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यूरोपीय संघ में रहें या नहीं, ब्रिटेन में रायशुमारी शुरू

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने या बाहर निकलने को लेकर मतदान शुरू हो गया है। इस एतिहासिक जनमत संग्रह के चलते ब्रिटेन का भविष्य एक अहम मोड़ पर है।

Author लंदन | June 24, 2016 00:57 am
(File Pic)

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने या बाहर निकलने को लेकर मतदान शुरू हो गया है। इस एतिहासिक जनमत संग्रह के चलते ब्रिटेन का भविष्य एक अहम मोड़ पर है। इस रायशुमारी से यह फैसला होगा कि ब्रिटेन 28 देशों के संगठन में रहेगा या इससे अलग हो जाएगा।

यूरोपीय संघ में बने रहने और इससे बाहर निकलने के समर्थन में चले दोनों तरह के अभियानों ने बड़ी संख्या में लोगों को लुभाया और करीब 4.6 करोड़ लोग इसके लिए मतदान कर रहे हैं, जिनमें 12 लाख भारतीय मूल के ब्रिटेन के नागरिक हैं। प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने यूरोपीय संघ में बने रहने की अपील की और ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) से जुड़े अभियान के झूठ को खारिज किया।

प्रधानमंत्री ने अपनी पत्नी सामंता के साथ वेस्टमिंस्टर के एक मतदान केंद्र में वोट डाला, जो उनके डाउनिंग स्ट्रीट कार्यालय से कुछ ही दूरी पर है, जहां से वह इसके नतीजे पर नजर रखेंगे। कैमरन ने कल बरमिंघम में समर्थकों से कहा, ‘तथ्य यह है कि यदि हम बाहर निकलते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और यदि बने रहते हैं तो यह मजबूत होगी।’

गौरतलब है कि रायशुमारी में दोनों पक्षों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत दिया गया है। ब्रिटेन में इस जनमत संग्रह में रेकार्ड चार करोड़ 64 लाख 99,537 लोग हिस्सा ले रहे हैं। रायशुमारी से संकेत मिलता है कि बड़ी कंपनियां आम तौर पर यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में हैं जबकि छोटी कंपनियों के बीच राय अलग अलग है क्योंकि 45 फीसद यूरोपीय संघ में बने रहने और 44 फीसद इससे अलग होने के पक्ष में दिखे और 11 फीसद ने कोई मत व्यक्त नहीं किया।

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कल आखिरी मौके पर ब्रिटेन के मतदाताओं से अपील की थी कि यूरोपीय संघ में बने रहने के लिए मत दें, दोनों दुनिया की सर्वश्रेष्ठ संभावनाओं का फायदे को न जाने दें। इधर लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉन्सन जो ब्रेक्जिट के समर्थक हैं और भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखे जा रहे हैं, ने यूरोपीय संघ से बाहर निकलने पर जोर दिया।

ब्रिटेन में आव्रजन हाल में प्रमुख मुद्दा रहा है और इस पर देश बंटा हुआ है। ब्रिटेन के इतिहास में यह तीसरा राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह है जो यूरोपीय संघ में बने रहने या इससे बाहर निकलने से जुड़े चार महीने के संघर्ष के बाद हो रहा है। जनमत संग्रह के मतपत्र में लिखा है, ‘ब्रिटेन को यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहना चाहिए या बाहर निकल जाना चाहिए?’

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