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गर्मी की मार के बीच 50 से पारा हो रहा पार, कितना सह सकता इंसानी शरीर; बताया डॉक्टर्स व एक्सपर्ट्स ने

इंसानी शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है। इसका जवाब एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स ने दिया है।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 6:19 PM
राजधानी दिल्ली समेत मैदानी इलाकों में गर्मी से हाल बेहाल (एक्सप्रेस फाइल)

झुलसाने वाली गर्मी का कहर लगातार जारी है। हाल ही में केरल एक्सप्रेस में गर्मी की वजह से चार यात्रियों ने झांसी के में दम तोड़ दिया। चारों यात्री तमिलनाडु के निवासी थे जो कि आगरा से घुमकर वापस लौट रहे थे। देश में उत्तर और पूर्वी हिस्से में हीट वेव यानि की लू का सिलसिला लगातार जारी है। राजस्थान के चुरू में तो गर्मी की मार के बीच पारा 50 के करीब जा पहुंचा।

चार यात्रियों की मौत से एक सवाल हम सभी के जहन में आता है और वह है इंसानी शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है। इसका जवाब शोधकर्ताओं और डॉक्टर्स ने दिया है। डॉक्टर और शोधकर्ताओं के मुताबिक इंसानी शरीर में जब गर्मी का प्रभाव लगातार बढ़ता है तो इसे ‘हीट स्ट्रैस’ कहते हैं।

आईआईटी दिल्ली में वायुमंडलीय अध्ययन केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर सागनिक डे बताते हैं ‘जब हमारा शरीर गर्मी के संपर्क में होता है, तो यह अपने मूल तापमान को बनाए रखने की कोशिश करता है। पर्यावरण और शारीरिक स्थितियों के आधार पर शरीर का मुख्य तापमान बनना शुरू हो जाता है और हमें थकान महसूस होने लगती है।’

हालांकि हीट स्ट्रेस के कई लक्षण बताए जाते हैं। जैसे कि तापमान का स्तर और अलग-अलग तापमान में कितने देर तक समय बिताना। नेफ्रॉन क्लिनिक के डॉ. संजीव बगई के अनुसार, 40 डिग्री सेल्सियस से परे किसी भी तापमान पर इंसानी शरीर विपरीत परिस्थितियों को महसूस करने लगता है। सिरदर्द, उल्टी और डीहाईड्रेषन 40-42 डिग्री से ज्यादा तापमान पर अनुभव किया जाता है। 45 डिग्री तापामान पर ब्लड प्रेशर, डेलेरियम और घबराहट होने लगती है। वहीं अगर तापमान 48 से 50 डिग्री हो तो शरीर की मांसपेशियां टूटने लगती है और यहां तक की इंसान की मौत भी हो जाती है जैसा कि झांसी वाले केस में देखने को मिला।’

कितना सहन किया जा सकता
डॉक्टर और शोधकर्ताओं का मानना है कि 40 डिग्री से ज्यादा तापमान पर शरीर में कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (गांधीनगर) के निदेशक दिलीप मालवंकर कहते हैं, गर्मी को सहना करना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तापमान में रहने के आदि हैं। शिकागो में गर्मी से होने वाली मौतें 35 डिग्री के तापामान पर होती हैं, वहीं यूरोप में भी ऐसा ही है। हालांकि भारत में ऐसा नहीं है। आर्द्रता और हवा जैसे पर्यावरणीय कारकों के कारण गर्मी हर जगह पर अलग-अलग है।’

वहीं सागनिक डे भी इसपर सहमत हैं। वह आईआईटी के रिसचर्स के साथ मिलकर हीट स्टैस इंडैक्स फॉर इंडिया: प्रोजेक्शन फॉर नियर फ्यूचर (HIIPROF) काम काम कर रहे हैं। इसमें हवा और आर्द्रता के तापमान पर होने वाले प्रभाव पर रिसर्च की जा रही है। वह कहते हैं हमारा शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है यह इस पर निर्भर करता है कि हम कितने तनाव, आर्द्रता, हवा और कितनी देर सूरज के संपर्क में रहते हैं। हम जिस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं उसे सामाजिक परिस्तिथियों के आधार पर तैयार कर रहे हैं। जिसे शोधकर्ता अक्सर दरकिनार कर देते हैं। मेरा मानना है कि सरकार को अपने फैसले को हीट इंडेक्स के आधार को ध्यान में रखकर लेने चाहिए।

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