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पुल ढहने की घटना की न्यायिक जांच होगी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने महाड़ में पुल गिरने की घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया है। इस मुद्दे पर राज्य विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी।

Author महाड़ (महाराष्ट्र) | August 5, 2016 05:34 am

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने महाड़ में पुल गिरने की घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया है। इस मुद्दे पर राज्य विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी।’ रायगढ़ जिले में अंग्रजों के जमाने के एक पुल के ध्वस्त हो जाने के कारण सावित्री नदी में बह गई दो बसों और कुछ अन्य वाहनों से गुरुवार को पांच शव बरामद किए गए हैं। साथ ही लापता वाहनों का पता लगाने के लिए बचाव कार्यकर्ताओं ने 300 किलोग्राम का चुंबक नदी में डाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आइआइटी विशेषज्ञों के एक दल को गुरुवार को घटनास्थल पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि पुराने पुलों की संरचनात्मक आॅडिट के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि प्रारंभिक संरचनात्मक आॅडिट भी कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री को पुल की जर्जर स्थिति के बारे में शिकायत मिली थी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार को तलाशी अभियान का दायरा बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक शव दुर्घटनास्थल से 100 किलोमीटर की दूरी पर मिला है, जिससे ये पता चलता है कि तलाशी अभियान का दायरा बढ़ाए जाने की जरूरत है। विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र ने लापरवाही बरती, जिसके परिणामस्वरूप यह घटना हुई। मुंबई से करीब 170 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले में महाड़ के नजदीक मुंबई-गोवा राजमार्ग पर मंगलवार को एक पुराने पुल के ध्वस्त हो जाने के बाद लापता लोगों का पता लगाने के अभियान में नौसेना और तटरक्षक के जवान लगे हुए हैं। बह गई दो बसों में करीब 22 लोग सवार बताए गए हैं।

रायगढ़ जिला के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय पाटिल ने बताया, ‘तीन शव बरामद कर लिए गए हैं। एक शव एक पुरुष का है जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह दोनों बसों में से एक बस का चालक है। दूसरा शव एक महिला का है।’ उन्होंने बताया कि तीसरा शव भी बरामद किया गया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह पुल गिरने के कारण हुए हादसे का शिकार है या नहीं। उन्होंने बताया कि शवों को दुर्घटनास्थल से करीब 50-60 किलोमीटर दूर नदी से निकाला गया है। इससे पहले खबर आई थी कि सघन तलाशी के दौरान बुधवार को दो शव बरामद किए गए। हालांकि बाद में जिला पुलिस ने स्पष्ट किया कि बुधवार रात तक कोई शव बरामद नहीं किया गया।

एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि चुंबक में कुछ फंसा है जिसे नदी से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि नौसेना के गोताखोरों ने गुरुवार सुबह फिर अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाके में गुरुवार को तटरक्षक के चेतक हेलिकॉप्टर को भी तलाश अभियान में शामिल किया गया है। बुधवार 14 घंटे की सघन तलाश और बचाव अभियान के बावजूद कोई भी जीवित व्यक्ति या शव नहीं मिल सका था।

जिला अधिकारियों के मुताबिक, बसों में से एक रायगढ़ के जयगढ़ से मुंबई की ओर जा रही थी जबकि दूसरी बस राजापुर से बोरीवली (मुंबई) आ रही थी। समझा जाता है कि दो बसों के अलावा, कई अन्य वाहन भी उफनती नदी में बह गए हैं। बुधवार को तलाशी एवं बचाव अभियान में 28 मरीन कमांडो, राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई बल (एनडीआरएफ) के लगभग 100 जवान और तटरक्षक के 25 जवानों को लगाया गया था।
इस बीच, सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी शिवसेना ने इस पुल को सिर्फ तीन महीने पहले दी गई परिचालन की मंजूरी पर सवाल उठाते हुए अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा है, ‘मई में ब्रिटिश कालीन पुल को यातायात पात्रता प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किया गया था।’ शिवसेना ने कहा है कि ब्रिटिश कालीन सभी पुलों की जगह नए पुल बनाए जाने चाहिए। हम तभी कह सकते हैं कि हमने इससे सबक लिया है। पीडब्लूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता (कांग्रेस) राधाकृष्ण विखे पाटिल समेत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने बुधवार को महाड़ में घोषणा की कि सरकार राज्य में सभी पुराने पुलों का एक सुरक्षा आॅडिट करवाएगी।

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