमान हिंदू से डरेगा तो देश सिर्फ और सिर्फ विनाश की ओर जाएगा।

खान ने कहा कि विभाजन के काल में गाय को सांप्रदायिकता से जोड़ कर देखा गया और गाय को लेकर सांप्रदायिक धु्रवीकरण कराने की कोशिश मुस्लिम लीग ने की थी, इसलिए दंगा कराने के लिए गोमांस को मंदिरों में फेंकना, गाय की हत्या करना, यह एक प्रवृत्ति थी। कुछ संगठन स्वतंत्र भारत में मुस्लिम लीग की विचारधारा और मिशन को आगे बढ़ाते हुए गोहत्या और गोमांस के मामले को सांप्रदायिक बनाते हुए हिंदू मुस्लिमों के बीच विवाद का रंग देने की कोशिश में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि गाय हिंदुओं की आस्था का प्रतीक रही है, लेकिन आज गोमांस का यह मुद्दा धर्म का नया हथियार बन चुका है जिससे विश्व में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। दरगाह दीवान ने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद साहब ने भी अपने उपदेशों में गोमांस के सेवन का सख्ती से मना किया है और गाय के दूध को इंसान के लिए बहु उपयोगी बताया। पैगम्बर के इन्हीं उपदेशों के अनुसरण में चिश्तियों, सूफियों और धर्मगुरुओं द्वारा गौ मांस का सेवन किए जाने का इतिहास में कोई प्रमाण नहीं मिलता है।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी में अपने पुत्रों से कहा कि हिंदुओं की भावनाओं की इज्जत करनी चाहिए। इसीलिए मुगल साम्राज्य में कहीं भी न तो गाय की कुरबानी दी जाए और न ही गायों को मारा जाए। यदि कोई मुगल राजा इसका उल्लंघन करेगा तो उसी दिन से हिंदुस्तान के लोग मुगलों का परित्याग कर देंगे। इसीलिए अकबर, जहांगीर जैसे अनेक मुगल राजाओं ने अपनी सल्तनत में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ था।

दरगाह दीवान ने गोमांस पर देश के मौजूदा माहौल पर कहा कि जिस तरह धर्मांतरण और गोमांस जैसे मुद्दों को उछाला गया और उसे तूल देकर समाज का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, वह देश के लिए खतरनाक है। देश का कानून किसी को यह इजाजत नहीं देता कि कोई किसी धर्म के अनुयायियों के खिलाफ कानून अपने हाथ में लेकर सीधे तौर पर कोई कार्रवाई करे। अगर कोई व्यक्ति कोई अनैतिक कार्य करता है तो देश के कानून में इसकी सजा के पर्याप्त प्रावधान हैं। दरगाह दीवान ने कहा कि भारत दुनिया के लिए गंगा जमनी तहजीब का प्रतीक रहा है और धर्मनिरपेक्षता के माहौल को बिगाड़ने के प्रयास पर विराम लगाए जाने की जरूरत है।

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