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DU Admission: केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाम स्थानीय आरक्षण!

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिले में आरक्षण की केंद्रीय मंत्री विजय गोयल की मांग को भाजपा ही मानने को तैयार नहीं है।

Author नई दिल्ली | July 9, 2016 1:15 AM
(express Pic)

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिले में आरक्षण की केंद्रीय मंत्री विजय गोयल की मांग को भाजपा ही मानने को तैयार नहीं है। लेकिन पूर्वांचल के प्रवासियों (बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के मूल निवासियों) के एकतरफा समर्थन के बूते दिल्ली में प्रचंड बहुमत लाने वाली आम आदमी पार्टी(आप) के नेताओं ने वही लाइन पकड़ ली है। पहले दूसरे नेता यह भाषा बोलते थे अब तो खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इसे भी जबरन केंद्र सरकार से लड़ाई का एक मुद्दा बनाने में लगे हैं।

दिल्ली में दाखिला लेने वालों की तादात लगातार बढ़ने से ही दिल्ली की सराकर ने पहले गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ और फिर डॉक्टर भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना की। उनके कॉलेजों की संख्या तो दिल्ली सरकार को ही बढ़ानी है। केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आने पर 20 नए कॉलेज शुरू करवाने के वादे किए थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के नए कॉलेजों को मान्यता देकर चलवाने पर हाथ खड़ा करने पर ही दिल्ली सरकार ने नए विश्वविद्यालय शुरू किए। डीयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इसमें दाखिला देने से किसी छात्र को कैसे रोका जा सकता है। पूर्व सांसद महाबल मिश्र कहते हैं, ‘आज दाखिले में आरक्षण की बात की जा रही है। कल दिल्ली में दूसरे राज्यों के लोगों के आने पर पाबंदी की मांग उठाई जाएगी’।

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दिल्ली भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को किसी राज्य में समेट कर कैसे रखा जा सकता है। वे मूल सवाल उठाते हैं कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़े, उनके बच्चे यहां पढ़े, अच्छी पढ़ाई हो रही है तो उनके रिश्तेदार को दाखिला लेने से कैसे रोका जा सकता है। उनका मानना है कि दाखिले के औसत ज्यादा होने से दाखिला लेने में कठिनाई तो आ रही है। लेकिन उसका समाधान नए कॉलेज खोलने से होगा न कि दाखिले में दिल्लीवाले छात्रों के लिए आरक्षण करने से।

ऐसा तो है नहीं कि किसी को दाखिला पाने वाले छात्रों की जांच-पड़ताल करने से एतराज है। विजय गोयल तो पिछले कई सालों से दिल्ली वाले छात्रों को आरक्षण देने की मांग करते रहे हैं। उनकी इस मांग का उनका ही पार्टी के नेता समर्थन नहीं करते हैं।इस मुद्दे पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि विजय गोयल का दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षण की मांग करना उनका निजी मत है, पार्टी का नहीं। उनके मुताबिक, तो दिल्ली सरकार को दिल्ली की बढ़ती आबादी और अपने घोषणा पत्र का हिसाब से नए कॉलेज शुरू करने चाहिए थे। कॉलेजों में सीटें बढ़वानी चाहिए थी। केजरीवाल सरकार ने किसी नए कॉलेज के लिए जमीन लेने के लिए डीडीए में आवेदन नहीं किया है। वे बेवजह चर्चा में बने रहने के लिए नए मुद्दे खोजते रहते हैं। बिहार मूल के कांग्रेस नेता और पश्चिमी दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्र का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय है।

उसपर जितना हक दिल्लीवालों का है उतना ही दूसरे राज्यों का है। इस बेतुकी मांग को अगर गंभीर मान लिया गया तो कल को दिल्ली में दूसरे राज्यों के लोगों के आने पर पाबंदी की मांग उठाई जा सकती है। केजरीवाल सरकार को नए कॉलेज खोलने से कौन रोक रहा है। वे सस्ती लोकप्रियता के लिए यह मांग उठा रहे हैं।माना जा रहा है कि सालों सत्ता से भाजपा दूर ही इसलिए रही है कि कभी विजय गोयल तो कभी कोई और नेता बाहर से आकर दिल्ली में रहने वाले प्रवासियों को निशाना बनाते रहे हैं। यह सभी को पता है कि दिल्ली के मूल निवासी तो थोड़े से गांव के लोग हैं जो अब अल्पमत में हैं। उसके बाद तो अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों से लोग आकर दिल्ली में बसते रहे हैं। देश के विभाजन के साथ बड़ी तादात में पाकिस्तान से शरणार्थी आए।

तभी तो सौ साल में दिल्ली चार लाख से दो करोड़ से ज्यादा की बन गई। दिल्ल की की आबादी में प्रवासियों की तादात अब इतनी हो गई है कि उनके बिना समर्थन के दिल्ली की सत्ता पाई ही नहीं जा सकती। 70 विधानसभा सीटों में 41 सीटों पर पूरबिए 20 से 50 फीसद तक हैं। कोई भी विधानसभा की सीट ऐसी नहीं है जहां दस फीसद से कम प्रवासी हों। 2013 के विधानसभा चुनाव में इन मतदाताओं का झुकाव आम आदमी पार्टी की ओर हुआ। 2015 के चुनाव में तो पूर्वांचल के प्रवासियों का तो एकतरफा वोट आप को मिला। तभी उन्हें 67 सीटें मिलीं। अब आप नेताओं को वे और उनके रिश्तेदार आंख की किरकिरी लग रहे हैं।
केजरीवाल अगर आरक्षण के मुद्दे को दिल्लीवाला बन कर उठा रहे हैं तो उसके साथ उनके नए कॉलेज खोलने आदि से जुड़े तमाम सवाल उठने लगेंगे और प्रवासियों को उनसे जोरदार झटका भी लगने लगेगा।

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