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बांग्लादेश की लड़की ने उड़ाया मोदी, हसीना का मजाक, हुई अरेस्ट, जानिए- क्या है पूरा मामला

इससे पहले लेखक मुश्ताक अहमद को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर पिछले साल मई में गिरफ्तार कर लिया गया था। फरवरी में जेल में उनकी मौत हो गई थी। बांग्लादेश के नए डिजिटल सुरक्षा कानून को आलोचकों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने वाला बताया है।

Bangladesh, Teenager arrested, Mocking music video, PM Narendra Modi, PM Sheikh Hasina, Digital Security Actभारत के पीएम नरेंद्र मोदी का स्वागत करतीं बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना का मजाक उड़ाने पर एक 19 वर्षीय लड़की रबिउल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश की पुलिस ने बुधवार को यह कार्रवाई सरकार के समर्थक एक युवा नेता की शिकायत पर की। रबिउल को डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट के तहत पकड़ा गया।

न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, लोकल पुलिस चीफ अब्दुल्ला अल-ममून का कहना है कि रबिउल ने अपनी फेसबुक की टाइमलाइन पर एक आपत्तिजनक म्यूजिक वीडियो डाला था। इसमें उसने मोदी और शेख हसीना के फोटो भी इस्तेमाल किए। ध्यान रहे कि हाल ही में बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मोदी वहां गए थे। कट्टरपंथी लोगों ने उनकी यात्रा का विरोध कर हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया था। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मोदी भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से भेदभाव कर रहे हैं।

उधर, ढाका पुलिस का यह भी कहना है कि रबिउल के खिलाफ सरकार की छवि बिगाड़ने की धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें उसे 14 साल तक की सजा हो सकती है। बांग्लादेश के 2018 डिजिटल एक्ट के तहत 14 साल से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को बगैर वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके तहत सरकार की आलोचना पर सैकड़ों लोग पकड़े जा चुके हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले लेखक मुश्ताक अहमद को सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने को लेकर पिछले साल मई में गिरफ्तार कर लिया गया था। फरवरी में जेल में उनकी मौत हो गई थी। अहमद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी मौत किसी असामान्य परिस्थिति की वजह से नहीं हुई। दूसरी तरफ उनके वकीलों ने दावा किया है कि उनहें जेल में प्रताड़ित किया गया। खराब सेहत के बाद भी उन्हें 9 महीने से जेल में रखा गया।

अहमद की जमानत याचिका कम से कम 6 बार नामंजूर कर दी गई थी। बांग्लादेश के नए डिजिटल सुरक्षा कानून को आलोचकों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने वाला बताया है। लेखक की मौत के बाद लोगों ने ढाका में प्रदर्शन भी किए। भीड़ ने ढाका यूनिवर्सिटी परिसर और देश के गृह मंत्रालय की ओर जाने वाली ढाका की सड़कों पर मार्च किया। उनकी मांगों में डिजिटल सुरक्षा कानून को रद्द करने के साथ हाल ही में गिरफ्तार किए गए 7 लोगों को छोड़ना भी शामिल है। इन्हें अहमद की मौत की निंदा करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था।

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