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कृषि कानूनः आपदा के बहाने अध्यादेश के जरिए कानून लाया गया- रवीश कुमार का पोस्ट, वायरल

रवीश ने सरकार पर आपदा के बहाने अध्यादेश के जरिए कानून लाने का आरोप लगया है। रवीश ने लिखा कि इस बिल का सिर्फ भारत में ही नहीं देश के बाहर भी पंजाब के किसान परिवार इस बिल का विरोश कर रहे हैं।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: November 27, 2020 7:47 AM
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केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों का विरोध नहीं थम रहा है। खासकर पंजाब और हरियाणा के किसान इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इस कानून के खिलाफ पंजाब के हजारों किसान हरियाणा बॉर्डर पर जमा हैं। वे सभी आज दिल्ली की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी सीमाओं पर सुरक्षा बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। इसे लेकर एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट शेयर किया है।

रवीश ने सरकार पर आपदा के बहाने अध्यादेश के जरिए कानून लाने का आरोप लगया है। रवीश ने लिखा कि इस बिल का सिर्फ भारत में ही नहीं देश के बाहर भी पंजाब के किसान परिवार इस बिल का विरोश कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार ने अपने प्राइम टाइम शो का वीडियो शेयर करते हुए लिखा ” पंजाब के किसान मंडी सिस्टम की कमियाँ भी जानते हैं और खुले बाज़ार की भी। पंजाब के गाँवों में एक बंदा खेती करता है और दूसरा कनाडा में भी खेती करता है।”

रवीश ने आगे लिखा “पंजाब के ही किसान हैं जो भारत में कई राज्यों और दुनिया के कई देशों में खेती करते है, फिर भी वे कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। भारत ही नहीं भारत के बाहर भी पंजाब के किसान परिवार इस बिल के विरोध में हैं जबकि उन्हें दुनिया का भी पता है। देश का किसान बीस साल से खुले बाज़ार को भी देख रहा है। वो क्यों घूम फिर कर मंडी की तरफ़ लौटता है? क्यों न्यूनतम समर्थन मूल्य और लागत से ढाई गुना दाम माँग रहा है? कब तक नहीं दिया जाएगा ? आपदा के बहाने अध्यादेश के ज़रिए क़ानून लाया गया। फिर जो राज्य सभा में हुआ उसे सबने देखा। और अब, किसान दिल्ली न आ सकें इसके लिए सड़कों को खोदा जा रहा है। कमाल है न।”

रविश के इस पोस्ट पर यूजर्स बे भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। रामसिंह बमणावत रैणी नागॅल नाम के एक यूजर ने लिखा “कोई माफी मांगकर वीर हो गया, कोई सलवार पहनकर अमीर हो गया, कोई लाखो का शूट पहनकर भी फकीर हो गया, बेचारा किसान मेहनत करके भी गरीब हो गया।”

एक अन्य यूजर ने लिखा “यही पुलिस दिल्ली दंगो को फैलने रोक नहीं पा रही थी, कई विदेशी संस्थाएं तक दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाती रही है। और इसी पुलिस ने किसान आंदोलन में लाखो किसानों पर रबर बुलेट से फायरिंग करते हुए दिल्ली में घुसने तक नहीं दिया था, आज फिर से वही स्थिति है। कमाल की बात ये है कि जो पुलिस लाखो किसानों को बॉर्डर पर ही रोक सकती है वो दिल्ली दंगो में 3 दिन तक कोई भी कदम तक नहीं उठा पाती। कमाल का ड्रामा चल रहा है देश में।”

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