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भारतीय रेल को लगातार पीछे ले जा रहा है सेल, गाज ग‍िरा सकती है नरेंद्र मोदी सरकार

रेल मंत्रालय निजी फर्म को इस क्षेत्र में मौका देने पर विचार कर रहा है। इसके तहत सरकार ने करीब 70 करोड़ रुपए निजी सेक्टर के लिए रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, SAIL 850,000 टन स्टील की सप्लाई का टारगेट है। लेकिन कंपनी अपने टारगेट से 250,000 टन स्टील की सप्लाई पीछे चल रही है। (file photo)

भारतीय रेलवे ने माना है कि देशभर में रेलवे ट्रेक की पूर्ति के लिए स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया का एकाधिकार है। इसीलिए अब रेलवे SAIL के एकाधिकार को खत्म करना चाहती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रेल मंत्रालय निजी फर्म को इस क्षेत्र में मौका देने पर विचार कर रहा है। इसके तहत सरकार ने करीब 70 करोड़ रुपए निजी सेक्टर के लिए रखे हैं। रेलवे की सुरक्षा को दुरुस्त करने के लिए सरकार पहले ही 15 अरब डॉलर के फंड की घोषणा कर चुकी है। बता दें कि बीते दो सालों में रेलवे दुर्घटना में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पिछले सप्ताह रेल मंत्रालय ने ये आंकड़ा में संसद में दिया है।

वहीं जानकारी के मुताबिक, SAIL 850,000 टन स्टील की सप्लाई का टारगेट है। लेकिन कंपनी अपने टारगेट से 250,000 टन स्टील की सप्लाई पीछे चल रही है। ये इस साल कंपनी की सप्लाई में सबसे बड़ी गिरावट है। ऐसा पिछले 10 दस सालों में 8 आठवीं बार है जब कंपनी अपना टारगेट पूरा नहीं कर पा रही है। ये जानकारी कंपनी के डेटा के हवाले से है। 11 जनवरी को रेलवे मिनिस्ट्री द्वारा स्टील मिनिस्ट्री में भेजे गए लेटर में एक अधिकारी ने कहा कि SAIL का प्रदर्शन बीते सालों में काफी खराब रहा है। अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगे से इस तरह के प्रदर्शन को बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

दूसरी तरफ, दो अन्य सरकारी अधिकारियों ने भी इस बात को माना है और कहा अब रेलवे स्टील की सप्लाई में किसी भी तरह ढील नहीं देगा। हालांकि जिन दो अधिकारियों ये बात कही है उन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक करने से इंकार किया है। उधर, सेल के एग्जिक्यूटिव के मुताबिक, पुराने ट्रैक को बदलने और नए ट्रैक बिछाने में आई तेजी की वजह से 2015 से रेलवे की स्टील की डिमांड अचानक 45 फीसदी बढ़ी है। ऐसे में इसकी भरपाई करने में मुश्किल आ रही है।

कंपनी का कहना है कि उनके भिलाई स्टील प्लांट में इस साल एक नई रोलिंग मिल शुरू होने से उसके प्रोडक्शन में 1 लाख टन की बढ़ोत्तरी हो जाएगी।

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