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CAA Protests: कप‍िल म‍िश्रा ने कभी नरेंद्र मोदी को कहा था आईएसआई एजेंट, मां रह चुकी हैं बीजेपी मेयर

Delhi Violence: कपिल मिश्रा ने रविवार को जाफराबाद में चेतावनी दी थी कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को धरने से हटाया जाए, इसके बाद ही दिल्ली में दंगे शुरू हुए थे

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: February 27, 2020 7:01 PM
कपिल मिश्रा पर हाल ही में जाफराबाद में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा। (फोटो-Twitter)

भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा हाल ही के दिनों में दल के कद्दावर नेता के तौर पर उभरे हैं। सीएए विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ भाजपा का चेहरा बन कर खड़े हुए मिश्रा ने लगातार पूरी दिल्ली में सीएए के पक्ष में प्रदर्शन किए हैं। शाहीन बाग और जाफराबाद में जमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों में भी मिश्रा का नाम सबसे पहले आता है। कपिल मिश्रा का भाजपा में यह उभार पिछले कुछ महीनों में ही हुआ है। हालांकि वे राजनीति के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। उनकी मां अन्नपूर्णा मिश्रा भाजपा की तरफ से ही दिल्ली की मेयर रह चुकी हैं। ऐसे में शुरुआत से ही कपिल का रुझान भी राजनीति की तरफ ही रहा। 2015 में पहली बार उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया।

आम आदमी पार्टी में शुरुआती दिनों में ही मिश्रा अपने बयानों को लेकर विवादों में घिरे। दिल्ली सरकार में जल मंत्री रहने के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का एजेंट बता दिया था। उनके इस बयान पर भाजपा के कई बड़े नेताओं ने उन पर निशाना साधा था। बताया जाता है कि मिश्रा ने पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस और मानवाधिकार संस्था अम्नेस्टी इंटरनेशनल के लिए पब्लिक पॉलिसी कैंपेनर के तौर पर काम किया है।

केजरीवाल के साथ शुरू की थी आम आदमी पार्टीः कपिल मिश्रा कार्यकर्ता के रूप में बिताए गए समय में ही आम आदमी पार्टी के मौजूदा प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिले। तब केजरीवाल इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। अभियान के दौरान उन्होंने 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए किए गए पर्यावरण नियम उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई थी। साथ ही लेबर कानून के उल्लंघन का मामला भी जोर-शोर से उठाया था। केजरीवाल के साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी शुरू की और उसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। पहली बार 2013 में जब वे आप के टिकट पर चुनाव लड़े तो उन्हें हार मिली। हालांकि, 2015 में उन्होंने करावल नगर विधानसभा सीट पर 44,000 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। वे उन कुछ विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने विधानसभा में संस्कृत में शपथ ली थी।

केजरीवाल पर आरोप लगाने के बाद हाशिए पर चले गए मिश्राः कपिल मिश्रा ने 2017 में अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 2 करोड़ रुपए की घूस लेने के बाद जानबूझकर शीला दीक्षित के समय के वॉटर टैंकर स्कैम को दबा दिया। केजरीवाल को इस मामले में सीबीआई और लोकायुक्त दोनों से क्लीन चिट मिल गई, लेकिन कपिल मिश्रा को कैबिनेट से निलंबित कर दिया गया।

कपिल मिश्रा ने इसके बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘माई पीएम, माई प्राइड’ अभियान शुरू किया। दो साल पहले ही पीएम को आईएसआई एजेंट कहने के बाद मिश्रा का यह यू-टर्न उनकी भाजपा में शामिल होने की कोशिश के तौर पर देखा जाने लगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने खुले तौर पर भाजपा के लिए प्रचार किया, जिसके बाद आप ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। पिछले साल अगस्त में ही उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी।
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