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सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को राज्य क्रिकेट संघों को फंड नहीं मुहैया कराने का दिया निर्देश, 17 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम और लोढ़ा कमिटी से बीसीसीआइ के शीर्ष पदाधिकारी कौन हो सकते हैं उनकी योग्यता क्या होनी चाहिए इसको लेकर भी सुझाव देने के लिए कहा था।
Author नई दिल्ली | October 7, 2016 16:14 pm
सुप्रीम कोर्ट की ओर गठित लोढ़ा कमिटी के सदस्यों, जस्टिस आरवी रविंद्रन (दायीं ओर) और जस्टिस अशोक भान (बायीं ओर) के साथ जस्टिस आरएम लोढ़ा (बीच में)। (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को लागू करने के मामले में सुनवाई 17 अक्टूबर के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने  इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई  करते हुए बीसीसीआई से राज्य क्रिकेट एसोसीऐशन्स को फंड मुहैया कराने के लिए मना किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब तक राज्य क्रिकेट संघों द्वारा लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता है तब तक बीसीसीआई की तरफ से उन्हें कोई फंड मुहैया नहीं कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 17 अक्टूबर के लिए टाल दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट में पारदर्शिता के लिए बीसीसीआइ से लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को बिना शर्त मानने के लिए कहा था और इस बारे में अंडरटेकिंग देने को कहा था। बीसीसीआइ के वकील कपिल सिब्बल की ओर से समय मांगे जाने पर कोर्ट ने बीसीसीआइ को 24 घंटे का वक्त दिया था। इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम और लोढ़ा कमिटी से बीसीसीआइ के शीर्ष पदाधिकारी कौन हो सकते हैं उनकी योग्यता क्या होनी चाहिए इसको लेकर भी सुझाव देने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बीसीसीआइ के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआइ से सीधे सवाल पूछा था कि आप लोढ़ा कमिटी की सिफारिशें लागू करेंगे या नहीं? सुनवाई के दौरान राज्यों के क्रिकेट एसोसिएशनों द्वारा लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को मानने से इनकार करने पर मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने काफी नाराजगी व्यक्त की थी।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने पूरे बीसीसीआई को सस्पेंड करने और उसकी जगह प्रशासक नियुक्त करने की मांग की, जबकि बीसीसीआई ने कहा कि उसने राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों के बीच 400 करोड़ रुपये के फंड के बंटवारे का जो फैसला लिया है वो उसके रुटीन कामकाज का हिस्सा है। इस दौरान गोपाल सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू को भी काफी खरी-खोटी सुनाई थी। बीसीसीआइ ने काटजू को अपनी ओर से इस केस में नियुक्त किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआइ अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के क्रिकेटर होने के दावे पर भी मजाक किया था। इस मामले में बीसीसीआई की तरफ से वकील कपिल सिब्बल ने अनुराग ठाकुर को गंभीर क्रिकेटर बताया था, जिसपर मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘मैं भी  सुप्रीम कोर्ट की क्रिकेट टीम का कप्तान रह चुका हूं।’

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