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लोकसभा में लोकपाल व लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन को मंजूरी

लोकसभा ने बुधवार को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 की धारा 44 में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें केंद्रीय लोक सेवकों, एनजीओ के लिए अपनी सम्पत्ति एंव देनदारी की घोषणा 31 जुलाई तक करने की समयसीमा से छूट दी गई है।

Author नई दिल्ली | Published on: July 28, 2016 2:08 AM
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लोकसभा ने बुधवार को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 की धारा 44 में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें केंद्रीय लोक सेवकों, एनजीओ के लिए अपनी सम्पत्ति एंव देनदारी की घोषणा 31 जुलाई तक करने की समयसीमा से छूट दी गई है। इससे 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलेगा। लोकसभा में बुधवार को कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इस संशोधन को पेश किया। इसे विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेजा गया है।

सिंह ने कहा कि चूंकि हम इस विधेयक को स्थायी समिति को भेज रहे हैं तो इस बारे में विस्तार से वहां चर्चा होगी। हम उम्मीद करते हैं कि अगले सत्र में रिपोर्ट आ जाएगी। इसमें धारा 44 में संशोधन पेश करने की जरूरत इसलिए थी क्योंकि सम्पत्ति और देनदारी की घोषणा 31 जुलाई तक करनी है। लेकिन अभी कई तरह के मुद्दे रह गए थे जिन पर निष्कर्ष आना है और स्थायी समिति उन बिंदुओं पर विचार करेगी। इसलिए तब तक लोकसेवकों, एनजीओ को सम्पत्ति एवं देनदारी की घोषणा करने से छूट दी जाए।

कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडगे, माकपा के मोहम्मद सलीम, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह स्पष्ट करे कि इसके प्रावधानों को किसी तरह से हल्का नहीं किया जाएगा। सलीम का कहना था कि अगर इसे इसी सत्र में लाना था तो इस पर चर्चा की जाती और इसे एजंडे में शामिल किया जाता। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडगे ने सरकार द्वारा विधेयक पेश करने की पहल का समर्थन किया लेकिन साथ ही कहा कि इसकी जरूरत थी लेकिन कानून को किसी तरह से हल्का नहीं बनाया जाना चाहिए। लोग यह न कहने लगें कि सांसदों ने मिल कर लोकपाल कानून को कमजोर कर दिया।

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने जानना चाहा कि सरकार एनजीओ को सम्पत्ति और देनदारी की घोषणा करने से छूट क्यों दे रही है क्योंकि काफी कम एनजीओ ही धर्मार्थ उद्देश्य से काम कर रहे हैं। जितेन्द्र सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर न तो सरकार का कोई इरादा है और न ही ऐसी कोई मंशा है कि लोकपाल कानून को किसी भी तरह से कमजोर किया जाए। बल्कि हम तो इसे और भी सख्त बनाना चाहते हैं।

हम भ्रष्टाचार के खिलाफ हर तरह की पहल और कदम के पक्ष में हैं। सदन ने ध्वनिमत से लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें सांसदों एवं अन्य पक्षकारों के ज्ञापन मिले और 25 जुलाई को शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की और इस प्रावधान को हटाने की मांग की। धारा 44 सम्पत्ति और देनदारियों की घोषणा सार्वजनिक करने से संबंधित है। मंत्री ने कहा कि इसमें एनजीओ की ओर से परिसम्पत्ति और देनदारियों की घोषणा का विषय जुड़ा है।

लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत अधिसूचित नियमों के मुताबिक प्रत्येक लोकसेवक अपनी सम्पत्ति की घोषणा के साथ अपनी पत्नी या पति और आश्रित बच्चों की संयुक्त सम्पत्ति और देनदारियों की भी घोषणा करेंगे। लोकसेवक इस संबंध में सक्षम प्राधिकार के पास प्रत्येक वर्ष 31 मार्च या 31 जुलाई से पहले वार्षिक रिटर्न दाखिल करेंगे।अप्रैल में सरकार ने लोक सेवकों के लिए रिटर्न दायर करने की समयसीमा को 15 अप्रैल से बढ़ा कर 31 जुलाई कर दिया था। यह जनवरी 2014 को कानून के प्रभाव में आने के बाद समयसीमा में पांचवा विस्तार है।

नियमों के मुताबिक, जिन संगठनों को एक करोड़ रुपए से अधिक सरकारी अनुदान या विदेशों से 10 लाख रुपए से अधिक दान प्राप्त होता है, वे लोकपाल के दायरे में आएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चूंकि यह कानून स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर बना था, इसलिए इसमें संशोधन भी स्थायी समिति के पास जाएगा। सरकार का रुख कानून में संशोधन के विचार के प्रति खुला है लेकिन इसके लिए संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों पर ध्यान देना होगा। मुझे उम्मीद है कि इस बारे में स्थायी समिति अगले सत्र तक रिपोर्ट पेश कर देगी। जितेन्द्र सिंह ने उन्हें समझाते हुए कहा कि सरकार उनकी चिंताओं को समझती है और हमारा प्रयास केवल विधेयक को प्रभावी ढंग से लागू करने का है। सरकार लोकपाल विधेयक के खिलाफ नहीं है, सरकार भ्रष्टाचार को समाप्त करने के पक्ष में है।

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