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झंडे का अपमान करने वालों को पुलिस खुद लेकर गई, केंद्र से बातचीत पर बोले राकेश टिकैत- ये कमजोर आदमी का काम

गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले में हुए उपद्रव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रतिक्रिया दी। इसपर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि झंडे का अपमान करने वालों को पुलिस खुद लेकर गई थी।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 1, 2021 9:46 AM
Rakesh tikait, delhi violence, pm modi man ki baat, राकेश टिकैत, मन की बात, पीएम मोदी, तिरंगे का अपमानभारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि झंडे का अपमान करने वालों को पुलिस खुद लेकर गई थी। (file)

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन दिल्ली से सटी सीमाओं पर पिछले 65 दिन से जारी है। इसी बीच गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले में हुए उपद्रव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रतिक्रिया दी। इसपर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि झंडे का अपमान करने वालों को पुलिस खुद लेकर गई थी।

टीवी चैनल “न्यूज़ 24” से बात करते हुए टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को जो कुछ भी हुआ, वह एक साजिश का नतीजा था। टिकैत ने कहा कि इसकी व्‍यापक जांच होनी चाहिए। किसान नेता ने बातचीत में कहा कि तिरंगा सबसे ऊपर है। हम कभी तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे। सदैव उसे ऊंचा रखेंगे। यह बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा। टिकैत ने कहा “हमारे शहीद बच्चे तिरंगे में लिपट के आते हैं, हम उसका अपमान करेंगे? किसान तिरंगे का सम्मान करता है।

किसान नेता ने कहा “जिन लोगों ने वहां पर तिरंगे का अपमान किया उसको गिरफ्तार क्यों नहीं करते। लाल किले के गेट तक उन लोगों को कौन लेकर गया। वीडियो क्लिप है पुलिस के अधिकारी लेकर गए उन्हें वहाँ। उनको रास्ते दिखाये गए। आँसू गैस के गोले वहां नहीं चले। किसी मीडिया चैनल की हिम्मत है कि वे इसे चैनल पर चलाये। जो चलाएगा जेल जाएगा। किसान, कलाम और कैमरे पर बंदूक का पहरा है इस देश में। किसान पहरे में फैसला नहीं करेंगे। जब लेवेल बराबर का होगा तब सरकार से बातचीत करेंगे।”

टिकैत ने नेताओं के उनसे मिलने पर कहा “किसान आंदोलन गैर-राजनीतिक रहेगा, किसी राजनीतिक पार्टी को मंच पर चढ़ने नहीं दिया जाएगा। कोई भी पक्ष विपक्ष इसमें वोट तलाश करने की कोशिश न करे। ये आंदोलन पूर्ण रूप से किसान का है। ये आंदोलन गरीब की रोटी तिजोरी में बंद न हो उसका है। किसी राजनीतिक पार्टी का यह आंदोलन नहीं है।”

वहीं किसान नेता नरेश टिकैत ने रविवार को कहा कि नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमा का सम्मान करेंगे, लेकिन वे अपने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। नरेश टिकैत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री ने कहा कि कि सरकार से किसानों की बातचीत में महज ‘‘एक फोन कॉल की दूरी’’ है। टिकैत ने कहा कि सरकार को ‘‘हमारे लोगों को रिहा करना चाहिए और वार्ता के अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए।’’

उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच गाजीपुर सीमा पर से कहा, ‘‘एक सम्मानजनक स्थिति पर पहुंचा जाना चाहिए। हम दबाव में कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।’’ टिकैत ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करेंगे। किसान नहीं चाहते कि सरकार या संसद उनके आगे झुके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किसानों के आत्म-सम्मान की रक्षा हो। बीच का कोई रास्ता खोजा जाना चाहिए। वार्ता होनी चाहिए।’’


टिकैत ने कहा, ‘‘26 जनवरी को हुई हिंसा षड्यंत्र का हिस्सा थी। तिरंगा हर किसी से ऊपर है। हम किसी को इसका अपमान नहीं करने देंगे। इसे सहन नहीं किया जाएगा।’’ दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को हुई हिंसा के संबंध में करीब 40 मामले दर्ज किए हैं और 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

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