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यूपी चुनाव से पहले गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में नया केस दर्ज, 40 से छापा; अखिलेश का रहा है ड्रीम प्रोजेक्ट, कई करीबी आरोपी भी

राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सोमवार को कई राज्यों में करीब 43 जगहों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया।

गोमती रिवरफ्रंट परियोजना में अनियमितताओं के संबंध में नया मामला दर्ज किया, 40 से अधिक जगहों पर तलाशी। (express file photo)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में कथित अनियमितताओं के संबंध में एक नया मामला दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश में पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान परियोजना संचालित हुई थी। राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सोमवार को कई राज्यों में करीब 43 जगहों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया।

अधिकारियों ने कहा कि सुबह शुरू हुआ तलाशी अभियान अभी चल रहा है और आज जारी रह सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिकी में करीब 189 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है जिनमें बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश सरकार के अभियंता तथा अन्य अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई ने उक्त परियोजना के सिलसिले में यह दूसरी प्राथमिकी दर्ज की है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि यह घोटाला पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार की हरकतों को जाहिर कर रहा है।

सीबीआई द्वारा की जा रही छापेमारी के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने संवाददाताओं से कहा, “हमने सीबीआई से पहले भी अनुरोध किया है कि ऐसे घोटालों की जांच तेजी से की जाए। सीबीआई केंद्र की एजेंसी है और अपने तरीके से कार्य कर रही है। गोमती रिवरफ्रंट घोटाले में 16 इंजीनियर और 173 ठेकेदारों के घरों पर छापेमारी हो रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया, “गोमती रिवरफ्रंट का घोटाला अखिलेश सरकार की करतूतों को चीख-चीख कर बता रहा है। सीबीआई सात राज्यों और 40 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सीबीआई अपना काम कर रही है।”

सीबीआई ने गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के सिलसिले में यह दूसरी प्राथमिकी दर्ज की है। रिवरफ्रंट परियोजना उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में बनी थी। घोटाले के मामले में 19 जून 2017 को गौतमपल्ली थाने में 8 के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया था। इसके बाद नवंबर 2017 में भी ईओडबल्यू ने भी जांच शुरू कर दी थी।

दिसंबर 2017 में मामले की जांच सीबीआई के पास चली गई और सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। दिसंबर 2017 में ही आईआईटी की टेक्निकल जांच भी की गई। इसके बाद सीबीआई जांच का आधार बनाते हुए मामले में ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया। सीबीआई ने यह कार्रवाई ऐसे समय शुरू की है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में महज चंद महीने बाकी रह गए हैं।

अगले साल विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी और मायावती की अगुवाई में बहुजन समाज पार्टी के साथ ही कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को राज्य की सत्ता से हटाने की कोशिश करेंगे।

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