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नृत्य में देवी रूपों का दर्शन

पिछले दिनों इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रंगप्रवेशम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में नृत्यांगना प्रतिभा प्रह्लाद की शिष्या कामाख्या मिश्र ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति पेश की।

पिछले दिनों इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रंगप्रवेशम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में नृत्यांगना प्रतिभा प्रह्लाद की शिष्या कामाख्या मिश्र ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति पेश की। समारोह का आरंभ कामाक्षी स्तुति से हुआ। यह कांचीपुरम की देवी कामाक्षी को निवेदित रचना पर आधारित थी। मुत्थुस्वामी दीक्षितर की रचना ‘कांचि नुपुर रत्न कंकण’ को राग कमलमनोहरी और आदि ताल में निबद्ध किया गया था। देवी के लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, त्रिपुरसुंदरी, शंकरी आदि रूपों को कामाख्या ने भंगिमाओं, हस्त मुद्राओं और मुखाभिनय के जरिए दर्शाया।
दूसरी प्रस्तुति शिवाष्टकम थी। यह राग मोहना और खंडचापू ताल में निबद्ध थी।

भगवान शिव की स्तुति को नृत्य में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम ने पिरोया था। कृष्ण की प्रिय सत्यभामा के भावों को भामाकलापम प्रवेश दरू में कामाख्या ने पेश किया। यह राग भैरवी और मिश्र चापू ताल में निबद्ध था। सिद्धेंद्र योगी की ‘पत्र प्रवेश दरू’ में सत्यभामा के भावों की व्याख्या है। नायिका सत्यभामा अपने को सबसे खूबसूरत, संपन्न और कृष्ण की सबसे प्रिय मानती है। इन भावों को कामाख्या ने अभिनय के जरिए निरूपित किया। उन्होंने गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम की एक और नृत्य रचना ‘मरकत मणिमय चेला’ को प्रस्तुत किया। यह राग आरभि और आदि ताल में निबद्ध था। उथुकडू वेंकट सुबैया की इस रचना में कृष्ण के सौंदर्य, उनके बांसुरी के स्वरलहरी के प्रभाव, कलिंग दमन का वर्णन था। इसमें शिष्या कामाख्या ने पूरी मेहनत से अंग व पद कासंचालन पेश किया।

नृत्यांगना प्रतिभा प्रह्लाद की नृत्य रचनाओं को शिष्या कामाख्या ने पेश किया। उन्होंने नायिका राधा के भावों को रचना ‘कौन राधिका रानी इनमें’ पर दर्शाया। यह राग दरबारी कान्हड़ा और आदि ताल में निबद्ध था। कामाख्या ने गुरु प्रतिभा प्रह्लाद की दूसरी नृत्य परिकल्पना जावली को पेश किया। धर्मपुरी सुब्बारायर की रचना ‘परूलन्ना मात’ में नायिका के भावों को दर्शाया गया। यह राग कपि और रूपक ताल में निबद्ध था। शिष्या कामाख्या ने अभिनय की बारीकियों को अपनी क्षमता के अनुकूल प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में संगत कलाकारों में शामिल थे-नटुवंगम पर गुरु प्रतिभा प्रह्लाद व डीवी प्रसन्न कुमार, गायन पर सुधा रघुरामन, वीणा पर श्यामला भास्कर, वायलिन पर अन्नादुरई और बांसुरी पर रजत प्रसन्ना।

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