आधुनिक जीवन शैली महिलाओं को बना रही बीमार - Jansatta
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आधुनिक जीवन शैली महिलाओं को बना रही बीमार

महिलाओं में होने वाली बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) अब केवल प्रजनन संबंधी बीमारी नहीं रह गई है। इसका संबंध शरीर की अंत:स्रावी ग्रंथियों व पाचन तंत्र से भी है।

Author नई दिल्ली | July 16, 2016 4:56 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

महिलाओं में होने वाली बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) अब केवल प्रजनन संबंधी बीमारी नहीं रह गई है। इसका संबंध शरीर की अंत:स्रावी ग्रंथियों व पाचन तंत्र से भी है। यह बीमारी अब आम हो गई है। साथ ही इसके कारण व नतीजों को लेकर आए दिन नए तथ्य समाने आ रहे हैं, जिससे मरीज ही नहीं डॉक्टरों में भी भ्रम की स्थिति है। यह जानकारी एम्स अंत:स्रावी गं्रथि विज्ञान विभाग के डॉ मो. अशरफ गैनी और महिला व प्रसूति विभाग की डॉ नूतन अग्रवाल ने दी।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी को लेकर देश भर में कोई एक सत्यापित रिपोर्ट नहीं है, इसलिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) को इस पर राष्ट्रीय स्तर पर शोध का प्रस्ताव दिया गया गया है, ताकि देशव्यापी स्तर पर स्थिति साफ हो सके व इसको लेकर सही ढंग से जांच व इलाज का प्रोटोकाल अपनाया जा सके। उन्होंने बताया कि पीसीओएस महिलाओं में होने वाली हार्मोन संबंधी गड़बड़ी वाली बीमारी है।

पहले इसे केवल प्रजनन संबंधी विकार माना जाता था, लेकिन नए वैज्ञानिक तथ्यों से पता चला है कि यह मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से भी संबंधित जीवन शैली से जुड़ी बीमारी है। पहले इसमें इंसुलिन का स्तर बहुत अधिक बढ़ा होता है। फिर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है खून में इंसुलिन की मात्रा कम होने लगती है और मरीज को मधुमेह हो जाता है। डॉ अशरफ ने यह भी कहा कि मधुमेह ही नहीं बल्कि कई मामलों में कोलेस्ट्रॉल संबंधी दिक्कतें व हृदय रोग के अलावा मरीज को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तक हो जाती है।

डॉ नूतन अग्रवाल ने बताया कि महिलाओं की ओवरी (अंडाशय में) में सिस्ट या रसौली होना आम बात है। दुनिया भर में चार से दस फीसद महिलाएं इससे पीड़ित हैं, वहीं भारत में करीब 20 फीसद महिलाएं पीसीओएस का शिकार हैं। बढ़ती उम्र में शरीर में होने वाले हार्मोन संबंधी बदलाव में भी सिस्ट हो जाते हैं। केवल सिस्ट होने से दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर इसके साथ और दिक्कते हैं तो उसका समुचित इलाज व प्रबंधन जरूरी है। कम से कम तीन लक्षण या व्यापक जांच के बाद ही इलाज की रणनीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में माहवारी में अनियमितता, भारी रक्तस्राव,मोटापा, गर्दन व त्वचा पर काले निशान, शरीर पर बाल और बांझपन जैसे लक्षण आम हैं। भारत में हर चौथी-पांचवीं महिला इस बीमारी से पीड़ित है।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में हुए अध्ययन बताते हैं कि जिसे पीसीओएस है उसे या उसके मां-बाप को मधुमेह, उच्च रक्तचाप या ऐसी ही क ोई दूसरी दिक्कत जरूर रही होगी। सिस्ट के मरीजों की मधुमेह हार्मोन की जांच, फैटी लिवर का पता लगाने के लिए लिवर की जांच (अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआइ) करके ही आगे इलाज की रणनीति बनानी चाहिए। एम्स के रेडियोलाजी विभाग के डॉ देव ने बताया कि अभी तक इस बीमारी की जांच को लेकर कोई तय दिशानिर्देश नहीं है। कुछ हार्मोन जांच व अल्ट्रासाउंड के आधार पर ही इलाज होता है।

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