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डॉल्फिन अंधी नहीं हुई तो समझिए गंगा साफ हो गई

गंगा की निर्मलता और अविरलता सुनिश्चित करने को मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि इस काम को 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा।

Author नई दिल्ली | August 5, 2016 04:12 am
उमा भारती

गंगा की निर्मलता और अविरलता सुनिश्चित करने को मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि इस काम को 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा-‘जब आए हैं तो कुछ करके जाएंगे। या तो गंगा निर्मल होगी या फिर मरके जाएंगे।’लोकसभा में सुष्मिता देव, सौगत राय व कुछ अन्य सदस्यों के सवालों के जवाब में जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा नदी में स्वर्ण मछली, महाशिरा, डाल्फिन जैसे जल जंतु ही साबित करेंगे कि गंगा निर्मल हुई या नहीं, क्योंकि अभी गंगा नदी में कई जगह इन जीवों के अस्तित्व पर संकट छाया हुआ है। कई स्थानों पर प्रदूषण के कारण डाल्फिन अंधी हो गई हंै। हम देख सकने वाली डाल्फिन छोड़ेंगे और अगर वे अंधी नहीं हुर्इं तो नदी की निर्मलता साबित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने नमामि गंगे योजना के माध्यम से गंगा की निर्मलता और अविरलता को सुनिश्चित करने की पहल की है और गंगा में इन जल जंतुओं का फिर से बहाल होना ही यह साबित करेगा कि गंगा निर्मल हो गई है। अक्तूबर 2016 में पहला चरण पूरा हो जाएगा।

अक्तूबर 2018 में दूसरा चरण और 2020 तक नमामि गंगे परियोजना को पूरा होना है। इसके लिए हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री सहित सभी का पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सात जुलाई 2016 को लघु व मध्यम अवधि की 231 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये परियोजनाएं गंगा और इसकी सहायक नदियों के पास स्थित विभिन्न नगरों में शुरू किए जाने वाले नमामि गंगे कार्यक्रम के साथ घाटों, शवदाह गृहों के आधुनिकीकरण और विकास, जैव विविधता केंद्र स्थापित करने, नदी तल की सफाई के लिए टैÑश स्कीमर का इस्तेमाल करने, सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित करने, सीवेज पंपिंग स्टेशन, मछली पालन केंद्र, नालों के अपशिष्ट जल के परिशोधन के लिए प्रायोगिक परियोजनाओं एवं वनीकरण आदि से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि कुल 123 घाट, 65 शवदाह गृह, 8 जलमल अवसंरचना और 35 अन्य परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

उमा भारती ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम 20,000 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया है जिसमें नए प्रयासों के लिए 12728 करोड़ रुपए शामिल हैं। इसके अंतर्गत विशेष रूप से 351.42 करोड़ रुपए की स्वीकृत लागत वाली 12 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को 18 माह से 48 माह के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। संपूर्ण कार्यक्रम को वर्ष 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मंत्री ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम की 20,000 करोड़ रुपए की लागत में से 7272 करोड़ रुपए मौजूदा व नए कार्यक्रमों के लिए है। कुल बजटीय राशि में से 100 करोड़ रुपए मीडिया और संचार के जरिए जन जागरूकता व गंगा संरक्षण में लोगों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए रखे गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014-15 और 2015-16 में विज्ञापनों पर कुल 2.8 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार ने 110 शहरों की पहचान की है जहां नदी-झीलों में अशोधित जलमल बहाया जाता है और सफाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। गंगा में जलमल बहाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में 114 नालों की पहचान की गई है। वे प्रतिदिन औसतन 6614 मिलियन लीटर जलमल और उद्योगों से निकलने वाला पानी बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 30 जून 2016 को 53 शहरों में 97 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि 12 परियोजनाएं 351 करोड़ रुपए की लागत के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम के घटक के रूप में स्वीकृत की गई हैं।

मंत्री ने कहा कि चार जुलाई 2016 को राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की छठी बैठक के दौरान पांच सदस्य राज्यों के प्रतिनिधियों सहित सभी सदस्य मौजूद थे जिनमें वे राज्यों की सहमति से गंगा अधिनियम तैयार करने पर सहमत हुए। उमा ने कहा कि जब वे मंत्री नहीं थीं तब उन्होंने सभी सांसदों को गंगा जल भेजा था और गंगा के विषय पर सहयोग मांगा था। तब सभी लोगों ने एक स्वर से इसका समर्थन किया था। अब जब संसद में कानून बनाने के लिए विधेयक लेकर आएंगी तब उसी तरह से सर्वसम्मति से उसे पारित करने की सभी से प्रार्थना करेंगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि नदी में डाली जाने वाली पूजन सामग्री गंगा नदी के प्रदूषण का मुख्य कारक नहीं है। यह पूजन सामग्री नदी प्रवाह के साथ स्वयं बह जाती है। लेकिन जब अन्य प्रदूषण के कारण नदी का प्रवाह कम होता है या बाधित होता है तो यह पूजन सामग्री एक जगह जमा होकर प्रदूषण बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के प्रदूषण का मुख्य कारण इसके किनारे बसी औद्योगिक इकाइयों द्वारा इसमें डाला जाने वाला प्रदूषित जल एवं कचरा तथा सीवेज है।

उमा ने कहा कि सरकार गंगा नदी में प्रदूषण को रोकने के लिए एक कानून लाने पर विचार कर रही है जिसमें प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़े प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किये गये सर्वेक्षण में गंगा बेसिन में 501 एमएलडी अपशिष्ट जल उत्पन्न करने वाले 764 पूरी तरह प्रदूषणकारी उद्योगों का पता चला है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विभिन्न जगहों पर गंगा जल की गुणवत्ता की जांच का पता लगाने के मकसद से उपकरण लगाने के लिए 196 करोड़ रुपए दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे योजना के तहत शुरू में छह शहरों- मथुरा, वृंदावन, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना और नई दिल्ली में ‘ट्रैश स्कीमरों’ से नदी सतह और घाट सफाई का काम शुरू किया जाएगा।

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