ताज़ा खबर
 

सड़क पर न छिने जीने का अधिकार

दिल्ली पुलिस का मानना है कि अगर जुर्माने के बढ़ोतरी वाले नए मोटर विधेयक के मसौदे को कानूनी जामा पहना दिया जाता है तो निश्चित तौर पर ट्रैफिक नियम के उल्लंघन के मामले कम होंगे।

Author नई दिल्ली | August 5, 2016 1:52 AM

दिल्ली पुलिस का मानना है कि अगर जुर्माने के बढ़ोतरी वाले नए मोटर विधेयक के मसौदे को कानूनी जामा पहना दिया जाता है तो निश्चित तौर पर ट्रैफिक नियम के उल्लंघन के मामले कम होंगे। लेकिन यह अभी मसौदा है और इसे कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदन से पास होना पड़ेगा। इतना ही नहीं इसके बाद राष्ट्रपति से अनुमोदित होने और गजट में प्रकाशित होने के बाद ही विधेयक के उपबंध कानून का दर्जा पा सकेंगे।

दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्राफिक) गरिमा भटनागर ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान के दो ही तरीके हैं- भय या प्रीत! लोग समस्या को समझें, न केवल जागरूक हों बल्कि जागरूकता दर्शाएं तो मसले हल होने की ओर बढ़ जाते हैं। सुगम सुचारू यातायात जनता से जुड़ा एक बड़ा पहलू है। सड़क पर चलने का पहला हक पैदल यात्रियों का है। जब वाहन चालक यह समझ ले कि सड़क पर केवल वही नहीं बल्कि और भी लोग हैं तो बात बन जाएगी। सड़क पर एक ‘अदृश्य नियमावली’ है , जिसे कानून की किताब में ‘ट्रैफिक रूल व रेगुलेशन’ कहा गया है। इसका पालन करना सबके हित में है, तो फिर समस्या खत्म हो जाती है! इसे प्रीत मान सकते हैं। लेकिन कुछ लोग जो इसकी फिक्र नहीं करते वहीं भय वाली बात आती है, मोटर वाहन एक्ट व आइपीसी के कड़े उपबंधों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘कैबिनेट का इस बाबत फैसला अहम व जरूरी है।

वाहन, मोटर, ट्रैफिक, पुलिस सभी विभागों को इससे बल मिलेगा। आशा की जानी जाहिए कि यह कानून जल्द अमल में आ जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी पर दिल्ली पुलिस के एक अन्य पुलिस पदाधिकारी ने कहा, ‘सबसे ज्यादा खुशी हमें ही है। कई बार धन का खुमार नियम तोड़ने वालों के मन पर हावी होता देखा गया है। निश्चित तौर पर कड़े उपबंध से ट्रैफिक उल्लंघन की वारदात कम होगी’। बुधवार को कैबिनेट ने मोटर वाहन एक्ट में संशोधन के मसौदे को मंजूरी दी है। जिसके तहत ट्रैफिक नियम न मानने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाना है। मसलन शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10,000 तक जुर्माना, तेज गाड़ी चलाने पर 4,000 बीमा के बिना गाड़ी चलाने पर 2,000, बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर 2,000 व बिना हेलमेट वालों का लाइसेंस भी रद्द करने जैसे कानून बनाए जाने वाले हैं।

इसके अलावा हिट एंड रन मामले में मुआवजा राशि दो लाख तक करने और किशोरों को वाहन देने वाले अभिभावक पर उन्हें अभियोजक बनाने के प्रवाधान शामिल हैं। मोटर वाहन कानून सख्त हो गया है। यातायात के उल्लंघनों पर अब 100 रपए के बदले 500 रपए का जुर्माना करने के प्रवधानकिए गए हैं। इंग्लैंड से स्वदेश लौटे सेफर रोड फाउंडेशन के संस्थापक मोहम्मद इमरान ने कहा ‘यह फैसला निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों को ‘जीने के अधिकार के दायरे में लाएगा’। उन्होंने कहा सर्वे बताते हैं कि इन दिनों आम तौर पर वेयर हाउस, एक्सपोर्ट हाउस, न्यून-मध्यम उद्योगों के कामगार घर से पहले पार्क व दूसरे ठीहे पर रुकने के फैशन में बढ़ावा हुआ है। हो सकता है कि तनाव से छुटकारा या खुशी पाने का झूठा बहाना इसकी वजह हो। लेकिन एक-दो पैग लेना मानो अब रूटीन सा बन गया है। फिर नशे में मोटरसाइकिल या गाड़ी की सवारी कई बार पूरे घर को तबाह कर देती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App