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स्पाइसजेट को अदालत में 579 करोड़ जमा कराने के निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और सन ग्रुप के प्रमुख कलानिधि मारन और उनकी काल एअरवेज को स्पाइसजेट के शेयरों के हस्तांतरण को लेकर उनके विवाद को पंच निर्णय प्रक्रिया से एक साल के अंदर सुलझाने के लिए पंचों की समिति नियुक्त करने को कहा।

Author नई दिल्ली | July 31, 2016 2:59 AM

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और सन ग्रुप के प्रमुख कलानिधि मारन और उनकी काल एअरवेज को स्पाइसजेट के शेयरों के हस्तांतरण को लेकर उनके विवाद को पंच निर्णय प्रक्रिया से एक साल के अंदर सुलझाने के लिए पंचों की समिति नियुक्त करने को कहा। इसके साथ ही अदालत ने स्पाइसजेट को 12 महीने में अदालत में 579 करोड़ रुपए की राशि जमा कराने का निर्देश भी दिया है। मारन और उनकी विमानन कंपनी ने मांग की है कि स्पाइसजेट की खरीद-बिक्री के 2015 के समझौते (एसपीए)के अनुसार उन्हें इस एअरलाइन के शेयर वारंट जारी किए जाएं। इसी एसपीए के आधार पर कम किराए वाली इस विमानन कंपनी के स्वामित्व का हस्तांतरण इसके सह-संस्थापक अजय सिंह को किया गया था। मारन और उनकी कंपनी की याचिका में आरोप लगाया गया कि स्पाइसजेट को करीब 579 करोड़ रुपए भुगतान करने के बावजूद विमानन कंपनी ने उन्हें शेयर वारंट या परिवर्तनीय भुनाने योग्य तरजीही शेयर की पहली और दूसरी किस्त जारी नहीं की। उनका यह भी कहना है कि उनकी ओर से दी गई राशि से स्पाइसजेट के सांविधिक बकायों का भुगतान भी नहीं किया गया जिसके कारण उनके खिलाफ मुकदमे खड़े हो गए हैं।

न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने स्पाइसजेट को निर्देश दिया कि वह पांच किस्तों में दिल्ली हाई कोर्ट के पंजीयक के नाम 579 करोड़ रुपए की सावधि जमा कराए। इसकी पहली किस्त अगस्त में जमा करानी होगी। अदालत ने कहा है कि स्पाइसजेट के शेयर किसी तृतीय पक्ष को जारी करने या हस्तांतरित करने पर रोक का अंतरिम आदेश अभी बरकरार रहेगा।

इससे पहले बाजार नियामक सेबी ने मारन और उनके काल एअरवेज के पक्ष में वारंट जारी करने के स्पाइसजेट के निदेशक मंडल के पारित प्रस्ताव को मंजूरी देने में अक्षमता जाहिर की थी। निदेशक मंडल का प्रस्ताव अदालत के निर्देश पर पारित किया गया था। याचिकाकर्ता के दावे के अनुसार स्पाइसजेट की खरीद-बिक्री के 2015 के समझौते के तहत मारन और काल एअरवेज ने कंपनी में अपने पूरे 35,04,28,758 शेयर (58.46 फीसद हिस्सेदारी) अजय सिंह को हस्तांतरित की थी। उसके अनुसार मारन और काल एअरवेज को स्पाइसजेट को 679 करोड़ रुपए का भुगतान करने के एवज में भुनाने योग्य शेयर वारंट जारी किए जाने थे। यह राशि एअरलाइन कंपनी की परिचालन लागत और उस पर बकाया कर्जों आदि के भुतान पर खर्च की जानी थी।

स्पाइसजेट ने इससे पहले अदालत में कहा था कि इसके स्वामित्व में परिवर्तन इस एअरलाइन के पुनरोद्धार के लिए किया गया था ताकि इस पर 2,000 करोड़ रुपए की देनदारियों का समाधान निकाला जा सके। ये देनदारियां उस समय की थीं जब इसका प्रबंध मारन के हाथों में था। स्पाइस ने दावा किया है कि उसने एक-एक पैसे का उपयोग परिचालन खर्च और देनदारी निपटाने पर किया है।

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