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बजट सत्र में नहीं दिखेंगे कोई पूर्व प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह की 30 साल की संसदीय पारी खत्म

असम विधानसभा में कांग्रेस के पास संख्याबल की कमी है। कांग्रेस के पास इतने सदस्य नहीं है कि वे मनमोहन सिंह फिर से राज्यसभा के लिए भेज सकें।

Author नई दिल्ली | June 15, 2019 9:31 PM
पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह (एक्सप्रेस फाइल)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसबार के बजट सत्र में संसद में नहीं दिखाई देंगे। पूर्व पीएम की 30 साल की संसदीय पारी शुक्रवार (14 जून 2019) को खत्म हो गई। वह असम से लागातार पांच बार राज्यसभा के सांसद चुने गए थे। मनमोहन ने अपनी पहली संसदीय  पारी  1991 में शुरू की थी।

इस बार असम विधानसभा में कांग्रेस के पास संख्याबल की कमी है। कांग्रेस के पास इतने सदस्य नहीं है कि वे उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए भेज सके। असम विधानसभा में कांग्रेस के 25 सदस्य हैं जबकि उन्हें निर्वाचित करने के लिए 43 वोट चाहिए।

बता दें कि 17 जून से संसद का बजट सत्र शुरू होगा। ऐसे में मनमोहन सिंह संसद में भाषण नहीं दे पाएंगे। हालांकि कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि मनमोहन सिंह की संसदीय पारी खत्म हो चुकी है। पार्टी उन्हें ऐसे राज्य से संसद भेज सकती हैं जहां उनके पास प्रयाप्त मात्रा में संख्या बल है। कहा जा रहा है कि पार्टी उन्हें राजस्थान विधानसभा से उच्च सदन में भेज सकती है। हालांकि उन्हें इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी संसद में नहीं दिखाई देंगे। इस तरह संसद में अब कोई भी पूर्व पीएम नजर नहीं आएंगे। उन्हें कर्नाटक की तुमकुर लोकसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा है। देवगौड़ा को भाजपा के जीएस बासवराज ने 13339 वोटों के अंतर से हराया। देवेगौड़ा ने जून 1996 से अप्रैल 1997 तक भारत के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। बता दें कि देवगौड़ा ने पोते प्रज्जवल के लिए अपनी पारंपरिक हासन सीट छोटकर तुमकुर सीट से चुनाव लड़ा था।

दादा के लिए सीट छोड़ने का किया है एलान: देवगौड़ा की हार के बाद प्रज्जवल ने कहा, ‘जेडीएस कैडर में विश्वास बहाल करने और एचडी देवगौड़ा की हार से पैदा हुई शून्यता को भरने के लिए, मैंने अपनी सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैं उन्हें एक बार फिर से हासन से जीतते हुए देखना चाहता हूं।’ इससे पहले दादा की तरफ से छोड़ी गई सीट से रेवन्ना ने 1.41 लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।

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