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दिल्ली सरकार ने पांच अस्पतालों पर लगाया 600 करोड़ रुपए का जुर्माना, गरीबों को मुफ्त इलाज ना देने का था आरोप

दिल्ली में 43 अस्पतालों को इस शर्त पर रियायती दरों पर जमीन दी गयी थी कि वे गरीब मरीजों के लिए 10 फीसदी बेड और बाह्य रोगी विभाग में 25 फीसदी स्थान मुफ्त इलाज के लिए रखेंगे।

Author June 12, 2016 4:41 PM
केजरीवाल सरकार ने इस जुर्माने को भरने के लिए 9 जुलाई तक का वक्त दिया है। (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार ने पांच प्राइवेट अस्पतालों को गरीबों का इलाज करने से इनकार करने पर 600 करोड़ रूपए का ‘अवांछित मुनाफा’ जमा करने का निर्देश दिया है । इन अस्पतालों को गरीबों का इलाज करने की शर्त पर जमीन लीज पर आवंटित दी गयी थी। जिन हॉस्पिटल्स पर जुर्मना लगाया गया है उसमें फोर्टिस, एस्कार्ट हार्ट इंस्टीट्यूट और मैक्स सुपर भी शामिल हैं। इन अस्पतालों को नौ जुलाई तक इस जुर्माना राशि को भुगतान करने को कहा गया है, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ हेमप्रकाश ने बताया कि मैक्स सुपर, फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, शांति मुकुंद अस्पताल, धर्मशिला कैंसर अस्पताल, और पुष्पावती सिंघानियां रिसर्च इंस्टीट्यूट को इस शर्त पर सन् 1960 और सन् 1990 के बीच रियायती दरों पर जमीन दी गयी थी कि वे गरीबों का मुफ्त इलाज करेंगे।

प्रकाश ने कहा, ‘इन पांचों अस्पतालों ने शर्तों का पालन नहीं किया है। पहले, हमने दिसंबर 2015 में इन अस्पतालों को नोटिस भेजकर उनसे इस बात पर सफाई मांगी थी कि वे गरीबों का इलाज करने में क्यों विफल रहे और उन पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। लेकिन उनमें से किसी ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अतएव, हमने उनके विरूद्ध कार्रवाई शुरू की है।’

उन्होंने कहा, ‘यह जुर्माना वर्ष 2007 में एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर लगाया गया है। याचिका में मुफ्त इलाज के प्रावधान को लागू करने और दोषी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गयी थी। जुर्माना राशि उसी के अनुसार तय की गयी है। ’’

दिल्ली में 43 अस्पतालों को इस शर्त पर रियायती दरों पर जमीन दी गयी थी कि वे गरीब मरीजों के लिए 10 फीसदी बेड और बाह्य रोगी विभाग में 25 फीसदी स्थान मुफ्त इलाज के लिए रखेंगे।

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