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Delhi Elections 2020: केजरीवाल के सामने शाहीन बाग के चक्रव्यूह से निकलने की चुनौती

Delhi Elections 2020: केजरीवाल करीब 50 दिन से जारी इस धरने में नहीं गए। उनकी पार्टी के लोग गए लेकिन खुद उन्होंने जाना मुनासिब नहीं समझा।

Author नई दिल्ली | Updated: February 3, 2020 5:53 AM
जेएनयू में छात्रों पर हुए हमले के बाद भी केजरीवाल वहां नहीं गए।

Delhi Elections 2020: राजधानी की छोटी सी बस्ती शाहीन बाग में बीते करीब डेढ़ महीने से जारी धरना, दिल्ली के चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जारी यह धरना जहां दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं यह दिल्ली की चुनावी महाभारत का एक ऐसा चक्रव्यूह बन गया है जिससे निकलना सूबे के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसकी सियासी तासीर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चुनाव में दिल्ली की 70 में से 67 सीटें जीतकर रिकार्ड बनाने वाले केजरीवाल की सत्ता में वापसी के रास्ते में यह सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ गया है।

शाहीन बाग में शनिवार को जब दूसरी बार गोली चली तो आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने शाहीन बाग में धरना देने वालों से अपील की कि उन्हें अपने धरने को जारी रखने को लेकर दोबारा विचार करना चाहिए ताकि इसका राजनीतिक फायदा नहीं उठाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि धरना देने वालों को शारीरिक रूप से क्षति नहीं पहुंचे इसका भी उन्हें ध्यान रखना चाहिए। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल खुद ही कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार की ओर से कोई बाधा नहीं है। केंद्र सरकार को शाहीन बाग में धरने पर बैठे लोगों से बातचीत कर सड़क खुलवानी चाहिए।
दरअसल, भाजपा ने इस चुनाव में शाहीन बाग में हो रहे सीएए विरोधी धरने को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। उनके तमाम बड़े नेता इस धरने को लेकर बयान दे रहे हैं। चूंकि नोएडा-कालिंदी कुंज रोड पर जारी इस धरने से आसपास के कई विधानसभा क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। लिहाजा, भाजपा के विरोध का असर इन प्रभावित लोगों पर होता भी दिख रहा है। माना जा रहा है कि आसपास की आठ से 10 सीटों पर इसका असर हो सकता है।

केजरीवाल करीब 50 दिन से जारी इस धरने में नहीं गए। उनकी पार्टी के लोग गए लेकिन खुद उन्होंने जाना मुनासिब नहीं समझा। जेएनयू में छात्रों पर हुए हमले के बाद भी केजरीवाल वहां नहीं गए। इस पर उनको घेरते हुए कांग्रेस के दिल्ली के प्रभारी पी सी चाको ने पूछा कि आखिर केजरीवाल शाहीन बाग जाते क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे वाकई सीएए के खिलाफ हैं तो उन्हें शाहीन बाग जाना चाहिए। केजरीवाल शायद इस डर से वहां नहीं जा रहे कि इससे दिल्ली में धु्रवीकरण हो जाएगा जो उनको उल्टा पड़ जाएगा।

राजधानी की पांच-छह सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक हैं जबकि करीब इतनी ही सीट की चुनावी हार जीत को वे सीधे तौर पर प्रभावित करने की स्थिति में हैं। शाहीन बाग जाकर समर्थन नहीं देने के केजरीवाल के फैसले से नाराज होकर अगर अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस की ओर गए तो केजरीवाल के लिए सत्ता का सफर मुश्किल हो जाएगा और अगर भाजपा का चुनावी अभियान सफल रहा तो केजरीवाल यह भी साबित नहीं कर पाएंगे कि वे शाहीन बाग के धरने के खिलाफ हैं और उनको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि केजरीवाल के लिए शाहीन बाग दिल्ली की चुनावी महाभारत का मुश्किल चक्रव्यूह साबित हो सकता है।

अजय पांडेय

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