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व्यक्तित्व: विदेश में हिंदी की अनूठी खुशबू बिखेर रहे युवा

कोहे मुंबई में रहते हैं और वहीं रहकर भारत के बारे में और जान रहे हैं और भारत की संस्कृति के बारे में जापान को बता रहे हैं। उनके वीडियो में देखा जा सकता है कि जापान के लोग भी भारत से उतना ही प्यार करते हैं जितना कि भारत के लोग जापान से।

जापान के वायलिन वादक यूट्यूबर हैं कोहे, जिन्होंने हाल में भारत के प्रति अपने प्यार को अनोखे ढंग से दर्शाया है।

विदेशों में हिंदी की अनूठी खुशबू बिखेरने में जुटे हैं कई युवा। इनमें भारत के शोधार्थी हैं तो जापान में हिंदी में वीडियो तैयार करने वाले यूट्यूबर। जापान के वायलिन वादक यूट्यूबर हैं कोहे, जिन्होंने हाल में भारत के प्रति अपने प्यार को अनोखे ढंग से दर्शाया है। उनकी इस अनूठी पहल को भारतीय काफी पसंद कर रहे हैं। जापान के लोग भारत को कितना पसंद करते है, वह इस यूट्यूबर के जुनून से पता चलता है। वायलिन वादक हिंदी भाषा और भारत की संस्कृति से इतना प्यार करते हैं कि अब यहीं बस गए हैं। उन्होंने यहां आकर हिंदी सीखी और आज की तारीख में वे बेहतरीन हिंदी बोलते हैं।

कोहे यूट्यूब पर अपने चैनल ‘वॉयलिनिस्ट कोहे’ में लोगों के मनोरंजन के लिए काफी मजेदार वीडियो डालते रहते हैं। उनकी वीडियो अक्सर हिंदी में होती हैं। जापान जाकर भी वह हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को लेकर ही अपने वीडियो बनाते हैं। कोहे को भारत के मशहूर संगीतकार एआर रहमान काफी अच्छे लगते हैं।

कोहे मुंबई में रहते हैं और वहीं रहकर भारत के बारे में और जान रहे हैं और भारत की संस्कृति के बारे में जापान को बता रहे हैं। उनके वीडियो में देखा जा सकता है कि जापान के लोग भी भारत से उतना ही प्यार करते हैं जितना कि भारत के लोग जापान से। उनके यूट्यूब चैनल को 16.5 लाख लोगों ने सब्सक्राइब किया है और इंस्टाग्राम में करीब 42.1 हजार से भी ज्यादा लोगों ने उन्हें फॉलो किया हैं।

मुंबई के साथ आगरा में हिंदी के कुछ शोधार्थी अनूठ काम में जुटे हैं। वे लोग विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में जुटे लोगों को योगदान से लोगों को रूबरू कराने के अभियान में जुटे हुए हैं। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआइ) के कई शोधार्थी इस अभियान में जुटे हैं। केएमआइ बीते पांच साल से लगातार प्रवासी साहित्यकारों को अपने विश्वविद्यालय से जोड़ भी रहा है।

वहां की शोधार्थी मोहिनी दयाल के शोध कार्य का विषय ‘अमेरिका की प्रवासी महिला रचनाकारों के साहित्य में प्रवासी’ है। मोहिनी बताती हैं कि वह केएमआइ में आने वाले प्रवासी साहित्यकारों से बहुत प्रभावित हुर्इं और यह विषय चुना है। शोधार्थी आरती चतुर्वेदी का विषय ‘सुरेश चंद्र शुक्ल – शरद आलोक- : व्यक्ति और रचनाकार’ है। उन्होंने बताया कि सुरेश चंद्र शुक्ल नार्वे के ओस्लो शहर में 40 साल से हिंदी की सेवा कर रहे हैं।

शोधार्थी चारु अग्रवाल के शोध का विषय ‘तेजेंद्र शर्मा की कहानियों में महानगरीय संवेदना के विविध आयाम’ है। उन्होंने बताया कि तेजेंद्र शर्मा अपने कथा साहित्य के माध्यम से हिंदी साहित्य जगत में पाठकों के सामने नए विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। अंजू सिंह के शोध कार्य का विषय ‘अभिमन्यु अनत के उपन्यासों में भारतीय संस्कृति और परिवेश बोध’ है। अभिमन्यु अनत मॉरीशस के प्रेमचंद कहे जाते हैं।

शोधार्थी भावना यादव के शोध का विषय ‘अमेरिका की प्रवासी साहित्यकार सुदर्शन प्रियदर्शनी का रचना संसार’ है। केएमआइ के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर के मुताबिक, हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में इस साल वेबिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विदेश से भी कई हस्तियां हिस्सा लेंगी।

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