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लखवी की फौरन रिहाई का हुक्म

भारत के शांति प्रयासों पर पानी फेरते हुए पाकिस्तान की एक अदालत ने शुक्रवार को मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी की हिरासत का आदेश निलंबित करते हुए उसकी फौरन रिहाई का हुक्म दिया है। पाकिस्तान के जेल अधिकारियों ने हालांकि लखवी को रिहा करने से इनकार […]
Author March 14, 2015 08:19 am
मुंबई हमले का मास्टरमाइंड लखवी जेल से होगा रिहा (फोटो: एपी)

भारत के शांति प्रयासों पर पानी फेरते हुए पाकिस्तान की एक अदालत ने शुक्रवार को मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी की हिरासत का आदेश निलंबित करते हुए उसकी फौरन रिहाई का हुक्म दिया है। पाकिस्तान के जेल अधिकारियों ने हालांकि लखवी को रिहा करने से इनकार करते हुए कहा कि महज ‘फैक्स से प्राप्त’ अदालत के आदेश के आधार पर उसे रिहा नहीं किया जा सकता। रावलपिंडी की अदियाला जेल के एक अधिकारी ने कहा कि हमने लखवी के वकील से कहा कि हम इस्लामाबाद हाई कोर्ट के फैक्स से मिले आदेश पर उसे रिहा नहीं कर सकते। हमने उनसे (लखवी के वकील से) कहा कि वे अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति लाएं।

इस्लामाबाद हाई कोर्ट (आइएचसी) ने लखवी की हिरासत के खिलाफ उसकी याचिका पर सुनवाई मंजूर की और उसकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए। एक अधिकारी ने यहां बताया कि आइएचसी के जज नुरूल हक कुरैशी ने कानून व्यवस्था बनाने रखने के लिए लखवी की हिरासत के सरकारी आदेश को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए उसकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए।


अदालत के इस आदेश से ‘अति चिंतित’ भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और स्पष्ट तौर पर कहा कि यह सुनिश्चित करना इस्लामाबाद की जिम्मेदारी है कि लखवी जेल से बाहर नहीं आए। कार्यवाहक विदेश सचिव अनिल वाधवा ने बासित को साउथ ब्लॉक तलब किया और अदालती आदेश को लेकर भारत की नाराजगी से उन्हें अवगत कराया। विदेश सचिव एस जयशंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेश यात्रा पर हैं, ऐसे में वाधवा कार्यवाहक विदेश सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान में भी भारतीय उच्चायुक्त के जरिए इस मामले को ‘उच्च स्तर पर उठाया गया’ है।

वाधवा के साथ मुलाकात के बाद बासित ने कहा, लखवी को भले ही जमानत मिल गई हो, लेकिन सुनवाई जारी रहेगी। हम सभी सुनवाई को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने दीजिए।

पाकिस्तान ने अपने उच्चायुक्त को तलब करने के जवाब में इस्लामाबाद में भारतीय उप-उच्चायुक्त जेपी सिंह को विदेश कार्यालय तलब किया गया जहां पाकिस्तानी पक्ष ने 2007 के समझौता ट्रेन धमाका मामले को उठाते हुए कहा कि इसके मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में बहुत देर हो रही है। इस धमाके में कई पाकिस्तानी नागरिकों समेत 68 लोगों की जानें गई थीं। समझा जाता है कि पाकिस्तानी पक्ष ने सिंह से कहा कि सरकार लखवी के मामले में न्यायिक प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती।
अदालत के फैसले पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी एजंसियों ने अदालत में लखवी के खिलाफ मजबूत साक्ष्यों को प्रभावी तरीके से पेश नहीं किया। गृह मंत्रालय ने दिल्ली में कहा कि यह सुनिश्चित करना पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी है कि लखवी की जेल से रिहाई नहीं हो और इसके लिए सभी कानूनी उपायों का वह इस्तेमाल करे।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने लखवी की रिहाई के आदेश के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद इस्लामाबाद ने उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। पाकिस्तान को उस तरीके से आतंकवादियों से निपटना चाहिए जिस तरीके से पूरा विश्व समुदाय कर रहा है। कोई बुरे अथवा अच्छे आतंकवादी नहीं होते, इस तथ्य को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, मुंबई हमले की आपराधिक साजिश में लखवी की भूमिका को साबित करने के लिए पाकिस्तानी एजंसियों ने पाकिस्तान की अदालत में उसके खिलाफ अकाट्य सबूत उचित तरीके से पेश नहीं किए हैं। इसे बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में सूत्रों ने बताया कि संघीय सरकार लखवी को किसी अन्य जन सुरक्षा आदेश के तहत हिरासत में ले सकती है क्योंकि अदालत ने पहले उसकी पूर्व अनुमति के बगैर उसके खिलाफ कोई भी मामला दायर करने पर रोक लगाई थी। उन्होंने बताया, एमपीओ (मेंटिनेंस आॅफ पब्लिक आॅर्डर) के तहत इसी सप्ताह मियाद पूरी कर रहे 30 दिन की हिरासत के आदेश को हाई कोर्ट ने निलंबित कर दिया है। सरकार उसे इसी कानून के तहत किसी ताजा हिरासत आदेश के तहत हिरासत में ले सकती है। यह दूसरी बार है जब आइएचसी ने एमपीओ के तहत लखवी को हिरासत में लिए जाने के सरकारी आदेश को निलंबित किया है। लखवी ने पिछले महीने ही एमपीओ के तहत अपनी ‘नए सिरे से’ हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी थी।

निचली अदालत (आतंकवाद निरोधक अदालत – एक, इस्लामाबाद) ने 18 दिसंबर, 2014 को लखवी को जमानत दी थी। लेकिन अगले ही दिन उसे एमपीओ के तहत हिरासत में ले लिया गया था। बहरहाल, आइएचसी ने ‘कमजोर कानूनी आधार’ पर लखवी की हिरासत को निलंबित कर दिया। लखवी को रावलपिंडी की अडियाला जेल से रिहा किए जाने से पहले उसे 2009 में एक अफगान नागरिक को अगवा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।

बाद में, सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को वहां की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसने सरकार के आदेश को निलंबित करते हुए लखवी की हिरासत को खत्म करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को निलंबित कर दिया। हाई कोर्ट ने आज फिर से 13 फरवरी को लखवी की हिरासत के सरकारी आदेश को निलंबित कर दिया। लखवी और छह अन्य- अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनिस अंजुम को नवंबर 2008 में मुंबई हमलों की साजिश रचने और उसको अंजाम देने के लिए आरोपी बनाया गया। इन हमलों में 166 लोग मारे गए थे।

माना जाता है कि लखवी लश्करे-तैयबा के संस्थापक और जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी रिश्तेदार है। उसे दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था और नवंबर 2009 में उसे 26-11 हमले मामले में छह अन्य के साथ आरोपी बनाया गया था। उसके खिलाफ 2009 से सुनवाई चल रही है। याद रहे, मुंबई हमले के गुनाहगारों की सजा में देरी को लेकर भारत चिंता जताता रहा है। हाल ही में विदेश सचिव जयशंकर ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी के साथ मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाया था।

 

 

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