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भारत-नेपाल के बीच तीन नई रेल लाइन बिछाने की तैयारी

नेपाल के साथ भारत की डिप्लोमेसी नए सिरे से परवान चढ़ने लगी है। चीन की तरफ से नेपाल के यू-टर्न लेने के साथ भारत के साथ संबंधों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है। चीन के साथ संबंधों के मद्देनजर भारत अब अपने इस पड़ोसी देश को नए रणनीतिक साझीदार के तौर पर विकसित करने में जुट रहा है।

Author October 28, 2016 2:59 AM
फाइल फोटो

दीपक रस्तोगी

नेपाल के साथ भारत की डिप्लोमेसी नए सिरे से परवान चढ़ने लगी है। चीन की तरफ से नेपाल के यू-टर्न लेने के साथ भारत के साथ संबंधों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है। चीन के साथ संबंधों के मद्देनजर भारत अब अपने इस पड़ोसी देश को नए रणनीतिक साझीदार के तौर पर विकसित करने में जुट रहा है। नेपाल में तीन नई रेल लाइन बिछाने, नए सड़क संपर्क विकसित करने के साथ ही सीमा सुरक्षा का साझा मेकेनिज्म विकसित करने और सैन्य सुरक्षा बढ़ाने पर दोनों देश मसविदा तैयार करने में जुटे हैं। भारत अपनी ओर से प्रत्यर्पण संधि पर जोर दे रहा है। दो साल के अंतराल के बाद नई दिल्ली में ‘भारत-नेपाल संयुक्त आयोग’ की बैठक हो रही है। विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर और नेपाल के विदेश मंत्री प्रकाश सरन महत के नेतृत्व में दोनों देशों के विदेश सचिव और अन्य आला अधिकारी तीन दिनों तक बैठक करेंगे और ‘दूरगामी नतीजे देने वाला’ मसविदा तैयार करेंगे। नेपाल ने अपनी ओर से भारत द्वारा फंडिंग की जा रही उन परियोजनाओं की फेहरिस्त सौंपी है, जो नेपाल के अंदरूनी राजनीतिक हालात के चलते ठंडे बस्ते में चले गए थे। वहां के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के दौर में नेपाल का झुकाव चीन की तरफ हो गया था। तब चीन ने अपने यहां से काठमांडो तक रेल नेटवर्क बनाने की परियोजना शुरू की थी।

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सत्ता परिवर्तन में पुष्प कुमार दहल ‘प्रचंड’ के प्रधानमंत्री बनने के बाद से नेपाल की विदेश नीति में यू-टर्न आया है और पूर्ववत भारत की ओर झुकाव दिख रहा है। बीते दिनों दहल की भारत यात्रा से दोनों देशों में बर्फ गलनी शुरू हुई। अब ‘भारत-नेपाल संयुक्त आयोग’ की बैठक के मंच से भारत चार महत्त्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रहा है। बड़ी परियोजना रेल नेटवर्क की है। कोलकाता बंदरगाह से नेपाल के औद्योगिक हब बीरगंज के लिए सिंगल लाइन है, जिस पर मालगाड़ी चलती है। उसे विकसित कर पैसेंजर ट्रेन चलाने लायक बनाने का प्रस्ताव है। नई रेल लाइन नेपाल के बिराटनगर तक बिछाई जा रही है, जिसमें भारत की तरफ का काम पूरा हो चुका है। आगे के लिए नेपाल सरकार को अनुमति देना है। तीसरी रेल लाइन परियोजना का प्रस्ताव है- नेपाल के काकरभिट्टा सीमा से लेकर बंगाल के पानीटंकी इलाके तक।

इसके अलाबा नेपाल में 945 किलोमीटर की ईस्ट-वेस्ट रेल लाइन बिछाने की परियोजना का प्रस्ताव है, जिसके लिए राइट्स समेत तमाम भारतीय एजंसियां अपना शुरुआती काम निपटा चुकी हैं। भारत द्वारा प्रस्तावित बीबीआइएन (भूटान-बांग्लादेश-इंडिया-नेपाल) देशों में रेल और सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए नेपाल में इन योजनाओं को जरूरी माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हमारा पूरा ध्यान रेल नेटवर्क की ओर है।
रेल और सड़क संपर्क को लेकर नवंबर के पहले हफ्ते में घोषणा की जा सकती है, जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नेपाल के दौरे पर होंगे। नेपाल के विदेश मंत्री महत के अनुसार, ‘भारत की तरफ से सड़क संपर्क, सीमा-पार संपर्क बढ़ाने, सुरक्षा मामलों, सीमा पर सतर्कता, पेट्रोलियम पाइप लाइन बिछाने और नेपाल में भारतीय फंडिंग वाली 4800 मेगावाट की पनबिजली परियोजना के साथ ही कई ऐसे प्रस्तावों पर बातचीत का एजंडा है, जिसकी हमें बेहद जरूरत है।’ इस एजंडे में महाकाली संधि को लागू करने का मेकेनिज्म विकसित करने का विषय है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का फार्मूला तैयार किया जाना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्परूप के अनुसार, ‘राजनयिक स्तर पर कोशिश है कि सभी प्रस्तावों पर तेजी से काम हो।’
सीमा सुरक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ाने के प्रस्ताव भी हैं, जिनमें कुछ तकनीकी अड़चनें हैं। इसके लिए विदेश सचिव स्तर पर वार्ताएं चलेंगी। सुस्ता और कालापानी इलाके में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बनाने और साझा पेट्रोलिंग का प्रस्ताव भारत की ओर से है। आतंकी समूहों की घुसपैठ के लिहाज से ये दोनों इलाके संवेदनशील रहे हैं। दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के मसविदे का है, जिस पर भारत अपनी ओर से जोर दे रहा है। नेपाल सरकार इस मुद्दे पर पहले वहां राजनीतिक राय कायम करना चाहती है।

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