ताज़ा खबर
 

AIMPLB सदस्य बोले- पैसे है नहीं वजीफा कहां से देगी सरकार, एंकर का तंज- देश का खर्चा आप चला रहे थे क्या?

शो के दौरान एंकर ने कहा महमूद साहब आप केस लड़ते थे तो क्या आपको फीस नहीं मिलती थी? पब्लिक ये कहती थी कि पराचा साहब देश पर कर्जा है फ्री में केस लड़ लीजिए।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 3:02 PM
डिबेट के दौरान पेनलिस्ट। फोटो: Video grab image

मोदी सरकार अगले पांच साल में अल्पसंख्यक समुदाय के 5 करोड़ छात्रों को वजीफा देगी। मदरसों के छात्रों के लिए कम्प्यूटर और विज्ञान जैसे विषयों की शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। छात्रवृत्ति पाने वालों में 50% लड़कियां शामिल होंगी। मोदी सरकार के अल्पसंख्यकों को लुभाने के इस प्लान पर चर्चा जोरों पर है।

टीवी न्यूज चैनल ‘आज तक’ के शो दंगल में एंकर रोहित सरदाना ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की। चर्चा के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य और वकील महमूद पराचा ने कहा कि सरकार के पास पैसे नहीं है तो वह वजीफा कहां से देगी। इसपर एंकर ने उनपर पलटवार करते हुए कहा कि पिछले पांच साल से देश का खर्चा आप चला रहे थे क्या?

दरअसल शो की शुरुआत में रोहित सरदाना सबसे पहले महमूद पराचा से ही अपना पहला सवाल करते हैं। वह पूछते हैं ‘सरकार ये कहना चाहती है कि वह मदरसों को हाईटेक करना चाहती है। हम वहां पर बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। आजम खां (सपा सांसद) इस पर भी फच्चर फंसाते हैं। क्यों? मुसलमानों को पसंद नहीं है क्या या आजम खां सारे मुसलमानों की नुमाइंदगी नहीं करते? क्या आप ऐसा कहकर बहस के बीच से ही निकल लेंगे।’

इस पर महमूद पराचा कहते हैं ‘मैं कहीं नहीं निकल रहा हूं। आजम खां और हमारे बहुत से ऐसे नेता हैं जो आरएसएस की परोक्ष रूप से मदद करते रहे हैं। आप मदरसों में वजीफा देने चाहे या फिर स्कूलों में लेकिन सच तो यह है कि भारत में पैसे ही नहीं बचे। वित्त मंत्रालय से एक रिपोर्ट आई है जिसमें देशपर 82 लाख करोड़ रुपए कर्ज बताया गया है। जब 2014 में मोदी सरकार बनी थी तो यह कर्ज 55 लाख करोड़ रुपए था।’

महमूद के इस तर्क को सुनने के बाद रोहित तुंरत पलटवार करते हैं और कहते हैं ‘तो क्या 2014 से 2019 के बीच में देश भुखा मर रहा था। इस देश में कुछ काम नहीं हुआ। सब बंद हो गया था क्या।’ रोहित के इस तंज पर शो में शामिल दर्शक जमकर तालियां बजाने लगते हैं। इसपर महमूद कहते हैं ‘आपकी बात पर इतनी जबरदस्त ताली बजी लेकिन मैं जो कहना चाहता हूं वो बात आपने सुनी ही नहीं।’

एंकर कहते हैं ‘आप केस लड़ते थे तो क्या आपको फीस नहीं मिलती थी? पब्लिक ये कहती थी कि पराचा साहब देश पर कर्जा है फ्री में केस लड़ लीजिए।’ एंकर के इस तंज पर महमूद पराचा कहते हैं ‘एक समस्या यह भी है मैं आपको कितने गंभीर विषय के बारे में बताना चाहता हूं लेकिन आप इसे मजाक में टालना चाहते हैं। लेकिन मैं बता दूं देश में 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर्ज की गई है। नौकरियां नहीं है मदरसे में पढ़कर बच्चों को नौकरियां कहां से मिलेगी। और रही बात फ्री में केस लड़ने की तो मैं 70 प्रतिशत केस फ्री में लड़ता हूं। लेकिन यहां मेरी बात नहीं बल्कि देश की बात हो रही है। मैं यहां अपनी तारीफ करने नहीं आया हूं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि पिछले पांच साल के दौरान देश में 27 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ा है।’

इसपर रोहित सरदाना कहते हैं ‘हां जैसे 72 लाख करोड़ रुपए मैं ही अपने घर ले गया हूं और आप वहां कुर्सी पर बैठकर उन्हें गिन रहे थे। आपके पास मेरे सवालों का जवाब नहीं है ये बात आप मान लीजिए। आप वकील हैं और यहां पर नौटंकी मत कीजिए। अब आप मेरे सवाल का जवाब दीजिए। आप ये कह रहे हैं कि देश के पास पैसे ही नहीं है। 30 प्रतिशत लोगों से आपने फिर भी फीस ले ली। आप सुबह सब्जी खरीदने जाते हैं तो क्या मुफ्त में ले आते हैं? आप लोग ये ड्रामा क्यों करते हैं?

इस पर AIMPLB सदस्य पराचा कहते हैं ‘देश का यही दुर्भाग्य है कि आप जैसा पत्रकार ये बात कह रहा है। बुद्धिजीवी भी इस डिबेट को सुन रहे हैं। आप किस स्तर पर ले जा रहे हैं देश की मानसिकता को। मदरसों में सिर्फ 2 प्रतिशत मुसलमान पढ़ते हैं। अगर मोदी जी को कुछ करना है तो सबसे मुसलमानों पर लांछन लगाना बंद करना होगा।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X