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उगादि पर्व 2017: तेलुगु नववर्ष उगादि के मौके पर अपनों को इस तरह दें शुभकामनाएं और बधाई

उगादि पर्व 2017: इस त्यौहार के बारें में कहा जाता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरु की और सूर्य की पहली किरण की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी।

Author Updated: March 28, 2017 1:02 PM
उगादि पर्व आज(28 मार्च) धूमधाम से मनाया जा रहा है। (photo source- facebook)

भारत वर्ष ने कई त्यौहार मनाए जाते हैं, इन्हीं त्यौहारों में से एक है उगादि पर्व। उगादी पर्व को भारत में विशेष रुप से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। इस त्यौहार के बारें में कहा जाता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरु की और सूर्य की पहली किरण की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी। इस त्यौहार को देश में आज(28 मार्च) धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान को खुश करने के लिए मंदिरों में विशेष रुप से पूजा-अर्चना की जाती है। लोगों का ऐसा मानना है कि इसी दिन महाराज युधिष्टिर का भी राज्याभिषेक हुआ और महाराजा विक्रमादित्य ने भी शकों पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का आरंभ इसी दिन से होता है।

तेलुगू लोग इस दिन खास तौर पर कार्यक्रमों में ये गीत बजाते हैं। ”उगाडी उगाडी ओह स्वामी! रावा, माकाई नीवू रागालिवी पूवुलाई नीकी पांज मालो ईवो।” इस गीत को इस दिन खास माना जाता है। इस दिन नि: शुल्क शिविर भी लगाए जाते हैं जिसमें कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। और यह सिलसिला कई महीनों तक जारी रहता है।

इस त्यौहार के दिन हर कोई अपने सगे संबंधियों को इस त्यौहार की शुभकामनाएं देना चाहता है। हम लाए हैं आपके लिए खास मैसेज, कोट्स जिसे भेजकर आप अपने सगे संबंधियों को इस त्यौहार की शुभकामनाएं दे सकते हैं।

आपको और आपके परिवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा एवम् उगादी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

आपण सर्वांना गुड़ीपाड़व्याच्या हार्दिक शुभेच्छा ! आनंद मध्ये प्रेमाने रहावा , खूप मज़ा करा !

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरां ।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीं ॥

उगादी पर्व और नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं.. नववर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो

सभी स्नेही मित्रो को उगादी पर्व 2017 की हार्दिक शुभकामनाये !

आप सबको उगादि, गुड़ी पड़वा और नवरेह की भी शुभकमनाएं। यह पर्व आप सभी के जीवन में शांति, समृद्धि एवं खुशहाली लाये।

अगर कुछ पंडितों की माने तो पूजन का शुभ संकल्प कर एक चौकी या बालू की वेदी का निर्माण कर उसमें साफ सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर हल्दी या केसर से रंगे अक्षत से अष्टदल कमल बनाकर उस पर ब्रह्माजी की सुवर्णमूर्ति स्थापित करें।

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