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Delhi University Admission 2016: डीयू में दाखिले का बचा है मौका

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक तरफ पढ़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी सत्र के लिए दाखिले के आवेदन मांगे जा रहे हैं।
Author नई दिल्ली | July 25, 2016 01:24 am
(Express Photo)

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक तरफ पढ़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी सत्र के लिए दाखिले के आवेदन मांगे जा रहे हैं। जी हां सही समझे आप, डीयू में स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रमों में बची सीटों पर दाखिले के लिए आवेदकों को दोबारा आावेदन करना पडेÞगा। डीयू ने कहा है कि वे आवेदक जो कटआॅफ के मुताबिक अंक नहीं ला पाए और दाखिला लेना चाहते हैं, वे कॉलेजों में बची सीटों का ब्योरा लें। एडमिशन पोर्टल पर जाएं और दोबारा आॅनलाइन आवेदन करें। इसके बाद कॉलेज प्राप्त आवेदनों की मेरिट निकालेंगे और बची सीटों पर दाखिला देंगे। डीयू अब अगली कटआॅफ जारी नहीं करेगा।
डीयू ने इस साल पांच कटआॅफ लिस्ट निकाली है, जबकि पिछले साल 12 कटआॅफ आई थीं। सीटें अभी भी खाली हैं और अब दाखिला पूरी तरह कॉलेजों के मातहत चला गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के डिप्टी डीन (छात्र कल्याण) के मुताबिक, विश्वविद्यालय में दाखिला प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। पूर्व आवेदक दोबारा आवेदन करें। सोमवार को भी दाखिले होंगे, लेकिन कटआॅफ से नहीं, आवेदकों की मेरिट से। यह मेरिट कॉलेज तय करेगा।

विश्वविद्यालय इसे प्रगतिशील निर्णय बता कर दावा कर रहा है कि यह पारदर्शी फैसला है। इससे दाखिले की प्रक्रिया जोकि पिछले साल तक लंबी खिंच जाया करती थी, वो भी खत्म होगी, लेकिन हालात कमोबेश इससे इतर हैं और छात्रों में उलझन है। कॉलेजों का दखल बढ़ने से उन्हें लग रहा है कि सरदर्दी भी बढ़ेगी। साथ ही विश्वविद्यालय के हाथ खींचने वाले इस निर्णय ने केंद्रीकृत दाखिले की संकल्पना पर बट्टा लगा दिया है। दूसरा इस निर्णय से डीयू की बची चंद सीटों के लिए दोबारा आवेदन की होड़ भी शुरू हो सकती है। डीयू में पढ़ने की चाह रखने वाले छात्रों की संख्या अभी भी करीब पौने दो लाख है, जिन्हें ऊंची कटआॅफ के कारण दाखिला नहीं मिल सका है। दूसरी समस्या कटआॅफ में एक समान फीसद वालों को लेकर हो सकती है, जिस पर कॉलेज भी उहापोह में हैं। ऐसी स्थिति में कुछ छात्र लॉटरी निकालने के पक्ष में हैं तो कुछ उम्र के हिसाब से प्राथमिकता तय करने के पक्ष में।

इस कड़ी में डीयू से जुड़े कॉलेजों में मेरिट सिस्टम से दाखिले में अगर एक समान फीसद वाले सीटों से ज्यादा आवेदन आए तो दाखिले के लिए लॉटरी निकाली जा सकती है। दरअसल कॉलेज में मेरिट सिस्टम में जितनी सीटें होंगी, उतने ही दाखिले होने है। अगर दस सीटों पर एक जैसे फीसद वाले दस से अधिक छात्र आ जाते हैं तो ऐसी स्थिति में कॉलेज को लॉटरी निकालनी पड़ सकती है। इस मामले में रामजस कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हमारे कॉलेज में एक जैसे फीसद वाले छात्र अगर सीटों से ज्यादा आए तो कॉलेज सीधे लाटरी निकालेंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के तहत ऐसी स्थिति में लॉटरी से दाखिला किए जाने का प्रावधान है।

दूसरा तरीका यह है कि आवेदन करने वाले छात्र की उम्र देखी जाए, जिसकी उम्र ज्यादा होगी उसे दाखिले में प्राथमिकता दे दी जाए। बहरहाल डीयू से जुड़े कॉलेजों में पांचवीं कटआॅफ के आधार पर दाखिला लेने का आखिरी मौका अब खत्म हो चुका है। खाली सीटों का ब्योरा कॉलेजों की वेबसाइटों पर भी घोषित किए जाने वाला है। कॉलेजों की ओर रजिस्ट्रेशन के लिए तीन दिन दिए जाएंगे। उसके अगले दो दिनों तक कॉलेजों में दाखिले होंगे, जिसमें दस्तावेजों की जांच के बाद दाखिले की स्लिप मिलेगी। इसके आधार पर छात्रों को पोर्टल पर जाकर आॅनलाइन दाखिले की फीस भी जमा करनी होगी। इन सबके लिए बची सीटों की जानकारी छात्रों के लिए सबसे अहम है।

डीयू ने दावा है सभी कॉलेजों ने कि शनिवार को ही बची सीटों का ब्योरा अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। मसलन शनिवार तक लेडी श्रीराम कॉलेज की वेबसाइट ईसीए कोटे से दाखिला लेने वालों की सूची तो दिखा रही थी, लेकिन बची सीटों की जानकारी नदारद थी। आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज (एएनडीसी) वार्ड कोटे से दाखिले की जानकारी दे रहा था, लेकिन कॉलेज की बची सीटों का ब्योरा गायब था।

मिरांडा हाउस ने अपनी वेबसाइट पर नवागंतुकों के लिए कार्यशाला, ईसीए और वार्ड कोटे से दाखिले, दिव्यांग कोटे की जानकारी दे रखी थी, लेकिन कॉलेज में बची सीटों की संख्या कितनी है और छात्र किस-किस विषय में आवेदन करें, यह नहीं बताया? यहीं हाल हिंदू कॉलेज, कालिंदी कॉलेज और रामानुजन कॉलेज का भी है। जब बची सीटों की जानकारी का यह हाल है तो दाखिले की मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। डीयू की बेवबसाइट में मेरिट दाखिले की अहम जानकारी गायब है।

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