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कोरोना: ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में हाहाकार, बत्रा अस्पताल ने नए मरीजों को भर्ती लेने से किया मना

बत्रा अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि उस दिन जब बीस जानें गईं, हम साक्षात नरक देख रहे थे। हमने मुख्यमंत्री को कॉल लगाई, एडीशनल हेल्थ सेक्रेटरी को कॉल लगाई दूसरे अफसरों को कॉल लगाई। इनमें से आधे लोगों ने तो फोन ही नहीं उठाया और जिन्होंने उठाया भी वे मदद नहीं कर सके। जिज्ञासा सिन्हा की रिपोर्ट।

corona, oxygenदेश में कोविड मरीजों के बीच ऑक्सीजन की भारी मांग है। (फोटो-पीटीआई)।

बत्रा अस्पताल ने मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया है। दिल्ली के इस प्रमुख अस्पताल में विगत दिवस ऑक्सीजन के अभाव में 12 मरीजों ने दम तोड़ दिया था। मरने वालों में अस्पताल के एक विशेषज्ञ डॉक्टर भी थे। एक दिन पहले मालवीय नगर स्थित बच्चों के अस्पताल रेनबो ने ऑक्सीजन के लिए त्राहिमाम संदेश जारी किया था। अस्पताल ने कहा था कि उसके यहां 25-30 नवजात शिशु हैं। ऑक्सीजन के अभाव में उनका जीवन संकट में पड़ सकता है।

हालात, इस कदर बिगड़ चुके हैं कि एक अस्पताल के डॉक्टर ने अवसादग्रस्त होकर आत्महत्या कर ली। वह कोविड मरीजों का इलाज करता था। कहते हैं कि वह मरीजों को दम तोड़ते देख विचलित हो गया था। ऐसे वीडियो भी सोशल मीडिया में पड़े हैं जिनमें डॉक्टर अपनी असहायता का बयान करते-करते भावुक हो जाते हैं। देश की राजधानी में ऑक्सीजन की किल्लत से पस्त अनेक अस्पताल हैं। इनमें छह तो ऐसे हैं जिनमें कुछ घंटों की ऑक्सीजन ही बची है। ऐसे अस्पतालों में दो बच्चों के अस्पताल हैं। जयपुर गोल्डन अस्पताल है भी ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहा है, जिसमें पिछले सप्ताह 20 मरीजों का ऑक्सीजन के कम दबाव के कारण दम घुट गया था।

इस सूची में दक्षिण-पूर्व दिल्ली का विम्हान्स और ट्राइटन, द्वारका का आकाश और दक्षिण दिल्ली का सीताराम भाटिया अस्पताल भी शामिल है। इनमें से कुछ को दिल्ली सरकार ने इमरजेंसी आधार पर ऑक्सीजन प्रदान की। बाकी को अंतिम क्षणों में ऑक्सीजन मिल पाई। बत्रा अस्पताल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ सुधांशु बांकटा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमने मरीजों को बता दिया है और यह बात लिखकर टांग दी है कि हम नए मरीज नहीं भर्ती कर रहे। साथ ही सरकार को भी इत्तला कर दिया है कि हम ऑक्सीजन की सीमित सप्लाइ के कारण काम नहीं कर सकते।

बत्रा अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि उस दिन जब बीस जानें गईं, हम साक्षात नरक देख रहे थे। हमने मुख्यमंत्री को कॉल लगाई, एडीशनल हेल्थ सेक्रेटरी को कॉल लगाई दूसरे अफसरों को कॉल लगाई। इनमें से आधे लोगों ने तो फोन ही नहीं उठाया और जिन्होंने उठाया भी वे मदद नहीं कर सके। हमें 7-8 हजार लीटर ऑक्सीजन मिलनी थी। संकट शुरू हुआ तब हमारे पास ढाइ हजार लीटर थी लेकिन वह भी खत्म हो गई। दोपहर 12 से सवा एक तक हमारे पास एक बूंद ऑक्सीजन नहीं थी। डॉक्टर ने कहा कि हादसे में मरने वालों के अलावा बचने वाले मरीजों को भी ऑक्सीजन न मिलने के कारण दीर्घकालीन समस्याएं हो सकती हैं।

अस्पताल में इस वक्त 327 मरीज भर्ती हैं। कोशिश हो रही है कि यह संख्या 200-220 के बीच ले आई जाए। इसके लिए बाकी मरीजों को डिस्चार्ज करना होगा। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। यह काम दो अन्य अस्पताल पहले ही कर चुके हैं। ये थे जीटीबी और आरजीएसएस अस्पताल। इनके यहां ऑक्सीजन की कमी थी तो इन्होंने कोविड मरीजों के लिए निर्धारित बेड्स की संख्या कम कर दी। ऑक्सीजन के लिए केंद्र के साथ अदालत तक में मोर्चा ले रही दिल्ली सरकार भी ऑक्सीजन की कमी से त्रस्त है। राज्य के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार हजार बेड्स के अस्थायी अस्पताल तुरंत खोलने में सक्षम है लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा।

दिल्ली सरकार का कहना है कि जब से संकट शुरू हुआ है तब से अब तक उसे एक बार भी दैनिक कोटे की 490 टन ऑक्सीजन नहीं मिली है। सरकार मानती है कि कई अस्पताल मरीजों को मना करने पर मजबूर हो रहे हैं। न केवल सरकार के पास वरन् सोशल मीडिया में भी त्राहिमाम संदेश भेजते रहते हैं।

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