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बंगालः भाजपा विधायकों की सुरक्षा के लिए किए गए जम्मू-कश्मीर जैसे इंतजाम, आतंकियों से बचाने के लिए की जाती थी ऐसी व्यवस्था

अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट और हाल ही में बंगाल गई टीम के इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया है।

बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान भी भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था। (एक्सप्रेस फोटो- शशि घोष)

बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद हुए हिंसा के बाद से केंद्र सरकार बीजेपी विधायकों की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है। बंगाल में सभी 77 बीजेपी विधायकों को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान की जाएगी। ये सुरक्षा जम्मू-कश्मीर में मिली सुरक्षा की तरह ही होगी। कश्मीर में आतंकियों से बचाने के लिए ऐसी सुरक्षा दी गयी थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि 61 विधायकों को ‘एक्स’ कैटेगरी की सुरक्षा दी जाएगी इसके अलावा अन्य विधायकों को ‘वाई’ या अन्य सुरक्षा दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट और हाल ही में बंगाल गई टीम के इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार भाजपा विधायकों को यह सुरक्षा सिर्फ बंगाल में ही मिलेगा। जब वो बंगाल से बाहर रहेंगे तो उन्हें ये लाभ नहीं मिलेंगे।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि 1996 में जम्मू और कश्मीर में जब आतंकवाद अपने चरम पर था तब केंद्रीय सुरक्षा के तहत चुनाव हुए थे। लेकिन उस समय उम्मीदवारों को सुरक्षा चुनाव से पहले दी गयी थी। क्योंकि उस समय आतंकवादियों से उन्हें खतरा था। पंजाब में भी उग्रवाद के चरम के दौरान किसी भी पार्टी के नेताओं को ऐसी सुरक्षा नहीं दी गयी थी।

आदेश में कहा गया है कि एक्स-श्रेणी की सुरक्षा में एक बंदूकधारी चौबीसों घंटे उनकी सुरक्षा में रहेगा। रोटेशन के तहत  तीन या चार सुरक्षा कर्मियों को इसमें शामिल किया जाएगा। केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने कहा कि देश में वीआईपी सुरक्षा के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक राज्य में एक ही पार्टी के सभी निर्वाचित सदस्यों को इस तरह की सुरक्षा दी जा रही है। अब तक ये फैसले खतरों को देखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर दी जाती थी।

बताते चलें कि प्रक्रिया के अनुसार, किसी व्यक्ति को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान करने के दो तरीके हैं – या तो व्यक्ति सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए सरकार से सुरक्षा का अनुरोध करता है तब या सरकार स्वयं सुरक्षा का आकलन कर ऐसा करती है।

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