घोटाले का सिलसिला… मलिन हुई देवभूमि

ये निजी विश्वविद्यालय प्रदेश में अरबों का छात्रवृति घोटाला भी कर चुके हैं। मामला सीबीआइ के अधीन है। जिस प्रबंधन ने ये छात्रवृति घोटाला किया, वे कहीं चले गए हैं।

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सांकेतिक फोटो

ओमप्रकाश ठाकुर

देवभूमि घोटालों की भूमि भी बनती नजर आ रही है। हाल ही में जिला सोलन के निजी विश्वविद्यालय मानव भारती विवि में हजारों फर्जी डिग्रियां मिली हैं। अब हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षा नियामक आयोग ने विवि अनुदान आयोग से आग्रह किया है कि इंडस इंटरनेशनल में पढ़ा रहे चार शिक्षकों की डिग्रियां रद्द की जाएं। आयोग ने इसके अलावा प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को इस मामले में मामला दर्ज करने का आग्रह किया है और इस निजी विवि पर तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यही नहीं इस विवि के उप कुलपति की डिग्री को लेकर भी संदेह जताया गया है।

प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की ओर से जाली डिग्रियां बेचने का धंधा एक अरसे से सुर्खियों में है। कानून में प्रावधान है कि अगर कोई विशविविद्यालय फर्जी डिग्री मामले में घिरा पाया जाता है तो उसकी पूरी संपति का सरकार अधिग्रहण कर सकती है। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस दिशा में आज तक कोई कदम नहीं उठाया है। यही नहीं ये निजी विश्वविद्यालय प्रदेश में अरबों का छात्रवृति घोटाला भी कर चुके हैं। मामला सीबीआइ के अधीन है। जिस प्रबंधन ने ये छात्रवृति घोटाला किया, वे कहीं चले गए हैं।

उनकी जगह कोई और मालिक व प्रबंधन आ गया है। साफ है धंधा जारी हैं। पिछली सरकार में प्रदेश के एक बड़े नेता के रिश्तेदार का बेटा जाली प्रमाणपत्र के दम पर पर्यटन विकास निगम में सहायक प्रबंधक के पद पर तैनात हो गया था। उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और बड़ी जद्दोजहद के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त करना पड़ा।

जाली डिग्रियों को लेकर तो यह देवभूमि बदनाम हो ही चुकी है, अब दवा की आड़ में नशे की दवाओं के कारोबार करने का मामला पुलिस की पकड़ में आया है। सोलन जिले के तहत औद्योगिक स्थल बद्दी को देश में दवा हब के नाम से जाना जाता हैं। यहीं पर कम से कम सौ करोड़ की नशे की दवाओं की खेप अन्य राज्यों को अवैध तौर पर भेज दी गई है। इस कारोबार में पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा है। लेकिन असली मछलियां कौन है इस बाबत प्रदेश पुलिस खामोश है। जाहिर है कि दो लोग इतना बड़ा अवैध कारोबार नहीं कर सकते। जाहिर है, यह धंधा लंबे अरसे से चल रहा होगा।

यही नहीं, पुलिस के धनशोधन निरोधक प्रकोष्ठ ने खनन मािफया के जाल को ध्वस्त करने का भी दावा किया है। इस तरह के तीन मामलों में 20 आरोपियों की करीब तीन करोड़ की संपति की जांच की गई है और जांच रपट को प्रवर्तन निदेशालय के साथ साझा किया गया है। जाहिर है, यह धंधा भी एक अरसे से चल रहा होगा।

मजे की बात है कि राजधानी में सरकार की नाक के नीचे शराब के ठेकेदार ने शराब के परमिट में जालसाजी कर सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया है। आबकारी व कराधान विभाग एक अरसे से जांच भी कर रहा है लेकिन यह पता नहीं कि किसके दबाव में यह जांच धीमी गति पकड़ लेती है।

जाहिर है कि इस तरह के धंधों ने देवभूमि को बुरी तरह से बदनाम कर दिया है लेकिन सरकारी और उसकी एजंसियों की ओर से कोई कारगर कदम ही नहीं उठाए जा रहे हैं।

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