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केरलः गैरकानूनी तरीके से पैसा कमाने के लिए की गई गोल्ड स्मगलिंग टेरेरिस्ट एक्ट नहीं, हाई कोर्ट ने कहा-ऐसे मामले में UAPA के तहत कार्रवाई नहीं बनती

कोर्ट का कहना था कि ऐसे कृत्य को तभी टेरेरिस्ट एक्ट माना जा सकता है, जब इससे देश की आर्थिक सुरक्षा में सेंध लग रही हो।

Author Edited By shailendra gautam February 19, 2021 9:59 PM
Kerala HC, Election Commission, Rajya Sabha elections, kerala assembly, kerala electionतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Indian Express)

केरल हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महज गैरकानूनी तरीके से पैसा कमाने के लिए की गई गोल्ड स्मगलिंग को टेरेरिस्ट एक्ट नहीं माना जा सकता। ऐसे मामले में UAPA के तहत कार्रवाई नहीं बनती। कोर्ट का कहना था कि ऐसे कृत्य को तभी टेरेरिस्ट एक्ट माना जा सकता है, जब इससे देश की आर्थिक सुरक्षा में सेंध लग रही हो। जस्टिस हरिप्रसाद और एमआर अनीथा की बेंच ने एनआईए की दलील को खारिज करते हुए कहा कि गोल्ड स्मगलिंग के लिए कस्टम एक्ट में सजा का प्रावधान है।

एनआईए ने डबल बेंच से कोच्चि की स्पेशल कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसमें डिप्लोमेटिक चैनल से गोल्ड स्मगलिंग करने के मामले के 10 आरोपियों को जमानत दी गई थी। गोल्ड स्मगलिंग के इस मामले में तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से 14.82 करोड़ रुपए का सोना जब्त किया गया था। डिप्लोमेटिक चैनल के जरिए होने वाली तस्करी में स्वपना सुरेश और पीआर सारिथ के साथ 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि आरोपियों ने महज अपने फायदे के लिए सोने की तस्करी की। उनके इस कृत्य से देश की आर्थिक सुरक्षा को किसी तरह का खतरा होने की आशंका नहीं लगती। स्पेशल कोर्ट ने सभी को बेल दे दी थी।

ध्यान रहे कि UAPA के सेक्शन 15 में कहा गया है कि भारत के आर्थिक स्थायित्व और सुरक्षा को डैमेज करने के लिए अगर कोई भारत की जाली पेपर करेंसी, सिक्के और अन्य सामग्री को बनाने, स्मगलिंग और उसके प्रसार का काम करता है तो इस तरह के कृत्य को आतंकी गतिविधि माना जाएगा। डबल बेंच ने कहा कि UAPA में जिस अन्य सामग्री का जिक्र किया गया है, वह जाली करेंसी से जुड़ी मशीनरी या इससे संबंधित कोई और चीज हो सकती है। कोर्ट का कहना था कि हमारी राय में UAPA के सेक्शन 15 में दर्ज अन्य सामग्री की परिभाषा में सोने को नहीं रखा जा सकता।

कोर्ट का कहना था कि सोना बेशक मूल्यवान चीज है और इसके जरिए मोटा पैसा बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं लगता कि सोने को जाली करेंसी और सिक्कों की कैटेगरी में रखा जा सकता है। कोर्ट का कहना था कि अगर संसद की मंशा UAPA एक्ट के सेक्शन 15 में गोल्ड स्मगलिंग को शामिल करने की थी तो मामूली परिवर्तन के जरिए ऐसा किया जा सकता था। लेकिन संसद को तब कस्टम एक्ट के बारे में पता रहा होगा। संसद ने अपने विवेक के आधार पर ऐसा किया।

एनआईए ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को डबल बेंच के सामने पेश किया, जिसमें गोल्ड स्मगलिंग को उस सूरत में आतंकी गतिविधि माना गया था, जिसमें इससे देश की आर्थिक सुरक्षा में सेंध लगती हो। केरल हाई कोर्ट ने कहा कि राजस्थान की कोर्ट ने एक एफआईआर को खारिज करने या न करने को लेकर अपनी यह राय व्यक्त की थी। डबल बेंच ने कहा कि हम राजस्थान की कोर्ट की उस राय से इत्तेफाक नहीं रखते। डबल बेंच ने 2018 के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें 2-1 के बहुमत से जाली करेंसी के प्रसार को आतंकी गतिविधि मानने से इन्कार कर दिया गया था। उस फैसले में कहा गया था कि 2013 में UAPA में संशोधन से पहले जाली करेंसी का प्रसार आतंकी घटना नहीं थी।

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